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हरीश राणा की मां की भावुक अपील: 'हमें बेटे के साथ छोड़ दिया जाए, ताकि अंतिम समय में सही से कह सकें अलविदा'

Sat, 14 Mar 2026 12:25 PM IST
Akash Dubey माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: Akash Dubey Updated Sat, 14 Mar 2026 12:25 PM IST
सार

हरीश का परिवार 13 साल के संघर्ष के बाद बेटे को सम्मानजनक मृत्यु मिलने पर निजता चाहता है। मां निर्मला देवी ने अंतिम समय में अकेले छोड़ने की अपील की है।

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Harish Rana mother makes an emotional plea Let us be left with our son
हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरीश की मां निर्मला देवी ने कहा है कि हमें हमारे बेटे के साथ छोड़ दिया जाए। कोई सवाल न हो। उन्होंने कहा कि 13 साल के संघर्ष और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोग हमसे पूछते हैं कि आपको कैसा लग रहा है?

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उनके अनुसार हम जिन हालात से गुजरे और अब आगे जो भी होगा, उन हालात में एक माता-पिता क्या बोल सकते हैं। परिवार के तौर पर हम चाहते हैं कि जितना वक्त हम उसके साथ हैं, हमारी निजता का ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम समय में उसे अलविदा ठीक से कह सकें।

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हर हालात में हरीश के साथ खड़ा रहा परिवार
शनिवार को अमर उजाला की टीम अशोक राणा के घर पहुंची। इस दौरान पिता अशोक राणा ने बताया कि हरीश को सांस लेने, फीड कराने और मल त्याग के लिए नली लगी हुई हैं। पूरा परिवार उनके साथ रहा है। अब इस घड़ी में उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किस प्रकार से प्रतिक्रिया देनी है। कुछ भी हो उनका बेटा अब छोड़कर ही जा रहा है। राहत सिर्फ इतनी है कि उसे एक सम्मानजनक मृत्यु मिलेगी।

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छोटी तो कभी बड़ी नली लेकर आते थे लोग
अशोक राणा ने बताया कि 13 साल में उन्होंने जो देखा, वह किसी को देखने को न मिले। उन्होंने बताया कि नोएडा से कुछ समय के लिए फिजियोथेरेपिस्ट दिया गया था। 14 दिन आने के बाद वह लौटा नहीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी स्तर पर थेरेपिस्ट तलाशने को कह दिया।

उन्होंने कुछ प्राइवेट थेरेपिस्ट से बात की तो उन्होंने सरकार से रुपये नहीं मिलने की बात कर कार्य से ही इन्कार कर दिया। कुछ आते थे तो उसका कारण यहां कार्य कर लाइसेंस लेना होता था। यह भी उन्होंने बहुत सहा है। इसके अलावा कई बार इलाज के नाम पर हरीश के लिए आने वाली पाइप छोटी-बड़ी आ जाती थी। सवाल करने पर उनकी कीमत ज्यादा होने की बात कही जाती थी। इसके बाद वह खुद ही व्यवस्था करते रहे।

एम्स ले जाने के लिए शाम तक हुई बैठक
परिजनों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के फैसले के बाद शुक्रवार को एम्स में इस संबंध में बैठक हुई। शाम चार बजे तक बैठक चलने के कारण हरीश को एम्स शिफ्ट नहीं किया जा सका। उन्हें शनिवार को एम्स लेकर जाया जा सकता है।

दूसरी तरफ जिला प्रशासन की तरफ से हरीश के पिता अशोक राणा से संपर्क कर एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जानकारी ली गई। हालांकि उन्होंने एम्स से टीम नहीं आने के चलते इससे इन्कार कर दिया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवार से संपर्क बनाए हुए है।

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