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Ghaziabad News: औद्योगिक क्षेत्र को इस माह भी नहीं मिलेगा टीएसटीपी
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गाजियाबाद। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में भूजल दोहन को रोकने के लिए बनाए जा रहे टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) के निर्माण में लगातार देरी हो रही है। इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 30 जून निर्धारित की गई थी, लेकिन प्लांट के ओवरहेड वाटर टैंक का काम पूरा नहीं होने के कारण परियोजना की समय सीमा 22 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। औद्योगिक क्षेत्र के करीब 320 उद्यमी अब तक टीएसटीपी का कनेक्शन लेने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
इंदिरापुरम में जिले का पहला टीएसटीपी बनाया जा रहा है। इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 30 मई निर्धारित की गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने निर्माणाधीन परियोजना की समीक्षा और साइट का दौरा करने के बाद काम में देरी होने पर नाराजगी जताते हुए 30 जून तक हर हाल में परियोजना को पूरा करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका है। महाप्रबंधक जल केपी आनंद ने बताया कि प्लांट लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन इसके ओवरहेड वाटर टैंक का काम अभी अधूरा है। प्लांट का निर्माण कर रही निर्माण कंपनी वीए टेक वैबाग की ओर से 22 सितंबर तक का समय मांगा गया है।
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भूजल दोहन पर पांच लाख तक लगेगा जुर्माना
आमतौर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में दूषित पानी का दो बार शोधन होता है, लेकिन टीएसटीपी में तीन बार शोधित कर पानी को प्रयोग में लाया जाएगा। इसके पानी में मानकों के मुताबिक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा को कम किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता बेहतर होने पर उद्योगों को आपूर्ति की जाएगी। इस पानी का उपयोग केवल औद्योगिक जरूरत को पूरा करने के लिए होगा। 40 एमएलडी क्षमता के इस प्लांट से साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों में पानी की आपूर्ति होगी। प्लांट शुरू होने के बाद औद्योगिक जरूरत के लिए भूजल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलेगी। सभी परिसरों में भूजल के प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगाई जाएगी। भूजल दोहन करने वालों पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना होगा।
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उद्योगों का सर्वे जारी
टीएसटीपी प्लांट 282 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की 1,400 इकाइयों को इससे जोड़ने की योजना बनाई गई है। अप्रैल तक 284 इकाइयों ने ही टीएसटीपी का कनेक्शन लेने के लिए अनुबंध किया था। प्रमुख सचिव ने अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों को प्लांट से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नगर निगम की तरफ से सर्वे कराया जा रहा है, जिसका नतीजा है कि कनेक्शन लेने के लिए अनुबंध करने वालों की संख्या बढ़कर 320 तक पहुंच गई है। भूजल स्तर के मामले में गाजियाबाद डार्क जोन में है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्रों में टीएसटीपी भूजल संरक्षण में काफी मददगार साबित होगा।
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इंदिरापुरम में जिले का पहला टीएसटीपी बनाया जा रहा है। इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 30 मई निर्धारित की गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने निर्माणाधीन परियोजना की समीक्षा और साइट का दौरा करने के बाद काम में देरी होने पर नाराजगी जताते हुए 30 जून तक हर हाल में परियोजना को पूरा करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका है। महाप्रबंधक जल केपी आनंद ने बताया कि प्लांट लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन इसके ओवरहेड वाटर टैंक का काम अभी अधूरा है। प्लांट का निर्माण कर रही निर्माण कंपनी वीए टेक वैबाग की ओर से 22 सितंबर तक का समय मांगा गया है।
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भूजल दोहन पर पांच लाख तक लगेगा जुर्माना
आमतौर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में दूषित पानी का दो बार शोधन होता है, लेकिन टीएसटीपी में तीन बार शोधित कर पानी को प्रयोग में लाया जाएगा। इसके पानी में मानकों के मुताबिक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा को कम किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता बेहतर होने पर उद्योगों को आपूर्ति की जाएगी। इस पानी का उपयोग केवल औद्योगिक जरूरत को पूरा करने के लिए होगा। 40 एमएलडी क्षमता के इस प्लांट से साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों में पानी की आपूर्ति होगी। प्लांट शुरू होने के बाद औद्योगिक जरूरत के लिए भूजल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलेगी। सभी परिसरों में भूजल के प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगाई जाएगी। भूजल दोहन करने वालों पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना होगा।
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उद्योगों का सर्वे जारी
टीएसटीपी प्लांट 282 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की 1,400 इकाइयों को इससे जोड़ने की योजना बनाई गई है। अप्रैल तक 284 इकाइयों ने ही टीएसटीपी का कनेक्शन लेने के लिए अनुबंध किया था। प्रमुख सचिव ने अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों को प्लांट से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नगर निगम की तरफ से सर्वे कराया जा रहा है, जिसका नतीजा है कि कनेक्शन लेने के लिए अनुबंध करने वालों की संख्या बढ़कर 320 तक पहुंच गई है। भूजल स्तर के मामले में गाजियाबाद डार्क जोन में है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्रों में टीएसटीपी भूजल संरक्षण में काफी मददगार साबित होगा।