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पहले कोरोना अब प्रदूषण ने बना दिया फेफड़ों को बीमार
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पहले कोरोना अब प्रदूषण ने बना दिया फेफड़ों को बीमार
गाजियाबाद। पहले कोरोना और अब प्रदूषण ने फेफड़ों को बीमार बना दिया है। इस समय सिगरेट का कश नहीं लगाने वाले भी गंभीर प्रदूषण के कारण दस सिगरेट के बराबर एक घंटे में जहरीली गैस निगल रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीज बढ़ रहे हैं। नवंबर महीने के तीसरे बुधवार को लोगों को जागरूक करने के लिए सीओपीडी डे मनाया जाता है।
सीओपीडी के लक्षण
सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित सिन्हा का कहना है कि दो महीने तक लगातार बलगम की तकलीफ रहती है और खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं असर नहीं करती हैं। अधिक बलगम वाली खांसी की समस्या रहना, सांस की तकलीफ , खासकर शारीरिक श्रम करने पर सांस लेने में घरघराहट और सीने में जकड़न होना आदि इसके लक्षण हैं।
ऑक्सीजन थेरेपी से मिलता है लाभ
आईएमए के अध्यक्ष एवं चेस्ट फिजिशियन डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि अधिकतर मरीजों को इंहेलर दिया जाता है। यह काफी कारगर होता है। सांस लेने में अधिक परेशानी होने पर मरीज को ऑक्सीजन थेरेपी दी जाती है। इसके अलावा मरीज के लक्षणों के आधार पर अलग-अलग दवाइयां दी जाती हैं।
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मुख्य कारण
सीओपीडी का मुख्य कारण प्रदूषण और धूम्रपान है। चूल्हे व फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं भी वजह बनता है। सांस के साथ अंदर जाने वाले कीटनाशक व पेंट में इस्तेमाल होने वाले रसायन और टीबी की पुरानी बीमारी से भी सीओपीडी के मामले बढ़ जाते हैं।
सावधानी
वजन बढ़ने से रोकें और धूम्रपान न करें। वायु प्रदूषण वाली जगहों पर न जाएं। अगर सीओपीडी से परेशान हैं तो दवाएं समय पर और नियमित रूप से लें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही एक्सरसाइज या योग करें।
इनसे मिलता है सीओपीडी में लाभ
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक राना का कहना है कि सीओपीडी के मरीजों को हमेशा गुनगुना पानी पीना चाहिए। गुनगुने पानी से कफ हल्का होता है और फेफड़ों को भी आराम मिलता है। आयुर्वेद में श्वांस कुठार रस और गोदंती भस्म भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए कपालभाति, अनुलोम-विलोम, ओम के उच्चारण के साथ सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, भुजंगासन और सिंहासन कर सकते हैं। लेकिन इन्हें करने से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें।
- गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से सूजन कम होती है। शहद एंटीबायोटिक की तरह काम करती है जिससे संक्रमण की आशंका भी कम हो जाती है।
- दालचीनी को गुड़ या शहद के साथ दिन में 2.3 बार लेने से भी इसमें राहत मिलती है।
- दूध में हल्दी, अदरक का रस, शहद और तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर पीने से कफ बनना रुक जाता है।
- रोजाना रात में सोने से पहले लहसुन की 4.5 कली का पेस्ट बनाकर दूध में उबालकर ठंडा होने पर पीने से भी संक्रमण कम हो जाता है।
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गाजियाबाद। पहले कोरोना और अब प्रदूषण ने फेफड़ों को बीमार बना दिया है। इस समय सिगरेट का कश नहीं लगाने वाले भी गंभीर प्रदूषण के कारण दस सिगरेट के बराबर एक घंटे में जहरीली गैस निगल रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीज बढ़ रहे हैं। नवंबर महीने के तीसरे बुधवार को लोगों को जागरूक करने के लिए सीओपीडी डे मनाया जाता है।
सीओपीडी के लक्षण
सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित सिन्हा का कहना है कि दो महीने तक लगातार बलगम की तकलीफ रहती है और खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं असर नहीं करती हैं। अधिक बलगम वाली खांसी की समस्या रहना, सांस की तकलीफ , खासकर शारीरिक श्रम करने पर सांस लेने में घरघराहट और सीने में जकड़न होना आदि इसके लक्षण हैं।
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ऑक्सीजन थेरेपी से मिलता है लाभ
आईएमए के अध्यक्ष एवं चेस्ट फिजिशियन डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि अधिकतर मरीजों को इंहेलर दिया जाता है। यह काफी कारगर होता है। सांस लेने में अधिक परेशानी होने पर मरीज को ऑक्सीजन थेरेपी दी जाती है। इसके अलावा मरीज के लक्षणों के आधार पर अलग-अलग दवाइयां दी जाती हैं।
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मुख्य कारण
सीओपीडी का मुख्य कारण प्रदूषण और धूम्रपान है। चूल्हे व फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं भी वजह बनता है। सांस के साथ अंदर जाने वाले कीटनाशक व पेंट में इस्तेमाल होने वाले रसायन और टीबी की पुरानी बीमारी से भी सीओपीडी के मामले बढ़ जाते हैं।
सावधानी
वजन बढ़ने से रोकें और धूम्रपान न करें। वायु प्रदूषण वाली जगहों पर न जाएं। अगर सीओपीडी से परेशान हैं तो दवाएं समय पर और नियमित रूप से लें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही एक्सरसाइज या योग करें।
इनसे मिलता है सीओपीडी में लाभ
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक राना का कहना है कि सीओपीडी के मरीजों को हमेशा गुनगुना पानी पीना चाहिए। गुनगुने पानी से कफ हल्का होता है और फेफड़ों को भी आराम मिलता है। आयुर्वेद में श्वांस कुठार रस और गोदंती भस्म भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए कपालभाति, अनुलोम-विलोम, ओम के उच्चारण के साथ सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, भुजंगासन और सिंहासन कर सकते हैं। लेकिन इन्हें करने से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें।
- गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से सूजन कम होती है। शहद एंटीबायोटिक की तरह काम करती है जिससे संक्रमण की आशंका भी कम हो जाती है।
- दालचीनी को गुड़ या शहद के साथ दिन में 2.3 बार लेने से भी इसमें राहत मिलती है।
- दूध में हल्दी, अदरक का रस, शहद और तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर पीने से कफ बनना रुक जाता है।
- रोजाना रात में सोने से पहले लहसुन की 4.5 कली का पेस्ट बनाकर दूध में उबालकर ठंडा होने पर पीने से भी संक्रमण कम हो जाता है।
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