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मैं गाजियाबाद हूं...आज मेरा जन्म दिन है
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मैं गाजियाबाद हूं...आज मेरा जन्म दिन है
गाजियाबाद। मैं जिला गाजियाबाद हूं। आज मेरा जन्म दिन है। 14 नवंबर 1976 को मैं मेरठ की एक तहसील से मुझे जिला बनाया गया। इन 45 सालों में मैंने विकास की राह पर लंबा सफर तय किया है। मेरी पहचान उद्योग नगरी की बनी। आज 27 हजार उद्योग मेरे आंगन में खिलखिला रहे हैं। इनमें सुई से लेकर हवाई जहाज के पुर्जे तक बनते हैं। मैं रोजगार का इतना बड़ा केंद्र बन गया कि दूर-दूर से लोग अपने सपने पूरे करने के लिए मेरे पास आते हैं।
तभी तो मेरी आबादी की रफ्तार को पंख लगे हैं। जिला बनने पर 16 लाख थी, आज 46 लाख है। इस आबादी के लिए इलाज और पढ़ाई के मुकम्मल इंतजाम हुए तो लोग मुझे मेडिकल हब और एजुकेशन हब भी कहने लगे। मेरी इन खूबियों को देख देश के हर राज्य से लोग लोग मेरे आंगन में बसने के लिए खिंचे चले आते हैं। इनके रहने के बंदोबस्त में मेरी हरियाली पर आरी चली। मैं हरे-भरे शहर से कंक्त्रस्ीट के जंगल में तबदील होता गया।
250 से ज्यादा बहुमंजिला सोसाइटी बन चुकी हैं। हिंडन के पास मकनपुर, कनावनी, झंडापुर, प्रहलादगढ़ी गांव थे जो नगर निगम की सीमा में आकर शहर का हिस्सा बन गए। शहर के भीतर ही इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, शालीमार गार्डन, राजनगर एक्सटेंशन, क्त्रससिंग सिटी, वेब सिटी जैसे छोटे शहर बन गए। मेरी आबादी के पास 10 लाख से ज्यादा कारें और बाइक हैं। इनके फर्राटा भरने के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे और ईस्टर्न पेरि?फेरेलवे समेत चमचमाती सड़के बनी हैं। राजनगर एक्सटेंशन से यूपी गेट तक एलिवेटिड रोड बनी है। एनएच-58 से एनएच-9 तक के लिए लिंक रोड बनी है।
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1740 में मिला था गाजियाबाद नाम
वैसे तो मेरा जन्म 1740 में हो गया था। मुगल बादशाह मोहम्मद शाह के वजीर गाजीउद्दीन ने मुझे आबाद कर गाजिउद्दीन नाम दिया। यही बदलकर बाद में गाजियाबाद हो गया। 1864 में गाजियाबाद ईस्ट इंडिया रेलवे के नक्शे पर आया और इसे पाकिस्तान के मुल्तान से कोलकाता तक यातायात मार्ग से जोड़ा गया।
एनडी तिवारी ने बनाया था जिला
मुझे जिला बनाया था तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन मुझे यह तोहफा मिला। तब हापुड़ मेरा हिस्सा था। मेरे पास 750 गांव थे। सितंबर 2011 में हापुड़ अलग जिला बना तो 352 गांव चले गए। इससे पहले 1997 में कई गांव गौतमबुद्धनगर में गए। अब मेरे पास 161 ग्राम पंचायतें हैं।
14 से 21 हो गए थाने
जिला बना तब 14 थाने थे। इनमें हापुड़ और गौतमबुद्धनगर के थाने भी? शामिल थे। हापुड़ के अलग जिला बन जाने से ये घट गए। गौतमबुद्धनगर जिला बना तो बिसरख और दादरी उसमें चले गए। गाजियाबाद में 2019 तक 17 थाने थे। 2020 में ये 21 हो गए।
पालिका से 100 वार्डों का निगम
जिले की पहचान मिली तो शहर के रखरखाव का जिम्मा छोटी सी नगर पालिका पर था। चौपला बाजार के ईद-गिर्द चार गेट (जवाहर गेट, सिहानी गेट, दिल्ली गेट और डासना गेट) के बीच सिमटे । 1995 में 60 वार्ड के नगर निगम का गठन किया गया। 2005 में 80 वार्ड हो गए । 2017 में हुए परिसीमन के बाद संख्या बढ़कर 100 कर दी गई।निगम का सालाना बजट 750 करोड़ रुपये है।
सात से पांच रह गई विधानसभा सीटें
