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एक भी दिन नहीं हुआ इलाज, 17 उपस्वास्थ्य केंद्र बने खंडहर, तोड़कर बनेंगे नए
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एक भी दिन नहीं हुआ इलाज 17 उपस्वास्थ्य केंद्र बने खंडहर, तोड़कर बनेंगे नए
गाजियाबाद। जिले में 17 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जहां एक भी दिन इलाज नहीं हुआ और वह खंडहर बन गए हैं। उसी जगह पर इनको तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र आबादी से दूर होने के कारण टीका करने के लिए एएनएम कभी केंद्र पर गईं ही नहीं। नर्स दूसरों के घर में बैठकर टीका लगाती हैं। छह केंद्र ऐसे हैं, जहां पर निर्माण के लिए जगह नहीं मिली तो उन्हीं केंद्रों के दोबारा मरम्मत किये जाने की योजना बनाई है।
जिले के चार ब्लॉक लोनी, भोजपुर, मुरादनगर और रजापुर में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा 146 ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। इसमें 119 केंद्र विभाग के भवन में चलते हैं, जबकि 27 केंद्रों के लिए जगह नहीं मिली तो प्राइवेट भवन में संचालित हो रहे हैं। सरकारी भवन में चलने वाले अधिकांश केंद्र बंद पड़े हैं।
पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट पर शासन ने दी ध्वस्त करने की अनुमति
स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता आदित्य धीमान ने बताया कि 17 स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण 40 वर्ष पहले हुए थे। अब यह सभी केंद्र पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इनके मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी से सर्वे कराया गया था, लेकिन जांच के बाद पीडब्ल्यूडी ने जर्जर बताते हुए ध्वस्त करने की रिपोर्ट दी है। सीएमओ ने शासन को पत्र लिखा है।
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एएनएम और लाभार्थियों को टीकाकरण के लिए होना पड़ता है परेशान
उपस्वास्थ्य केंद्र कई साल से जर्जर है, टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच जरूरी दवाएं मिनी सचिवालय में दी जाती हैं।
सुधा त्यागी, एएनएम बसंतपुर सैंतली
पहले वीरान थे, अब आबादी के पास हैं
17 उपस्वास्थ्य केंद्र कई साल से बंद हैं। टीकाकरण कहीं पर भी बंद नहीं है, सेंटर जर्जर होने से दूसरे स्थान पर व्यवस्था की गई है। पहले सभी उपस्वास्थ्य केंद्र आबादी के किनारे बनाए गए थे, शुरुआत में ही एएनएम सेंटरों पर जाने से बचती रहीं। बसावट बढ़ने से अब केंद्र आबादी के बीच या पास में हो गए हैं।
डॉ. विश्राम सिंह, नोडल अधिकारी एनआरएचएम
स्वास्थ्य विभाग वहीं पर केंद्र बनाता है, जहां ग्राम समिति निशुल्क जमीन उपलब्ध कराती है। प्रशासनिक अधिकारियों की अनुशंसा के बाद निर्माण कार्य कराया जाता है। 17 जर्जर उपस्वास्थ्य केंद्रों को ध्वस्त करने के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। शासन से अनुमति मिलने के बाद ध्वस्त कर नया निर्माण कराया जाएगा।
डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
इन केंद्रों को तोड़कर बनाया जाएगा नया
रजापुर - अटौर, भोवापुर, नूरपुर।
लोनी - अगरौला, खड़खड़ी, राजपुर।
मुरादनगर - शहजादपुर, असालतनगर, आमदपुर मतौर, सैंतली, सुराना, जलालपुर, असदपुर नांगल, परिवार कल्याण मुख्य केंद्र मुरादनगर।
भोजपुर - शाहजहांपुर, याकूबपुर मवी, चुड़ियाला, त्यौड़ी
............
नहीं मिली जगह, पुराने का ही मरम्मत
रजापुर - दोसा, मानकी, भूड़गढ़ी, मथुरापुर
मुरादनगर - सुहाना,
लोनी -मीरपुर हिंदू
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गाजियाबाद। जिले में 17 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जहां एक भी दिन इलाज नहीं हुआ और वह खंडहर बन गए हैं। उसी जगह पर इनको तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र आबादी से दूर होने के कारण टीका करने के लिए एएनएम कभी केंद्र पर गईं ही नहीं। नर्स दूसरों के घर में बैठकर टीका लगाती हैं। छह केंद्र ऐसे हैं, जहां पर निर्माण के लिए जगह नहीं मिली तो उन्हीं केंद्रों के दोबारा मरम्मत किये जाने की योजना बनाई है।
जिले के चार ब्लॉक लोनी, भोजपुर, मुरादनगर और रजापुर में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा 146 ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। इसमें 119 केंद्र विभाग के भवन में चलते हैं, जबकि 27 केंद्रों के लिए जगह नहीं मिली तो प्राइवेट भवन में संचालित हो रहे हैं। सरकारी भवन में चलने वाले अधिकांश केंद्र बंद पड़े हैं।
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पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट पर शासन ने दी ध्वस्त करने की अनुमति
स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता आदित्य धीमान ने बताया कि 17 स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण 40 वर्ष पहले हुए थे। अब यह सभी केंद्र पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इनके मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी से सर्वे कराया गया था, लेकिन जांच के बाद पीडब्ल्यूडी ने जर्जर बताते हुए ध्वस्त करने की रिपोर्ट दी है। सीएमओ ने शासन को पत्र लिखा है।
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एएनएम और लाभार्थियों को टीकाकरण के लिए होना पड़ता है परेशान
उपस्वास्थ्य केंद्र कई साल से जर्जर है, टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच जरूरी दवाएं मिनी सचिवालय में दी जाती हैं।
सुधा त्यागी, एएनएम बसंतपुर सैंतली
पहले वीरान थे, अब आबादी के पास हैं
17 उपस्वास्थ्य केंद्र कई साल से बंद हैं। टीकाकरण कहीं पर भी बंद नहीं है, सेंटर जर्जर होने से दूसरे स्थान पर व्यवस्था की गई है। पहले सभी उपस्वास्थ्य केंद्र आबादी के किनारे बनाए गए थे, शुरुआत में ही एएनएम सेंटरों पर जाने से बचती रहीं। बसावट बढ़ने से अब केंद्र आबादी के बीच या पास में हो गए हैं।
डॉ. विश्राम सिंह, नोडल अधिकारी एनआरएचएम
स्वास्थ्य विभाग वहीं पर केंद्र बनाता है, जहां ग्राम समिति निशुल्क जमीन उपलब्ध कराती है। प्रशासनिक अधिकारियों की अनुशंसा के बाद निर्माण कार्य कराया जाता है। 17 जर्जर उपस्वास्थ्य केंद्रों को ध्वस्त करने के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। शासन से अनुमति मिलने के बाद ध्वस्त कर नया निर्माण कराया जाएगा।
डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
इन केंद्रों को तोड़कर बनाया जाएगा नया
रजापुर - अटौर, भोवापुर, नूरपुर।
लोनी - अगरौला, खड़खड़ी, राजपुर।
मुरादनगर - शहजादपुर, असालतनगर, आमदपुर मतौर, सैंतली, सुराना, जलालपुर, असदपुर नांगल, परिवार कल्याण मुख्य केंद्र मुरादनगर।
भोजपुर - शाहजहांपुर, याकूबपुर मवी, चुड़ियाला, त्यौड़ी
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नहीं मिली जगह, पुराने का ही मरम्मत
रजापुर - दोसा, मानकी, भूड़गढ़ी, मथुरापुर
मुरादनगर - सुहाना,
लोनी -मीरपुर हिंदू