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Ghaziabad News: महिलाओं की आवाज उठाती रहीं पहली महिला सांसद कमला चौधरी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 01:40 AM IST
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Kamla Chaudhary, the first woman MP, kept raising the voice of women.
गाजियाबाद। हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा सीट पर 1957 में हुए पहले चुनाव से लेकर 2019 तक सिर्फ एक ही महिला सांसद चुनी गई हैं। ये हैं बहुमुखी प्रतिभा की धनी कमला चौधरी जिन्होंने 1962 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ ही वह उन महिला समाज सुधारकों और लेखिकाओं में से एक थीं, जिन्होंने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सामाजिक-राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर भरसक प्रयास किया।
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उनका राजनीतिक सफर 1930 से शुरू हुआ। अपनी पारिवारिक परंपरा को तोड़ने हुए वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गईं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शुरू किए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन से लेकर आजादी मिलने तक उन्होंने कई बार कारावास तक का सफर किया।
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वर्ष 1947 के बाद उन्होंने संविधान बोर्ड के निर्वाचित सदस्य के रूप में काम किया। 1952 में प्रांतीय सरकार की सदस्य के रूप में चुनी गईं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 50वें सत्र में वह वरिष्ठ उपाध्यक्ष थीं। 1962 में उन्होंने हापुड़-गाजियाबाद सीट से टिकट दिया गया। वह लोकसभा की सदस्य बनीं। 1970 में मेरठ में उनका निधन हो गया।
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स्कूली जीवन में ही बनीं लेखिका

22 फरवरी, 1908 को लखनऊ में डिप्टी कलेक्टर पिता राय मनमोहन दयाल के घर जन्मीं कमला चौधरी को लड़की होने के कारण पढ़ाई-लिखाई के लिए परिवार में काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने पंजाब विश्वविधालय से हिंदी साहित्य में रत्न और प्रभाकर की उपाधि हासिल की। साहित्य के प्रति उनकी रुचि स्कूली जीवन के समय से ही थी। महिलाओं के सामाजिक स्थिति के बारे में लेखन भी उन्होंने स्कूल के समय ही शुरू कर दिया था।

संसद में रहीं मुखर

सांसद के तौर कमला चौधरी लोकसभा में काफी मुखर रहीं। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम किया। वह उत्तर प्रदेश राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड की सदस्य भी रहीं। जिला कांग्रेस कमेटी, शहर कांग्रेस कमेटी से लेकर प्रांतीय महिला कांग्रेस कमेटी के विभिन्न पदों पर काम किया।



साहित्यिक सफर

हिंदी साहित्य से अपने प्यार को लेकर कमला चौधरी ने महिलाओं के आंतरिक दुनिया के चारों तरह घूमने वाली कहानियों पर लिखना शुरू किया। उनके विषय विशिष्ट रूप से नारीवादी रहे और उन्हें आकर्षक और बोल्ड माना जाता था। उनके लेखन में उनके दौर की महिलाओं के सामाजिक-सांस्कृतिक स्थितियों का पता चलता है जिसका प्रभाव बचपन से ही उनके जीवन पर भी पड़ता रहा। लैंगिक भेदभाव, विधवापन, महिला इच्छाओं, महिला मजदूरों के शोषण और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसे विषयों पर कमला चौधरी का लेखन देखने को मिलता है।




प्रमुख रचनाएं

उनके लेखन में महिलाओं के जीवन से जुड़ी वह सच्चाई देखने को मिलती है। उन्माद (1934), पिकनिक (1936) यात्रा (1947), बेल पत्र और प्रसादी कमंडल उनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

1962 का चुनाव

कुल मतदाता 4,35,947
वोट पड़े 2,47,270
वैध मत 2,34,925
मतदान प्रतिशत 56.72 प्रतिशत


नतीजा

कमला चौधरी (कांग्रेस) 81,999
मोहम्मद नसीम (निर्दलीय) 53,366
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