मैं जिला बना तो सात विधान सभा सीटें थीं। अब पांच रह गई हैं। गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर और मोदीनगर। 2012 से पहले खेकड़ा और दादरी भी थी। पहले मेरी संसदीय सीट हापुड़-गाजियाबाद थी। इसमें हापुड़ और गढ़ मुक्तेश्वर विधान सभा सीट भी थी। अब जिले की पांचों विधान सीटें ही हैं।
पांच किमी में था शहर
92 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षक से.रा यात्री बताते हैं 1976 में नगर क्षेत्र में ही बिजली की सप्लाई होती थी। लोग लालटेन और लैंप की रोशनी में पढ़ाई करते थे। लाइन पार क्षेत्र में मकनपुर गांव और भोवापुर गांव, डूंडाहेड़ा गांव में बसावट शुरु हो गई थी। शहर कुल पांच किलोमीटर के दायरे में बसा हुआ था। घंटाघर के पास से दिल्ली जाने के लिए बसें चलती थीं। टीएचए में हरे भरे खेत और हिंडन नदी के किनारे घना जंगल था। पैंतालिस सालों में सांस्कृतिक, शैक्षिक, साहित्यिक, औद्योगिक विकास तेजी से हुआ।
लिंगानुपात
1000 पुरुष के मुकाबले 885 महिला
औसत साक्षरता दर : 84.78 फीसद
पुरुष साक्षरता दर : 87.51
महिला साक्षरता दर : 79.45
कोट
शहर विकास के पथ पर बढ़ रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड रोड और मेट्रो प्रोजेक्ट से शहर के विकास को रफ्तार मिली है। अंतरराष्ट्रीय क्त्रिस्केट स्टेडियम की कुछ सालों में बड़ी सौगात मिलने वाली है। शहर की तरक्की और नाम रोशन करने में नेताओं, उद्यमियों, व्यापारियों, खिलाड़ियों और आम लोगों का योगदान रहा है। ऐसे में सभी शहरवासियों को गाजियाबाद के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
सुरेश रैना, पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
विकास
परिवहन के क्षेत्र में खूब दौड़ा, उड़ा और ऊंचा उठा
विकास की लिखी कई इबारत
सबसे पहले जीटी रोड से था महानगर का संपर्क, अब दिल्लीमेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरलवे सहित कई हाईवे
एलिवेटेड रोड, रेड व ब्लू लाइन मेट्रो लाइन से दिल्ली एनसीआर का सफर हुआ और आसान
गाजियाबाद को 14 नवंबर 1976 में जनपद के रूप में पहचान मिली। 45 सालों में जिला विकास के कई पायदान चढ़ा। परिवहन के पथ पर खूब दौड़ा, उड़ा और ऊंचा उठा। हाइवे, मेट्रो, एयरपोर्ट की सौगात मिली। धीरे-धीरे गाजियाबाद ने औद्योगिक नगरी की पहचान बनाने के साथ परिवहन के क्षेत्र में रफ्तार भरी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरलवे, एनएच-9, देश की सबसे लंबी सिंगल पिलर एलिवेटेड रोड, मेट्रो की रेड व ब्लू लाइन से न केवल शहर बल्कि आसपास के जिलों के यात्रियों का सफर आसान हुआ। मार्च 2023 में देश की पहली रैपिड रेल चलने से सफर और आसान हो जाएगा।
इनसे मिली पहचान
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस प्रोजेक्ट (82.01 किमी) की आधार शिला रखी। यह मार्च 2021 में शुरू हो चुका है। 8346 करोड़ के एक्सप्रेसवे से दिल्ली से मेरठ आने जाना आसान हुआ है।
एलिवेटेड रोड
30 अप्रैल 2018 के दिन देश की सबसे लंबी सिंगल पिलर एलिवेटेड रोड की सौगात मिली। 1147.60 करोड़ की लागत से तैयार 10.30 किमी लंबी एलिवेटेड रोड से गाजियाबाद से दिल्ली के यूपी बॉर्डर का रास्ता चंद मिनटों में तय होता है।
रेड और ब्लू लाइन कॉरिडोर
आनंद विहार से वैशाली तक ब्लू लाइन और दिलशाद गार्डन से शहीद स्थल तक रेड लाइन (2019) के रूप में दो मेट्रो कॉरिडोर शुरू हुए। दिलशाद गार्डन से नए बस अड्डा तक 9.41 किमी लंबे रूट पर शाहिद नगर, राज बाग, राजेंद्र नगर, श्याम पार्क, मोहन नगर, अर्थला, हिंडन नदी स्टेशन और नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
