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जिला उद्योग केंद्र के पते पर पंजीकृत करा दी फर्म
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जिला उद्योग केंद्र के पते पर पंजीकृत करा दी फर्म
गाजियाबाद। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई उद्योग आधार योजना में बड़ा खेल सामने आया है, जिसे देख विभागीय अधिकारी भी दंग हैं। मामला एक केमिकल फर्म के जिला उद्योग केंद्र कार्यालय के पते पर पंजीकरण कराने का है। मामला पकड़ में आया तो अधिकारी भी सकते में आ गए। आनन-फानन में तत्काल फर्म का ऑनलाइन पंजीकरण रद्द कर दिया गया और पूरे मामले की तहत तक जाने के लिए जांच बैठा दी गई। प्रारंभिक जांच में मामला बोगस फर्म से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
एमएसएमई उद्योगों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल करने के लिए उद्योग आधार योजना शुरू की, जिसमें केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण की सेवा प्रदान की। योजना उद्यमियों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए थी लेकिन अब उसमें भी खेल किया जा रहा है। जिला उद्योग केंद्र ने पोर्टल पर जिले से रजिस्टर्ड होने वाली इंडस्ट्री या फर्म की जांच की तो पता चला कि उद्योग केंद्र के पते पर ही एक फर्म पंजीकृत करा दी गई। मैसर्स डिस्ट्रिक इंडस्ट्रियल सेंटर नाम से पंजीकृत केमिकल फर्म की डिटेल खंगाली तो पता चला कि यह फर्म ब्रहमपाल नाम के व्यक्ति की तरफ से जिला उद्योग केंद्र कार्यालय ए-1 मेरठ रोड, इंडस्ट्रियल एरिया दिखाकर पंजीकृत कराई गई। अधिकारियों ने फर्म में दिए गए मोबाइल नंबर और ई-मेल को खंगालने तो मोबाइल नंबर बंद था और ई-मेल आईडी भी फर्जी थी। इसके बाद अधिकारियों ने इस फर्म को जेड- कैटेगिरी में डाल रजिस्ट्रेशन रद्द करा दिया। साथ ही मामले की तहत तक जाने के लिए जिला उद्योग केंद्र ने वाणिज्य कर विभाग से जानकारी मांगी है कि क्या फर्म के नाम पर किसी तरह की खरीद बिक्री कर रिटर्न दाखिल किया गया है। उधर, आयकर विभाग से भी जानकारी है कि क्या उनके यहां संबंधित आधार कार्ड से कोई रिटर्न तो दाखिल नहीं किया। विभागीय अधिकारियों को आशंका है कि जिस आधार को दिखाकर पंजीकरण कराया गया वो भी फर्जी हो सकता है।
10 प्रतिशत फर्म हैं फर्जी
अधिकारियों का कहना है कि आधार उद्योग पोर्टल पर निशुल्क एमएसएमई के तहत शुरू होने वाले उद्योग ऑनलाइन पंजीकृत होते हैं। इनमें से करीब 10 प्रतिशत मामले फर्जी फर्म के निकल रहे हैं। विभाग समय-समय पर पोर्टल की जांच करता है। इसके अलावा शिकायत आने या दूसरे संबंधित विभागों से आने पर इन फर्मों की डिटेल चेक की जाती है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद व्यक्ति को 12 अंकों यूनिक नंबर उसकी मेल पर मिल जाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसी विभाग द्वारा इन फर्मों का वेरिफिकेशन नहीं किया जाता। इससे फर्जी फर्मों के रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
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ये मिलता है उद्योग आधार का लाभ
उद्योग आधार पर पंजीकृत इकाई या फर्म को प्रधानमंत्री रोजगार जेनरेशन कार्यक्रम, ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाण पत्र, घरेलू बाजार संवर्धन योजना और केंद्र और प्रदेश सरकार की अन्य योजनाओं में सब्सिडी या पूंजी लाभ मिल जाता है। उद्योग आधार के तहत रजिस्टर्ड उद्योग को बैंक से लेटरल फ्री लोन भी बैंक से मिल सकता है। इसके अलावा बिजली के बिल में छूट, बार कोड रजिस्ट्रेशन सब्सिडी, पेटेंट रजिस्ट्रेशन, इनकम टैक्स पेमेंट जैसे लाभ उद्योग ले सकते हैं।
विभाग समय-समय पर या अन्य संबंधित विभागों से शिकायत मिलने पर चेक फर्म चेक करवाता है। उद्योग के अंदर जाकर जांच और पूछताछ करना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। जब किसी फर्म का पता और डिटेल फर्जी मिलती है तो हम उसे जेड- कैटेगिरी में डाल देते हैं। अब वाणिज्य कर विभाग को मामले की जानकारी देकर रिपोर्ट मांगी है। मामला आगे की जांच के लिए उनके अधिकार क्षेत्र का है।
