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कई अस्पतालों के बेसमेंट में चल रहा है इलाज
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कई अस्पतालों के बेसमेंट में हो रहा इलाज
गाजियाबाद। अपने शहर की गिनती देश के विकसित शहरों में होती है, लेकिन सुरक्षा के मामले में गाजियाबाद अभी भी पिछड़ा हुआ है। सरकारी हो या प्राइवेट अधिकांश अस्पतालों में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। यदि नोएडा के ईएसआई अस्पताल जैसी घटना हो जाए तो ज्यादातर अस्पताल निपटने में सक्षम नहीं हैं। औपचारिकता निभाने के लिए अग्निशमन यंत्र लगा दिए गए हैं, लेकिन इमरजेंसी में ये काम आएंगेख् ये कहना मुश्किल है। जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से प्राइवेट अस्पतालों के बेसमेंट में मरीजों का इलाज हो रहा है, जो कि काफी खतरनाक है।
अस्पतालों में आग बुझाने की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं। एनओसी के नाम पर खूब खेल किया जा रहा है, जिसके भविष्य में भयानक परिणाम हो सकते हैं। जिल के अधिकांश अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। जबकि भवन के निर्माण से पहले ही अग्निशमन की एनओसी ली जाती है । इसमें अग्निशमन के अधिकारी भी खेल कर देते हैं। अफसरों द्वारा निरीक्षण के नाम पर भी खानापूर्ति कर ली जाती है।
जिले की बात करें तो 75 अस्पतालों को फायर विभाग द्वारा नोटिस जारी की गई।
शहर के तीन बड़े अस्पतालों में सिर्फ महिला अस्पताल केनए भवन में आग बुझाने के पर्याप्त संयंत्र हैं, हालांकि एनओसी इस अस्पताल के पास भी नहीं है। एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में सिर्फ सिलेंडर लटाकर ही आग बुझाने के संयंत्र लगाने की औपचारिकता पूरी कर ली गई।
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डेढ़ साल पहले दिया बजट फिर भी नहीं शुरू हुआ काम
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डासना, मोदीनगर व मुरादनगर में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए 36 लाख रुपये दिए गए थे। एक बार कंपनी सीएमओ कार्यालय आई थी, इसके बाद से दोबारा नहीं आई। कंपनी को टेंडर शासन स्तर से जारी किया गया है।
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जिले में संचालति 16 बड़े अस्पतालों के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन हैं। इसके अलावा 75 अस्पतालों को नोटिस जारी करने केसाथ ही कार्रवाई केलिए सीएमओ को पत्र लिखा जा चुका है।
सुनील कुमार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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नए नर्सिंग होम या क्लीनिक केपंजीकरण के साथ ही फायर एनओसी अनिवार्य है। इसके अलावा जिन अस्पतालों में कमियां मिली हैं, उनसे शपथपत्र लिया गया है, जल्द ही दोबारा नोटिस भेजा जाएगा। तीन सीएचसी पर फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए डेढ़ साल पहले 36 लाख ट्रांसफर किए गए थे, अभी तक कंपनी ने काम नहीं किया है, दोबारा रिमाइंडर शासन व कंपनी को भेजा गया है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। अपने शहर की गिनती देश के विकसित शहरों में होती है, लेकिन सुरक्षा के मामले में गाजियाबाद अभी भी पिछड़ा हुआ है। सरकारी हो या प्राइवेट अधिकांश अस्पतालों में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। यदि नोएडा के ईएसआई अस्पताल जैसी घटना हो जाए तो ज्यादातर अस्पताल निपटने में सक्षम नहीं हैं। औपचारिकता निभाने के लिए अग्निशमन यंत्र लगा दिए गए हैं, लेकिन इमरजेंसी में ये काम आएंगेख् ये कहना मुश्किल है। जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से प्राइवेट अस्पतालों के बेसमेंट में मरीजों का इलाज हो रहा है, जो कि काफी खतरनाक है।
अस्पतालों में आग बुझाने की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं। एनओसी के नाम पर खूब खेल किया जा रहा है, जिसके भविष्य में भयानक परिणाम हो सकते हैं। जिल के अधिकांश अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। जबकि भवन के निर्माण से पहले ही अग्निशमन की एनओसी ली जाती है । इसमें अग्निशमन के अधिकारी भी खेल कर देते हैं। अफसरों द्वारा निरीक्षण के नाम पर भी खानापूर्ति कर ली जाती है।
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जिले की बात करें तो 75 अस्पतालों को फायर विभाग द्वारा नोटिस जारी की गई।
शहर के तीन बड़े अस्पतालों में सिर्फ महिला अस्पताल केनए भवन में आग बुझाने के पर्याप्त संयंत्र हैं, हालांकि एनओसी इस अस्पताल के पास भी नहीं है। एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में सिर्फ सिलेंडर लटाकर ही आग बुझाने के संयंत्र लगाने की औपचारिकता पूरी कर ली गई।
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डेढ़ साल पहले दिया बजट फिर भी नहीं शुरू हुआ काम
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डासना, मोदीनगर व मुरादनगर में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए 36 लाख रुपये दिए गए थे। एक बार कंपनी सीएमओ कार्यालय आई थी, इसके बाद से दोबारा नहीं आई। कंपनी को टेंडर शासन स्तर से जारी किया गया है।
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जिले में संचालति 16 बड़े अस्पतालों के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन हैं। इसके अलावा 75 अस्पतालों को नोटिस जारी करने केसाथ ही कार्रवाई केलिए सीएमओ को पत्र लिखा जा चुका है।
सुनील कुमार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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नए नर्सिंग होम या क्लीनिक केपंजीकरण के साथ ही फायर एनओसी अनिवार्य है। इसके अलावा जिन अस्पतालों में कमियां मिली हैं, उनसे शपथपत्र लिया गया है, जल्द ही दोबारा नोटिस भेजा जाएगा। तीन सीएचसी पर फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए डेढ़ साल पहले 36 लाख ट्रांसफर किए गए थे, अभी तक कंपनी ने काम नहीं किया है, दोबारा रिमाइंडर शासन व कंपनी को भेजा गया है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