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Ghaziabad News: फाॅर्मेलिन मिलाकर तैयार कर रहे थे खोया, पिता-पुत्र पर केस
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गाजियाबाद। रक्षाबंधन पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इसमें कुछ लोग मुनाफे के लिए लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे ही मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने भोजपुर के कलछिना में कार्रवाई की है। जहां खोए में फॉर्मेलिन मिलने की बात सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार इसके रसायन को खाने से धीरे-धीरे किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों पर असर पड़ता है। मंगलवार रात को गाजियाबाद और मेरठ की टीम यहां जांच के लिए पहुंची थी। सहायक आयुक्त खाद्य सुरेश मिश्र ने बताया कि मौके से 160 किग्रा खोया, 5 बोरी स्किम्ड मिल्क पाउडर, सिंथेटिक कलर, फॉर्मेलिन, सोडियम बाई कार्बोनेट, 17 टीन वनस्पति मिला है। नौ सैंपल लेकर खोए को नष्ट कराया गया है। साथ ही मामले में हानिकारक या विषैली खाद्य सामग्री बेचने की धारा 275 समेत अन्य भोजपुर थाने में संचालक यामीन और उसके पुत्र रईस पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दोनों कलछीना के ही रहने वाले हैं।
हर दिन 800 किलो खोया भेजा जा रहा था दिल्ली
जांच में सामने आया है कि फैक्टरी से त्योहारों पर हर दिन 800 किलो तक खोया तैयार किया जा रहा था। इसकी सप्लाई दिल्ली होती थी। यहां से रोजाना तीन गाड़ियों को खोया भेजा जा रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास बीते चार वर्षों से उत्पादन के लिए लाइसेंस था। इसके नाम पर ही वह भी केमिकल से तैयार खोया और दूसरे उत्पाद तैयार कर बेच रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गाजियाबाद में वह सीधे किसी को खोया नहीं देते हैं। दिल्ली के कुछ बड़े मिष्ठान भंडार उनकी सप्लाई होती है। अधिकारी के अनुसार केमिकल से तैयार इस खोए की मिलावट की पहचान करना मुश्किल होता है। साथ ही बाजार में इसका दाम भी शुद्ध के आसपास ही रखा जाता है। इसमें तैयार करने वाले और कारोबारी से डेढ़ से दो गुना तक मुनाफा कमा रहे थे।
फॉर्मेलिन है धीमा जहर
आरोपी खोया लंबे समय तक इसके लिए उसमें फॉर्मेलिन डालते थे। वरिष्ठ फिजिशियन संतराम वर्मा ने बताया कि फॉर्मेलिन मिला खाद्य पदार्थ के लगातार सेवन से किडनी, लीवर में दिक्कत हो सकती है। इसके साथ यह कैंसर का भी एक कारण बन सकता है। इसके साथ-साथ इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी रोग के साथ पाचन क्षमता भी असर पड़ सकता है।
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हर दिन 800 किलो खोया भेजा जा रहा था दिल्ली
जांच में सामने आया है कि फैक्टरी से त्योहारों पर हर दिन 800 किलो तक खोया तैयार किया जा रहा था। इसकी सप्लाई दिल्ली होती थी। यहां से रोजाना तीन गाड़ियों को खोया भेजा जा रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास बीते चार वर्षों से उत्पादन के लिए लाइसेंस था। इसके नाम पर ही वह भी केमिकल से तैयार खोया और दूसरे उत्पाद तैयार कर बेच रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गाजियाबाद में वह सीधे किसी को खोया नहीं देते हैं। दिल्ली के कुछ बड़े मिष्ठान भंडार उनकी सप्लाई होती है। अधिकारी के अनुसार केमिकल से तैयार इस खोए की मिलावट की पहचान करना मुश्किल होता है। साथ ही बाजार में इसका दाम भी शुद्ध के आसपास ही रखा जाता है। इसमें तैयार करने वाले और कारोबारी से डेढ़ से दो गुना तक मुनाफा कमा रहे थे।
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फॉर्मेलिन है धीमा जहर
आरोपी खोया लंबे समय तक इसके लिए उसमें फॉर्मेलिन डालते थे। वरिष्ठ फिजिशियन संतराम वर्मा ने बताया कि फॉर्मेलिन मिला खाद्य पदार्थ के लगातार सेवन से किडनी, लीवर में दिक्कत हो सकती है। इसके साथ यह कैंसर का भी एक कारण बन सकता है। इसके साथ-साथ इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी रोग के साथ पाचन क्षमता भी असर पड़ सकता है।
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