जाम और प्रदूषण से राहत दिलाने वाले 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे 2018 में शुरू हुआ। छह लेन का एक्सप्रेसवे हरियाणा के कुंडली से शुरू होकर गाजियाबाद और नोएडा होते हुए पलवल तक जाता है।
हिंडन से घरेलू उड़ान सेवा
सिंकदरपुर गांव के नजदीक सिविल टर्मिनल को 60 करोड़ की लागत से तैयार किया गया। टर्मिनल से हुबली, पिथौरागढ़ सहित तीन शहरों के लिए घरेलू उड़ान सेवा का संचालन हो रहा है। लखनऊ सहित कई शहरों के लिए उड़ान सेवा जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
वसुंधरा-राजनगर एक्सटेंशन चौराहा फ्लाईओवर
वसुंधरा लाल बत्ती और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे पर जीडीए ने 120 करोड़ रुपये की लागत से दो फ्लाईओवर का निर्माण किया है। इससे घंटों जाम में फंसने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।
खेल
20 से ज्यादा खिलाड़ियों ने बनाई जगह
क्रिकेट की बात करें तो पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के बाद अब युवा क्रिकेटरों की टोली लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। 20 से ज्यादा खिलाड़ी यूपीसीए की अंडर-19, अंडर-25 सहित महिला और पुरुष टीम स्क्वॉयड हिस्सा हैं। बीते दिनों अंडर 25 यूपी टीम में बल्लेबाज अंचित यादव, तरुण पवाडिया, प्रिंस यादव और गेंदबाज विनीत दुबे ने जगह बनाई। अंडर-19 टीम में आतिशी बल्लेबाज स्वास्तिक चिकारा, सिद्धार्थ यादव, दीपांशु चौधरी, आराध्या यादव, कृतवर्धन उपाध्याय, निशांत ठाकुर, प्रशांत यादव और प्रतीक शर्मा यूपी की टीम का हिस्सा हैं। अंडर-19 यूपी महिला टीम में शिखा सहलोत शामिल हैं।
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गाजियाबाद। मैं जिला गाजियाबाद हूं। आज मेरा जन्म दिन है। 14 नवंबर 1976 को मैं मेरठ की एक तहसील से मुझे जिला बनाया गया। इन 45 सालों में मैंने विकास की राह पर लंबा सफर तय किया है। मेरी पहचान उद्योग नगरी की बनी। आज 27 हजार उद्योग मेरे आंगन में खिलखिला रहे हैं। इनमें सुई से लेकर हवाई जहाज के पुर्जे तक बनते हैं। मैं रोजगार का इतना बड़ा केंद्र बन गया कि दूर-दूर से लोग अपने सपने पूरे करने के लिए मेरे पास आते हैं।
तभी तो मेरी आबादी की रफ्तार को पंख लगे हैं। जिला बनने पर 16 लाख थी, आज 46 लाख है। इस आबादी के लिए इलाज और पढ़ाई के मुकम्मल इंतजाम हुए तो लोग मुझे मेडिकल हब और एजुकेशन हब भी कहने लगे। मेरी इन खूबियों को देख देश के हर राज्य से लोग लोग मेरे आंगन में बसने के लिए खिंचे चले आते हैं। इनके रहने के बंदोबस्त में मेरी हरियाली पर आरी चली। मैं हरे-भरे शहर से कंक्त्रस्ीट के जंगल में तबदील होता गया।
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250 से ज्यादा बहुमंजिला सोसाइटी बन चुकी हैं। हिंडन के पास मकनपुर, कनावनी, झंडापुर, प्रहलादगढ़ी गांव थे जो नगर निगम की सीमा में आकर शहर का हिस्सा बन गए। शहर के भीतर ही इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, शालीमार गार्डन, राजनगर एक्सटेंशन, क्त्रससिंग सिटी, वेब सिटी जैसे छोटे शहर बन गए। मेरी आबादी के पास 10 लाख से ज्यादा कारें और बाइक हैं। इनके फर्राटा भरने के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे और ईस्टर्न पेरि?फेरेलवे समेत चमचमाती सड़के बनी हैं। राजनगर एक्सटेंशन से यूपी गेट तक एलिवेटिड रोड बनी है। एनएच-58 से एनएच-9 तक के लिए लिंक रोड बनी है।