बीरेंद्र कुमार, उपायुक्त
जिला उद्योग केंद्र
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गाजियाबाद। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई उद्योग आधार योजना में बड़ा खेल सामने आया है, जिसे देख विभागीय अधिकारी भी दंग हैं। मामला एक केमिकल फर्म के जिला उद्योग केंद्र कार्यालय के पते पर पंजीकरण कराने का है। मामला पकड़ में आया तो अधिकारी भी सकते में आ गए। आनन-फानन में तत्काल फर्म का ऑनलाइन पंजीकरण रद्द कर दिया गया और पूरे मामले की तहत तक जाने के लिए जांच बैठा दी गई। प्रारंभिक जांच में मामला बोगस फर्म से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
एमएसएमई उद्योगों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल करने के लिए उद्योग आधार योजना शुरू की, जिसमें केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण की सेवा प्रदान की। योजना उद्यमियों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए थी लेकिन अब उसमें भी खेल किया जा रहा है। जिला उद्योग केंद्र ने पोर्टल पर जिले से रजिस्टर्ड होने वाली इंडस्ट्री या फर्म की जांच की तो पता चला कि उद्योग केंद्र के पते पर ही एक फर्म पंजीकृत करा दी गई। मैसर्स डिस्ट्रिक इंडस्ट्रियल सेंटर नाम से पंजीकृत केमिकल फर्म की डिटेल खंगाली तो पता चला कि यह फर्म ब्रहमपाल नाम के व्यक्ति की तरफ से जिला उद्योग केंद्र कार्यालय ए-1 मेरठ रोड, इंडस्ट्रियल एरिया दिखाकर पंजीकृत कराई गई। अधिकारियों ने फर्म में दिए गए मोबाइल नंबर और ई-मेल को खंगालने तो मोबाइल नंबर बंद था और ई-मेल आईडी भी फर्जी थी। इसके बाद अधिकारियों ने इस फर्म को जेड- कैटेगिरी में डाल रजिस्ट्रेशन रद्द करा दिया। साथ ही मामले की तहत तक जाने के लिए जिला उद्योग केंद्र ने वाणिज्य कर विभाग से जानकारी मांगी है कि क्या फर्म के नाम पर किसी तरह की खरीद बिक्री कर रिटर्न दाखिल किया गया है। उधर, आयकर विभाग से भी जानकारी है कि क्या उनके यहां संबंधित आधार कार्ड से कोई रिटर्न तो दाखिल नहीं किया। विभागीय अधिकारियों को आशंका है कि जिस आधार को दिखाकर पंजीकरण कराया गया वो भी फर्जी हो सकता है।
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10 प्रतिशत फर्म हैं फर्जी
अधिकारियों का कहना है कि आधार उद्योग पोर्टल पर निशुल्क एमएसएमई के तहत शुरू होने वाले उद्योग ऑनलाइन पंजीकृत होते हैं। इनमें से करीब 10 प्रतिशत मामले फर्जी फर्म के निकल रहे हैं। विभाग समय-समय पर पोर्टल की जांच करता है। इसके अलावा शिकायत आने या दूसरे संबंधित विभागों से आने पर इन फर्मों की डिटेल चेक की जाती है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद व्यक्ति को 12 अंकों यूनिक नंबर उसकी मेल पर मिल जाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसी विभाग द्वारा इन फर्मों का वेरिफिकेशन नहीं किया जाता। इससे फर्जी फर्मों के रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
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ये मिलता है उद्योग आधार का लाभ
उद्योग आधार पर पंजीकृत इकाई या फर्म को प्रधानमंत्री रोजगार जेनरेशन कार्यक्रम, ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाण पत्र, घरेलू बाजार संवर्धन योजना और केंद्र और प्रदेश सरकार की अन्य योजनाओं में सब्सिडी या पूंजी लाभ मिल जाता है। उद्योग आधार के तहत रजिस्टर्ड उद्योग को बैंक से लेटरल फ्री लोन भी बैंक से मिल सकता है। इसके अलावा बिजली के बिल में छूट, बार कोड रजिस्ट्रेशन सब्सिडी, पेटेंट रजिस्ट्रेशन, इनकम टैक्स पेमेंट जैसे लाभ उद्योग ले सकते हैं।
विभाग समय-समय पर या अन्य संबंधित विभागों से शिकायत मिलने पर चेक फर्म चेक करवाता है। उद्योग के अंदर जाकर जांच और पूछताछ करना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। जब किसी फर्म का पता और डिटेल फर्जी मिलती है तो हम उसे जेड- कैटेगिरी में डाल देते हैं। अब वाणिज्य कर विभाग को मामले की जानकारी देकर रिपोर्ट मांगी है। मामला आगे की जांच के लिए उनके अधिकार क्षेत्र का है।
बीरेंद्र कुमार, उपायुक्त
जिला उद्योग केंद्र