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न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर निगम ने गुपचुप किराये पर लिए 50 ट्रैक्टर
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न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर निगम ने
गुपचुप किराए पर लिए 50 ट्रैक्टर
- सड़कों पर दिखते नहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली, हर माह किया जा रहा 30 लाख का भुगतान
- पार्षदों के जानकारों ने भी किराए पर लगाए ट्रैक्टर
राजीव शर्मा
गाजियाबाद। न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने गुपचुप 50 ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर ले लिए। यह ट्रैक्टर-ट्रॉली चहेते पार्षदों के वार्डों में तैनात दर्शाए गए हैं, जबकि अन्य पार्षदों को इन्हें किराए पर लिए जाने की भनक तक नहीं है। इनमें से अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर नहीं, बल्कि सिर्फ कागजों में दौड़ रहे हैं। प्रत्येक ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया 60 हजार रुपये मासिक तय किया गया है और स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर हर माह इन ट्रैक्टरों के किराए पर ही करीब 30 लाख रुपये खर्च दिखाकर फंड को ठिकाने लगाया जा रहा है।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में करीब 250 बड़े वाहन हैं और 100 से ज्यादा अपने छोटे वाहन हैं। इन वाहनों को डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सेकेंडरी सेंटर से कूड़ा उठाने में लगाया गया है। इसके अलावा छोटी गलियों में कूड़ा कलेक्शन के लिए नगर निगम ने 100 ई-रिक्शा भी खरीद रखे हैं। निजी ठेकेदारों से भी कूड़ा कलेक्शन के लिए छोटे वाहन किराए पर लिए गए हैं। इनके लिए नगर निगम की बोर्ड बैठक और मेयर की अध्यक्षता में बनी अवस्थापना निधि की समिति में प्रस्ताव पास कराए गए थे। अब स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर सरकारी फंड को पानी की तरह बहाया जाने लगा है। निगम के स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों के वार्डों में वाहनों की कमी दर्शाकर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर ले लिए हैं, लेकिन न तो इन्हें किराए पर रखे जाने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव पास कराया गया और न ही वित्तीय स्वीकृति बोर्ड से ली गई।
पुराने वाहनों से भी महंगे किराए पर लिए ट्रैक्टर
नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टाटा ऐस (छोटा हाथी) किराए पर लिए हुए हैं। प्रत्येक वाहन के लिए नगर निगम 41 हजार रुपये का भुगतान करता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का खर्च इससे कम है, लेकिन नगर निगम ने टाटा ऐस वाहन से ट्रैक्टर का किराया करीब 19 हजार रुपये मासिक ज्यादा तय किया है। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए 1980 रुपये प्रतिदिन यानी करीब 60 हजार रुपये मासिक किराया तय किया गया है। टाटा-ऐस से डेढ़ गुना ज्यादा इन ट्रैक्टरों के किराए का भुगतान किया जा रहा है।
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ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रेस कर पाना भी मुश्किल
नगर निगम ने अपने बड़े वाहनों में तो जीपीएस लगा दिए हैं, लेकिन किराए पर लिए गए वाहनों में न तो जीपीएस है और न ही इनकी मॉनीटरिंग हो पा रही है। इसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली को भी ट्रेस कर पाना मुश्किल है। यह ट्रैक्टर-ट्रॉली वार्ड में पहुंच रहे हैं या नहीं, इसकी पुष्टि न तो लोग कर पाते हैं और न ही पार्षद।
स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर गोलमाल
नगर निगम अधिकारियों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली कब किराए पर लिए और इन्हें कहां लगाया गया है, हमें पता नहीं है। इसका कोई प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में पास नहीं कराया गया। स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। 2015 की दरों पर वाहन किराए पर नहीं लिए जा सकते, हर साल इनकी दर तय करने के लिए टेंडर कॉल करने चाह्रिए।
- मनोज चौधरी, निगम पार्षद
वित्तीय स्वीकृत किससे ली गई ?
