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Ghaziabad News: रेलवे ट्रैक पर जन्मी मासूम को मिला घरौंदा, बाल आश्रम में होगा पालन-पोषण
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गाजियाबाद। रेलवे ट्रैक के किनारे दुनिया में आंखें खोलने वाली मासूम देविका (काल्पनिक नाम) को आखिरकार सुरक्षित आशियाना मिल गया। अमर उजाला में ‘हालात ने छीना मां का आंचल, यशोदा बनीं नर्स और आया’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने 55 दिन की बच्ची को घरौंदा बाल आश्रम को सौंप दिया है। अब उसका पालन-पोषण इसी आश्रम में होगा। यहां पहले से शून्य से 10 वर्ष तक की उम्र के 30 बच्चे रह रहे हैं।
इसी 16 अगस्त को पुराने रेलवे स्टेशन के पास मानसिक रूप से बीमार एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के बाद मां और नवजात कई घंटे तक रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी में पड़े रहे। स्थानीय लोगों की नजर पड़ने पर दोनों को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया गया। चार दिन बाद मां बच्ची को अस्पताल में छोड़कर चली गई। इसके बाद से उसकी दुनिया जिला अस्पताल की नर्सरी तक सिमट गई थी।
अस्पताल के कर्मचारियों और नर्सों की देखरेख में उसके दिन बीत रहे थे। इस बीच उसके सुरक्षित पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ी और सीडब्ल्यूसी ने उसे घरौंदा बाल आश्रम भेजने का निर्णय लिया।
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अब आश्रम में मिलेगी नई शुरुआत
पंचशील कॉलोनी के विष्णु एन्क्लेव स्थित घरौंदा बाल आश्रम के संचालक ओंकार सिंह ने बताया कि बच्ची की जिंदगी अब आश्रम में आगे बढ़ेगी। यहां दूसरे बच्चों के बीच उसे रहने, बढ़ने और देखभाल पाने का अवसर मिलेगा। मां की ममता और परिवार के अपनेपन की कमी पूरी तरह दूर कर पाना भले ही संभव न हो, लेकिन सुरक्षित आश्रय मिलने से उसके भविष्य की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा है।
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इसी 16 अगस्त को पुराने रेलवे स्टेशन के पास मानसिक रूप से बीमार एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के बाद मां और नवजात कई घंटे तक रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी में पड़े रहे। स्थानीय लोगों की नजर पड़ने पर दोनों को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया गया। चार दिन बाद मां बच्ची को अस्पताल में छोड़कर चली गई। इसके बाद से उसकी दुनिया जिला अस्पताल की नर्सरी तक सिमट गई थी।
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अस्पताल के कर्मचारियों और नर्सों की देखरेख में उसके दिन बीत रहे थे। इस बीच उसके सुरक्षित पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ी और सीडब्ल्यूसी ने उसे घरौंदा बाल आश्रम भेजने का निर्णय लिया।
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अब आश्रम में मिलेगी नई शुरुआत
पंचशील कॉलोनी के विष्णु एन्क्लेव स्थित घरौंदा बाल आश्रम के संचालक ओंकार सिंह ने बताया कि बच्ची की जिंदगी अब आश्रम में आगे बढ़ेगी। यहां दूसरे बच्चों के बीच उसे रहने, बढ़ने और देखभाल पाने का अवसर मिलेगा। मां की ममता और परिवार के अपनेपन की कमी पूरी तरह दूर कर पाना भले ही संभव न हो, लेकिन सुरक्षित आश्रय मिलने से उसके भविष्य की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा है।