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गांव-गांव में बुखार के मरीज फिर भी जांच न बंट रही दवा
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गांव-गांव में बुखार के मरीज फिर भी जांच न बंट रही दवा
हापुड़। वायरल बुखार के मरीजों से अस्पतालों की ओपीडी से लेकर घरों के बेड तक फुल हैं। शहर, गांव के हर घर में बुखार के मरीज हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक हुई जांच में किसी भी मरीज में डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया की पुष्टि नहीं हुई है।
उधर स्वास्थ्य विभाग गांवों में जांच और दवाई वितरण कैंप लगाएगा। मौसम में बदलाव की वजह से हर घर में बुखार, खांसी, जुकाम के मरीज हैं। गढ़ रोड सीएचसी की ओपीडी में आमतौर पर 300-400 लोग ही आते थे। अब यह संख्या औसतन 800 तक पहुंच गई है।
कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीजों की हो रही जांच
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अस्पतालों में आने वाले मरीजों की कोरोना जांच भी हो रही है। हालांकि छह दिन में एक भी संक्रमित नहीं मिला है। डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया के केस भी नहीं मिले।
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थकान से टूट रहा शरीर, ठीक होने में लग रहे 10-12 दिन
वायरल बुखार की चपेट में आए मरीजों को स्वस्थ होने में 10-12 दिन लग रहे हैं। शरीर में थकान इतनी है कि मरीजों का चलना मुश्किल हो रहा है। कमजोरी भी काफी आ रही है। ऐसे में वायरल की चपेट में आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में झोलाछाप के सहारे इलाज
गांवों में अस्पतालों की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों का उपचार झोलाछाप के सहारे चल रहा है। दवा, गोलियों का सेवन घर पर ही कर, मरीज उपचार पा रहे हैं। ऐसे में उनकी जान पर भी आफत बन सकती है।
यह बरतें सावधानी
खुले आसमान के नीचे ओस में सोने से बचें।
ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें।
पानी का अधिक सेवन करें।
घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें।
सफाई का विशेष ध्यान रखें।
हम हैं सतर्क
बुखार से पीड़ित मरीजों की डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया, मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड बनवायी जा रही हैं। साथ ही कोरोना की भी जांच करायी जा रही है। इमरजेंसी के लिए अस्पतालों में वार्ड रिजर्व कर दिए गए हैं। चिकित्सकों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए हैं।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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हापुड़। वायरल बुखार के मरीजों से अस्पतालों की ओपीडी से लेकर घरों के बेड तक फुल हैं। शहर, गांव के हर घर में बुखार के मरीज हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक हुई जांच में किसी भी मरीज में डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया की पुष्टि नहीं हुई है।
उधर स्वास्थ्य विभाग गांवों में जांच और दवाई वितरण कैंप लगाएगा। मौसम में बदलाव की वजह से हर घर में बुखार, खांसी, जुकाम के मरीज हैं। गढ़ रोड सीएचसी की ओपीडी में आमतौर पर 300-400 लोग ही आते थे। अब यह संख्या औसतन 800 तक पहुंच गई है।
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कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीजों की हो रही जांच
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अस्पतालों में आने वाले मरीजों की कोरोना जांच भी हो रही है। हालांकि छह दिन में एक भी संक्रमित नहीं मिला है। डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया के केस भी नहीं मिले।
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थकान से टूट रहा शरीर, ठीक होने में लग रहे 10-12 दिन
वायरल बुखार की चपेट में आए मरीजों को स्वस्थ होने में 10-12 दिन लग रहे हैं। शरीर में थकान इतनी है कि मरीजों का चलना मुश्किल हो रहा है। कमजोरी भी काफी आ रही है। ऐसे में वायरल की चपेट में आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में झोलाछाप के सहारे इलाज
गांवों में अस्पतालों की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों का उपचार झोलाछाप के सहारे चल रहा है। दवा, गोलियों का सेवन घर पर ही कर, मरीज उपचार पा रहे हैं। ऐसे में उनकी जान पर भी आफत बन सकती है।
यह बरतें सावधानी
खुले आसमान के नीचे ओस में सोने से बचें।
ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें।
पानी का अधिक सेवन करें।
घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें।
सफाई का विशेष ध्यान रखें।
हम हैं सतर्क
बुखार से पीड़ित मरीजों की डेंगू, टायफाइड, चिकनगुनिया, मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड बनवायी जा रही हैं। साथ ही कोरोना की भी जांच करायी जा रही है। इमरजेंसी के लिए अस्पतालों में वार्ड रिजर्व कर दिए गए हैं। चिकित्सकों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए हैं।--डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।