मेरे वार्ड में ट्रैक्टर-ट्रॉली तो दूर 15-15 दिन तक कूड़ा कलेक्शन करने वाली गाड़ी ही नहीं आती है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का कभी बोर्ड में प्रस्ताव पास नहीं कराया गया तो अधिकारियों ने वित्तीय स्वीकृति किससे ली। सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। महापौर को इसकी जांच करानी चाहिए।
- नरेश जाटव, पार्षद, वार्ड-7
नगर आयुक्त से लेंगे जानकारी
कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉली पहले से शहर में कूड़ा उठाने के लिए लगाए गए थे। अब कुछ और लगाए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। सदन की बैठक में इनका प्रस्ताव नहीं आया है, कार्यकारिणी की जानकारी नहीं है। नगरायुक्त से ट्रैक्टर के संबंध में वार्ता कर जानकारी लेंगे।
- राजेंद्र त्यागी, निगम पार्षद, राजनगर क्षेत्र
सफाई देने में लगे अधिकारी
सफाई निरीक्षकों और जोनल सेनिटरी ऑफिसर की डिमांड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर लिए गए हैं। इन्हें कॉलोनियों से सेकेंडरी कूड़ा कलेक्शन तक कचरा पहुंचाने के लिए लगाया गया है। बोर्ड में प्रस्ताव लाने की आवश्यकता नहीं थी, 2015 में तय हुए किराए के आधार पर ही इन्हें भुगतान किया जा रहा है।
- डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर निगम ने
गुपचुप किराए पर लिए 50 ट्रैक्टर
- सड़कों पर दिखते नहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली, हर माह किया जा रहा 30 लाख का भुगतान
- पार्षदों के जानकारों ने भी किराए पर लगाए ट्रैक्टर
राजीव शर्मा
गाजियाबाद। न प्रस्ताव, न टेंडर, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने गुपचुप 50 ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर ले लिए। यह ट्रैक्टर-ट्रॉली चहेते पार्षदों के वार्डों में तैनात दर्शाए गए हैं, जबकि अन्य पार्षदों को इन्हें किराए पर लिए जाने की भनक तक नहीं है। इनमें से अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर नहीं, बल्कि सिर्फ कागजों में दौड़ रहे हैं। प्रत्येक ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया 60 हजार रुपये मासिक तय किया गया है और स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर हर माह इन ट्रैक्टरों के किराए पर ही करीब 30 लाख रुपये खर्च दिखाकर फंड को ठिकाने लगाया जा रहा है।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में करीब 250 बड़े वाहन हैं और 100 से ज्यादा अपने छोटे वाहन हैं। इन वाहनों को डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सेकेंडरी सेंटर से कूड़ा उठाने में लगाया गया है। इसके अलावा छोटी गलियों में कूड़ा कलेक्शन के लिए नगर निगम ने 100 ई-रिक्शा भी खरीद रखे हैं। निजी ठेकेदारों से भी कूड़ा कलेक्शन के लिए छोटे वाहन किराए पर लिए गए हैं। इनके लिए नगर निगम की बोर्ड बैठक और मेयर की अध्यक्षता में बनी अवस्थापना निधि की समिति में प्रस्ताव पास कराए गए थे। अब स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर सरकारी फंड को पानी की तरह बहाया जाने लगा है। निगम के स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों के वार्डों में वाहनों की कमी दर्शाकर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर ले लिए हैं, लेकिन न तो इन्हें किराए पर रखे जाने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव पास कराया गया और न ही वित्तीय स्वीकृति बोर्ड से ली गई।
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पुराने वाहनों से भी महंगे किराए पर लिए ट्रैक्टर
नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टाटा ऐस (छोटा हाथी) किराए पर लिए हुए हैं। प्रत्येक वाहन के लिए नगर निगम 41 हजार रुपये का भुगतान करता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का खर्च इससे कम है, लेकिन नगर निगम ने टाटा ऐस वाहन से ट्रैक्टर का किराया करीब 19 हजार रुपये मासिक ज्यादा तय किया है। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए 1980 रुपये प्रतिदिन यानी करीब 60 हजार रुपये मासिक किराया तय किया गया है। टाटा-ऐस से डेढ़ गुना ज्यादा इन ट्रैक्टरों के किराए का भुगतान किया जा रहा है।
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ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रेस कर पाना भी मुश्किल
नगर निगम ने अपने बड़े वाहनों में तो जीपीएस लगा दिए हैं, लेकिन किराए पर लिए गए वाहनों में न तो जीपीएस है और न ही इनकी मॉनीटरिंग हो पा रही है। इसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली को भी ट्रेस कर पाना मुश्किल है। यह ट्रैक्टर-ट्रॉली वार्ड में पहुंच रहे हैं या नहीं, इसकी पुष्टि न तो लोग कर पाते हैं और न ही पार्षद।
स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर गोलमाल
नगर निगम अधिकारियों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली कब किराए पर लिए और इन्हें कहां लगाया गया है, हमें पता नहीं है। इसका कोई प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में पास नहीं कराया गया। स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। 2015 की दरों पर वाहन किराए पर नहीं लिए जा सकते, हर साल इनकी दर तय करने के लिए टेंडर कॉल करने चाह्रिए।
- मनोज चौधरी, निगम पार्षद
वित्तीय स्वीकृत किससे ली गई ?
मेरे वार्ड में ट्रैक्टर-ट्रॉली तो दूर 15-15 दिन तक कूड़ा कलेक्शन करने वाली गाड़ी ही नहीं आती है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का कभी बोर्ड में प्रस्ताव पास नहीं कराया गया तो अधिकारियों ने वित्तीय स्वीकृति किससे ली। सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। महापौर को इसकी जांच करानी चाहिए।
- नरेश जाटव, पार्षद, वार्ड-7
नगर आयुक्त से लेंगे जानकारी
कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉली पहले से शहर में कूड़ा उठाने के लिए लगाए गए थे। अब कुछ और लगाए गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। सदन की बैठक में इनका प्रस्ताव नहीं आया है, कार्यकारिणी की जानकारी नहीं है। नगरायुक्त से ट्रैक्टर के संबंध में वार्ता कर जानकारी लेंगे।
- राजेंद्र त्यागी, निगम पार्षद, राजनगर क्षेत्र
सफाई देने में लगे अधिकारी
सफाई निरीक्षकों और जोनल सेनिटरी ऑफिसर की डिमांड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर लिए गए हैं। इन्हें कॉलोनियों से सेकेंडरी कूड़ा कलेक्शन तक कचरा पहुंचाने के लिए लगाया गया है। बोर्ड में प्रस्ताव लाने की आवश्यकता नहीं थी, 2015 में तय हुए किराए के आधार पर ही इन्हें भुगतान किया जा रहा है।
- डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी