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छोटी सर्जरी के लिए होता है बड़ा ऑपरेशन
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छोटी सर्जरी के लिए कर रहे बड़ा ऑपरेशन
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में आज भी पुरानी विधि से ऑपरेशन किए जा रहे हैं, क्योंकि अस्पताल में दूरबीन ही नहीं है। आलम यह है कि छोटी सर्जरी के लिए बड़ा ऑपरेशन किया जा रहा है। इससे मरीज को कई दिनों तक घाव सुखाने के लिए बेड पर रहना पड़ता है। अधिकांश लोग मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन कराने के लिए जाते हैं जहां छोटे ऑपरेशन में भी लोगों को 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 8 से 10 ऑपरेशन किए जाते हैं।
66 साल से संचालित एमएमजी अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है, लेकिन आज तक अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए सुविधाएं पुराने जमाने वाली ही हैं। अगर किसी हादसे में घायल के हाथ या पैर की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर इंप्लांट डलाने की जरूरत पड़ती है तो तीमारदारों को खरीदकर लाना पड़ता है।
सामान्य ऑपरेशन की ही सुविधा
एमएमजी अस्पताल में सिर्फ सामान्य ऑपरेशन ही किए जाते हैं। इसमें पित्त की थैली में पथरी, पाइल्स, अपेंडिक्स, हार्निया और मोतियाबिंद के अलावा हड्डी के ऑपरेशन किए जाते हैं। अस्पताल में गुर्दे की पथरी का भी ऑपरेशन नहीं होता है, क्योंकि अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऑपरेशन भी दोपहर तक ही होते हैं। अगर किसी दुर्घटना में कोई घायल दोपहर दो बजे के बाद पहुंचता है तो उसका ऑपरेशन दूसरे या तीसरे दिन ही हो पाता है।
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जांच रिपोर्ट मिलने में लग जाते हैं दो से तीन दिन, इसके बाद मिलती है तारीख
अगर किसी मरीज को ऑपरेशन कराना हो तो उसे डायबिटीज, एचआईवी, हेपेटाइटिस, हृदय की धड़कन और कोरोना की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर ऑपरेशन की तारीख देते हैं।
दूरबीन विधि से ऑपरेशन में तीसरे दिन मरीज हो जाते हैं डिस्चार्ज
आईएमए प्रवक्ता डॉ. नवनीत वर्मा का कहना है कि दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने पर तीसरे दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। इसमें बहुत पतली दूरबीन व बहुत ही महीन छेद के माध्यम से पथरी निकाली जाती है। सामान्य तरीके से ऑपरेशन करने पर बड़ा चीरा लगाया जाता है, पांच से सात टांके लगाने पड़ते हैं। इस कारण से मरीजों को छह से सात दिन तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। इसके अलावा दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने वाले मरीज जल्द ही स्वस्थ हो जाते हैं, वहीं सामान्य विधि से ऑपरेशन कराने पर 30 से 35 दिन तक एहतियात बरतना पड़ता है।
शासन और सीएमओ को लिखा गया है पत्र
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश चतुर्वेदी का कहना है कि अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं, इसलिए गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन नहीं हो पाता है। अस्पताल में दूरबीन विधि से ऑपरेशन शुरू कराने के लिए सीएमओ और प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
जल्द ही शुरू कराया जाएगा दूरबीन विधि से ऑपरेशन
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि सीएमएस से डिमांड लेटर मांगा गया था, जल्द ही अस्पताल को दूरबीन उपलब्ध कराई जाएगी, इसके बाद मरीजों को सुविधा मिलने लगेगी।
दूरबीन विधि से ऑपरेशन और सामान्य ऑपरेशन में अंतर
खुली सर्जरी - दूरबीन से सर्जरी
तीसरे दिन छुट्टी 5 से 7 दिन में छुट्टी
संक्रमण का खतरा अधिक संक्रमण खतरा बहुत कम
सर्जिकल हर्निया का खतरा हर्निया का खतरा नहीं रहता
सर्जरी की रिकवरी में कई दिन लगते हैं कम समय में रिकवरी हो जाती है।
सर्जरी के बाद वजन नहीं उठाते वजन उठाने पर खतरा नहीं होता।
खून का रिसाव और खराब होना खून रिसाव बहुत कम होता है।
ऑपरेशन - सरकारी में खर्च - प्राइवेट में खर्च (हजार में)
प्रोस्टेट 491 रुपये 30 से 35
पित्त की पथरी 491 30 से 35
अपेंडिक्स - 491 32से 35
गुर्दे की पथरी - नहीं होता ऑपरेशन 40 से 42
हार्निया - 491 - 30 से 35
पाइल्स - 491 - 25से 27
मोतियाबिंद - निशुल्क - 15 से 40
हड्डी के ऑपरेशन - 491 और इंप्लांट खर्च अलग - 30 से 90
कार्डिएक सर्जरी - नहीं होती - 90 से 4.25 लाख
नोट : अलग -अलग अस्पताल में खर्च अलग भी हो सकते हैं।