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1740 में मिला था गाजियाबाद नाम
वैसे तो मेरा जन्म 1740 में हो गया था। मुगल बादशाह मोहम्मद शाह के वजीर गाजीउद्दीन ने मुझे आबाद कर गाजिउद्दीन नाम दिया। यही बदलकर बाद में गाजियाबाद हो गया। 1864 में गाजियाबाद ईस्ट इंडिया रेलवे के नक्शे पर आया और इसे पाकिस्तान के मुल्तान से कोलकाता तक यातायात मार्ग से जोड़ा गया।
एनडी तिवारी ने बनाया था जिला
मुझे जिला बनाया था तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन मुझे यह तोहफा मिला। तब हापुड़ मेरा हिस्सा था। मेरे पास 750 गांव थे। सितंबर 2011 में हापुड़ अलग जिला बना तो 352 गांव चले गए। इससे पहले 1997 में कई गांव गौतमबुद्धनगर में गए। अब मेरे पास 161 ग्राम पंचायतें हैं।
14 से 21 हो गए थाने
जिला बना तब 14 थाने थे। इनमें हापुड़ और गौतमबुद्धनगर के थाने भी? शामिल थे। हापुड़ के अलग जिला बन जाने से ये घट गए। गौतमबुद्धनगर जिला बना तो बिसरख और दादरी उसमें चले गए। गाजियाबाद में 2019 तक 17 थाने थे। 2020 में ये 21 हो गए।
पालिका से 100 वार्डों का निगम
जिले की पहचान मिली तो शहर के रखरखाव का जिम्मा छोटी सी नगर पालिका पर था। चौपला बाजार के ईद-गिर्द चार गेट (जवाहर गेट, सिहानी गेट, दिल्ली गेट और डासना गेट) के बीच सिमटे । 1995 में 60 वार्ड के नगर निगम का गठन किया गया। 2005 में 80 वार्ड हो गए । 2017 में हुए परिसीमन के बाद संख्या बढ़कर 100 कर दी गई।निगम का सालाना बजट 750 करोड़ रुपये है।
सात से पांच रह गई विधानसभा सीटें
मैं जिला बना तो सात विधान सभा सीटें थीं। अब पांच रह गई हैं। गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर और मोदीनगर। 2012 से पहले खेकड़ा और दादरी भी थी। पहले मेरी संसदीय सीट हापुड़-गाजियाबाद थी। इसमें हापुड़ और गढ़ मुक्तेश्वर विधान सभा सीट भी थी। अब जिले की पांचों विधान सीटें ही हैं।
पांच किमी में था शहर
92 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षक से.रा यात्री बताते हैं 1976 में नगर क्षेत्र में ही बिजली की सप्लाई होती थी। लोग लालटेन और लैंप की रोशनी में पढ़ाई करते थे। लाइन पार क्षेत्र में मकनपुर गांव और भोवापुर गांव, डूंडाहेड़ा गांव में बसावट शुरु हो गई थी। शहर कुल पांच किलोमीटर के दायरे में बसा हुआ था। घंटाघर के पास से दिल्ली जाने के लिए बसें चलती थीं। टीएचए में हरे भरे खेत और हिंडन नदी के किनारे घना जंगल था। पैंतालिस सालों में सांस्कृतिक, शैक्षिक, साहित्यिक, औद्योगिक विकास तेजी से हुआ।
लिंगानुपात
1000 पुरुष के मुकाबले 885 महिला
औसत साक्षरता दर : 84.78 फीसद
पुरुष साक्षरता दर : 87.51
महिला साक्षरता दर : 79.45
कोट
शहर विकास के पथ पर बढ़ रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड रोड और मेट्रो प्रोजेक्ट से शहर के विकास को रफ्तार मिली है। अंतरराष्ट्रीय क्त्रिस्केट स्टेडियम की कुछ सालों में बड़ी सौगात मिलने वाली है। शहर की तरक्की और नाम रोशन करने में नेताओं, उद्यमियों, व्यापारियों, खिलाड़ियों और आम लोगों का योगदान रहा है। ऐसे में सभी शहरवासियों को गाजियाबाद के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
सुरेश रैना, पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
विकास
परिवहन के क्षेत्र में खूब दौड़ा, उड़ा और ऊंचा उठा
विकास की लिखी कई इबारत
