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टीएचए के तीन संस्थानों पर तीन करोड़ के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश
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टीएचए के तीन संस्थानों पर तीन करोड़ हर्जाने की सिफारिश
साहिबाबाद। शहर के तीन होटलों पर ठोस कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने के कारण तीन करोड़ रुपये हर्जाने की सिफारिश की गई है। उप्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर एनजीटी से इन होटलों पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।
उप्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने 11 से 14 जून तक ठोस कचरा प्रबंधन का हाल जानने के लिए जिले में कई होटलों, फैक्ट्रियों और मॉल्स का निरीक्षण किया था। इस दौरान उसे रेडिशन होटल, शिप्रा मॉल और मोहन मीकिंस में कचरा प्रबंधन में भारी खामियां मिली थीं। समिति सचिव राजेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि निरीक्षण में समिति ने ठोस कचरा प्रबंधन का हाल जाना था।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेडिशन होटल पर 1.22 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। समिति को निरीक्षण के दौरान होटल में रसोई के अपशिष्ट को अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं मिली। सूखा एवं गीला कचरा एक साथ रखा गया था, प्लास्टिक कचरे को अलग नहीं किया गया था। वहीं एसटीपी का क्लोरीन टैंक खाली था और ईटीपी और एसटीपी का संचालन असंतोषजनक पाया गया। इसी तरह शिप्रा मॉल पर 1.17 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। इस मॉल में निरीक्षण के दौरान फूड कोर्ट में सूखा-गीला अपशिष्ट मिला हुआ पाया गया। फूड कोर्ट और सीवर लाइन के पाइप की निकासी की व्यवस्था अलग नहीं थी। वहीं फूड कोर्ट से आने वाले तैलीय पदार्थ को अलग करने की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि मोहन मीकिंस पर 60.20 लाख रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। यहां खतरनाक अपशिष्ट के निस्तारण के संबंध में अधिकार पत्र नहीं मिला। प्रदूषित जल और अन्य जल के निकासी की व्यवस्था अलग नहीं थी। वहीं ठोस अपशिष्ट के उत्पादन और निस्तारण की जानकारी नहीं मिली।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि समिति ने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। जिसके बाद उक्त तीन संस्थानों के खिलाफ पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के कई संस्थानों की रिपोर्ट अभी तैयार हो रही है।
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साहिबाबाद। शहर के तीन होटलों पर ठोस कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने के कारण तीन करोड़ रुपये हर्जाने की सिफारिश की गई है। उप्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर एनजीटी से इन होटलों पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।
उप्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अनुश्रवण समिति ने 11 से 14 जून तक ठोस कचरा प्रबंधन का हाल जानने के लिए जिले में कई होटलों, फैक्ट्रियों और मॉल्स का निरीक्षण किया था। इस दौरान उसे रेडिशन होटल, शिप्रा मॉल और मोहन मीकिंस में कचरा प्रबंधन में भारी खामियां मिली थीं। समिति सचिव राजेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि निरीक्षण में समिति ने ठोस कचरा प्रबंधन का हाल जाना था।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेडिशन होटल पर 1.22 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। समिति को निरीक्षण के दौरान होटल में रसोई के अपशिष्ट को अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं मिली। सूखा एवं गीला कचरा एक साथ रखा गया था, प्लास्टिक कचरे को अलग नहीं किया गया था। वहीं एसटीपी का क्लोरीन टैंक खाली था और ईटीपी और एसटीपी का संचालन असंतोषजनक पाया गया। इसी तरह शिप्रा मॉल पर 1.17 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। इस मॉल में निरीक्षण के दौरान फूड कोर्ट में सूखा-गीला अपशिष्ट मिला हुआ पाया गया। फूड कोर्ट और सीवर लाइन के पाइप की निकासी की व्यवस्था अलग नहीं थी। वहीं फूड कोर्ट से आने वाले तैलीय पदार्थ को अलग करने की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि मोहन मीकिंस पर 60.20 लाख रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने की सिफारिश की गई है। यहां खतरनाक अपशिष्ट के निस्तारण के संबंध में अधिकार पत्र नहीं मिला। प्रदूषित जल और अन्य जल के निकासी की व्यवस्था अलग नहीं थी। वहीं ठोस अपशिष्ट के उत्पादन और निस्तारण की जानकारी नहीं मिली।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि समिति ने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। जिसके बाद उक्त तीन संस्थानों के खिलाफ पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के कई संस्थानों की रिपोर्ट अभी तैयार हो रही है।