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Ghaziabad News: स्वास्थ्य विभाग के दवा घोटाले में हुई सुनवाई
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गाजियाबाद। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत दवाओं और मेडिकल किट की खरीद से जुड़े गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग के कथित घोटाले में सोमवार को सुनवाई हुई। मामले में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिवार कल्याण डॉ. बृजेंद्र पाल सिंह, तत्कालीन उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्टोर डॉ. एसपी सिंह, तत्कालीन मुख्य फार्मासिस्ट घनश्याम सिंह समेत सप्लायर फर्मों से जुड़े नीरज श्रीवास्तव, मनीष कात्याल और रीता श्रीवास्तव आरोपी हैं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए चार नवंबर की तारीख तय की है।
सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2010-11 के दौरान आरोपियों ने मिलीभगत कर एनआरएचएम योजना के तहत दवाओं और मेडिकल किट की खरीद में अनियमितताएं कीं। आरोप है कि एल्बेंडाजोल टैबलेट और नसबंदी ऑपरेशन के बाद इस्तेमाल होने वाली दवा किट की खरीद निर्धारित निर्माताओं के बजाय पहले से तय सप्लायर्स से कराई गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी टेंडर और कोटेशन के साथ कथित तौर पर फर्जी समाचार पत्रों का इस्तेमाल किया गया। इन सामानों की खरीद निर्धारित दरों से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे सरकारी खजाने को करीब 12.69 लाख रुपये का नुकसान होने और आरोपियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचने का आरोप है।
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मामले में सप्लायर्स पर भी अधिक दरों पर दवाओं की आपूर्ति करने और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान हासिल करने का आरोप है। वहीं, तत्कालीन अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर कथित अनियमित खरीद को मंजूरी देने और आपूर्ति के आदेश जारी करने के आरोप हैं।
सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2010-11 के दौरान आरोपियों ने मिलीभगत कर एनआरएचएम योजना के तहत दवाओं और मेडिकल किट की खरीद में अनियमितताएं कीं। आरोप है कि एल्बेंडाजोल टैबलेट और नसबंदी ऑपरेशन के बाद इस्तेमाल होने वाली दवा किट की खरीद निर्धारित निर्माताओं के बजाय पहले से तय सप्लायर्स से कराई गई।
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जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी टेंडर और कोटेशन के साथ कथित तौर पर फर्जी समाचार पत्रों का इस्तेमाल किया गया। इन सामानों की खरीद निर्धारित दरों से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे सरकारी खजाने को करीब 12.69 लाख रुपये का नुकसान होने और आरोपियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचने का आरोप है।
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मामले में सप्लायर्स पर भी अधिक दरों पर दवाओं की आपूर्ति करने और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान हासिल करने का आरोप है। वहीं, तत्कालीन अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर कथित अनियमित खरीद को मंजूरी देने और आपूर्ति के आदेश जारी करने के आरोप हैं।