सबसे पहले जीटी रोड से था महानगर का संपर्क, अब दिल्लीमेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरलवे सहित कई हाईवे
एलिवेटेड रोड, रेड व ब्लू लाइन मेट्रो लाइन से दिल्ली एनसीआर का सफर हुआ और आसान
गाजियाबाद को 14 नवंबर 1976 में जनपद के रूप में पहचान मिली। 45 सालों में जिला विकास के कई पायदान चढ़ा। परिवहन के पथ पर खूब दौड़ा, उड़ा और ऊंचा उठा। हाइवे, मेट्रो, एयरपोर्ट की सौगात मिली। धीरे-धीरे गाजियाबाद ने औद्योगिक नगरी की पहचान बनाने के साथ परिवहन के क्षेत्र में रफ्तार भरी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरलवे, एनएच-9, देश की सबसे लंबी सिंगल पिलर एलिवेटेड रोड, मेट्रो की रेड व ब्लू लाइन से न केवल शहर बल्कि आसपास के जिलों के यात्रियों का सफर आसान हुआ। मार्च 2023 में देश की पहली रैपिड रेल चलने से सफर और आसान हो जाएगा।
इनसे मिली पहचान
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस प्रोजेक्ट (82.01 किमी) की आधार शिला रखी। यह मार्च 2021 में शुरू हो चुका है। 8346 करोड़ के एक्सप्रेसवे से दिल्ली से मेरठ आने जाना आसान हुआ है।
एलिवेटेड रोड
30 अप्रैल 2018 के दिन देश की सबसे लंबी सिंगल पिलर एलिवेटेड रोड की सौगात मिली। 1147.60 करोड़ की लागत से तैयार 10.30 किमी लंबी एलिवेटेड रोड से गाजियाबाद से दिल्ली के यूपी बॉर्डर का रास्ता चंद मिनटों में तय होता है।
रेड और ब्लू लाइन कॉरिडोर
आनंद विहार से वैशाली तक ब्लू लाइन और दिलशाद गार्डन से शहीद स्थल तक रेड लाइन (2019) के रूप में दो मेट्रो कॉरिडोर शुरू हुए। दिलशाद गार्डन से नए बस अड्डा तक 9.41 किमी लंबे रूट पर शाहिद नगर, राज बाग, राजेंद्र नगर, श्याम पार्क, मोहन नगर, अर्थला, हिंडन नदी स्टेशन और नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
जाम और प्रदूषण से राहत दिलाने वाले 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे 2018 में शुरू हुआ। छह लेन का एक्सप्रेसवे हरियाणा के कुंडली से शुरू होकर गाजियाबाद और नोएडा होते हुए पलवल तक जाता है।
हिंडन से घरेलू उड़ान सेवा
सिंकदरपुर गांव के नजदीक सिविल टर्मिनल को 60 करोड़ की लागत से तैयार किया गया। टर्मिनल से हुबली, पिथौरागढ़ सहित तीन शहरों के लिए घरेलू उड़ान सेवा का संचालन हो रहा है। लखनऊ सहित कई शहरों के लिए उड़ान सेवा जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
वसुंधरा-राजनगर एक्सटेंशन चौराहा फ्लाईओवर
वसुंधरा लाल बत्ती और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे पर जीडीए ने 120 करोड़ रुपये की लागत से दो फ्लाईओवर का निर्माण किया है। इससे घंटों जाम में फंसने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।
खेल
20 से ज्यादा खिलाड़ियों ने बनाई जगह
क्रिकेट की बात करें तो पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के बाद अब युवा क्रिकेटरों की टोली लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। 20 से ज्यादा खिलाड़ी यूपीसीए की अंडर-19, अंडर-25 सहित महिला और पुरुष टीम स्क्वॉयड हिस्सा हैं। बीते दिनों अंडर 25 यूपी टीम में बल्लेबाज अंचित यादव, तरुण पवाडिया, प्रिंस यादव और गेंदबाज विनीत दुबे ने जगह बनाई। अंडर-19 टीम में आतिशी बल्लेबाज स्वास्तिक चिकारा, सिद्धार्थ यादव, दीपांशु चौधरी, आराध्या यादव, कृतवर्धन उपाध्याय, निशांत ठाकुर, प्रशांत यादव और प्रतीक शर्मा यूपी की टीम का हिस्सा हैं। अंडर-19 यूपी महिला टीम में शिखा सहलोत शामिल हैं।