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गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में आज भी पुरानी विधि से ऑपरेशन किए जा रहे हैं, क्योंकि अस्पताल में दूरबीन ही नहीं है। आलम यह है कि छोटी सर्जरी के लिए बड़ा ऑपरेशन किया जा रहा है। इससे मरीज को कई दिनों तक घाव सुखाने के लिए बेड पर रहना पड़ता है। अधिकांश लोग मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन कराने के लिए जाते हैं जहां छोटे ऑपरेशन में भी लोगों को 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 8 से 10 ऑपरेशन किए जाते हैं।
66 साल से संचालित एमएमजी अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है, लेकिन आज तक अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए सुविधाएं पुराने जमाने वाली ही हैं। अगर किसी हादसे में घायल के हाथ या पैर की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर इंप्लांट डलाने की जरूरत पड़ती है तो तीमारदारों को खरीदकर लाना पड़ता है।
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सामान्य ऑपरेशन की ही सुविधा
एमएमजी अस्पताल में सिर्फ सामान्य ऑपरेशन ही किए जाते हैं। इसमें पित्त की थैली में पथरी, पाइल्स, अपेंडिक्स, हार्निया और मोतियाबिंद के अलावा हड्डी के ऑपरेशन किए जाते हैं। अस्पताल में गुर्दे की पथरी का भी ऑपरेशन नहीं होता है, क्योंकि अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऑपरेशन भी दोपहर तक ही होते हैं। अगर किसी दुर्घटना में कोई घायल दोपहर दो बजे के बाद पहुंचता है तो उसका ऑपरेशन दूसरे या तीसरे दिन ही हो पाता है।
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जांच रिपोर्ट मिलने में लग जाते हैं दो से तीन दिन, इसके बाद मिलती है तारीख
अगर किसी मरीज को ऑपरेशन कराना हो तो उसे डायबिटीज, एचआईवी, हेपेटाइटिस, हृदय की धड़कन और कोरोना की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर ऑपरेशन की तारीख देते हैं।
दूरबीन विधि से ऑपरेशन में तीसरे दिन मरीज हो जाते हैं डिस्चार्ज
आईएमए प्रवक्ता डॉ. नवनीत वर्मा का कहना है कि दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने पर तीसरे दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। इसमें बहुत पतली दूरबीन व बहुत ही महीन छेद के माध्यम से पथरी निकाली जाती है। सामान्य तरीके से ऑपरेशन करने पर बड़ा चीरा लगाया जाता है, पांच से सात टांके लगाने पड़ते हैं। इस कारण से मरीजों को छह से सात दिन तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। इसके अलावा दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने वाले मरीज जल्द ही स्वस्थ हो जाते हैं, वहीं सामान्य विधि से ऑपरेशन कराने पर 30 से 35 दिन तक एहतियात बरतना पड़ता है।
शासन और सीएमओ को लिखा गया है पत्र
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश चतुर्वेदी का कहना है कि अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं, इसलिए गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन नहीं हो पाता है। अस्पताल में दूरबीन विधि से ऑपरेशन शुरू कराने के लिए सीएमओ और प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
जल्द ही शुरू कराया जाएगा दूरबीन विधि से ऑपरेशन
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि सीएमएस से डिमांड लेटर मांगा गया था, जल्द ही अस्पताल को दूरबीन उपलब्ध कराई जाएगी, इसके बाद मरीजों को सुविधा मिलने लगेगी।
दूरबीन विधि से ऑपरेशन और सामान्य ऑपरेशन में अंतर
खुली सर्जरी - दूरबीन से सर्जरी
तीसरे दिन छुट्टी 5 से 7 दिन में छुट्टी
संक्रमण का खतरा अधिक संक्रमण खतरा बहुत कम
सर्जिकल हर्निया का खतरा हर्निया का खतरा नहीं रहता
सर्जरी की रिकवरी में कई दिन लगते हैं कम समय में रिकवरी हो जाती है।
सर्जरी के बाद वजन नहीं उठाते वजन उठाने पर खतरा नहीं होता।
खून का रिसाव और खराब होना खून रिसाव बहुत कम होता है।
ऑपरेशन - सरकारी में खर्च - प्राइवेट में खर्च (हजार में)
प्रोस्टेट 491 रुपये 30 से 35
पित्त की पथरी 491 30 से 35
अपेंडिक्स - 491 32से 35
गुर्दे की पथरी - नहीं होता ऑपरेशन 40 से 42
हार्निया - 491 - 30 से 35
पाइल्स - 491 - 25से 27
मोतियाबिंद - निशुल्क - 15 से 40
हड्डी के ऑपरेशन - 491 और इंप्लांट खर्च अलग - 30 से 90
कार्डिएक सर्जरी - नहीं होती - 90 से 4.25 लाख
नोट : अलग -अलग अस्पताल में खर्च अलग भी हो सकते हैं।
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