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खजूर के पेड़ को हैंडपंप बता हड़प ली रिबोर की रकम
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खजूर के पेड़ को हैंडपंप बता हड़प ली रिबोर की रकम
गाजियाबाद। मुरादनगर ब्लॉक के गांव जलालपुर-रघुनाथपुर में ग्राम प्रधान ने जहां हैंडपंप रीबोर कराया गया दर्शाया, जांच में वहां खजूर का पेड़ मिला। खजूर को हैंडपंप बताकर रिबोरिंग की रकम हड़प ली गई। घोटाला सिर्फ हैंडपंप रिबोरिंग में नहीं, गांव को स्वच्छ बनाने के नाम पर भी किया गया। सिर्फ 6 स्थानों पर डस्टबिन लगाकर 96 हजार रुपये का खर्च दर्शा दिया गया। अब डीएम ने तत्कालीन प्रधान को नोटिस जारी सरकारी फंड को खर्च करने के सुबूत समेत स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब ना देने पर प्रधान पर कार्रवाई कर रिकवरी भी की जा सकती है।
गांव जलालपुर-रघुनाथपुर में तत्कालीन प्रधान सुनीता के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016-17 में गांव में कराए गए विकास कार्य के संबंध में स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। इसके आधार पर प्रशासन ने दो-दो अधिकारियों से दो बार जांच कराई। इन अधिकारियों ने 11 बिंदुओं पर जांच की। इसमें यह पाया गया कि कागजों में 13 हैंडपंप रिबोर का भुगतान दिखाया गया, इनमें 10 हैंडपंप का कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया गया। इसमें भी जिस हैंडपंप का कागजों में कार्य दिखाया गया है वहां खजूर का पेड़ मिला। हालांकि जांच पूरी होने के बाद अब यहां से खजूर का पेड़ भी उखाड़ दिया गया।
जांच के दौरान कहीं नाली के निर्माण के दस्तावेज नहीं मिले तो कहीं निर्माण कार्य मिला ही नहीं। गांव में डस्टबिन लगाने पर 96000 हजार का खर्च दर्शाया गया, लेकिन मौके पर महज छह डस्टबिन मिले। इसके अलावा शमशान घाट के चारदीवारी की मरम्मत, तालाब की सफाई, आरसीसी रोड का निर्माण, पुलिया का निर्माण इन सभी में सरकारी फंड का गबन पाया गया।
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इनसेट-
तीन साल में पूरी हुई जांच
तत्कालीन प्रधान के कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच लगभग तीन वर्ष में पूरी हुई है। प्रारंभिक जांच जनवरी 2019 से शुरू की गई थी और जुलाई 2019 में पूरी हुई। गांव के निवासी विपिन, मुकेश, उदयवीर सिंह, ललित कुमार ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई थी। जुलाई 2019 में जांच के बाद संबंधित प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब और साक्ष्य मांगे गए थे। दस्तावेजों और साक्ष्य की जांच अगस्त 2019 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी गई थी। डेढ़ साल बाद अधिकारी ने किसी अन्य जांच अधिकारी को नामित करने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद जांच अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग और सहकारिता विभाग के सहायक उपायुक्त एवं सहायक निबंधक को सौंपी गई। यह जांच जुलाई 2021 में पूरी हुई है। इसके बाद प्रक्रिया चलती रही और हाल ही में डीएम की ओर से प्रधान को नोटिस जारी किया गया है।
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बयान
ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया और निर्माण कार्यों के दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। 15 दिन में साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए तो डीएम द्वारा कमेटी गठित करके गबन हुई धनराशि और रिकवरी के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद कार्रवाई होगी। - राकेश सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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किसी जांच या साक्ष्य उपलब्ध कराने का नोटिस अभी मेरे पास नहीं आया है। मामले की कोई जानकारी मुझे नहीं है। जानकारी करने के बाद जवाब दे सकूंगी। - सुनीता देवी, तत्कालीन ग्रामप्रधान,
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गांव निवासी अंकित कुमार ने बताया कि खजूर के पेड़ के पास 2015 तक हैंडपंप था। जब खराब हुआ तो इसको रिबोर कराना था। तत्कालीन प्रधान ने उस स्थान पर हैंडपंप रिबोर नहीं कराया, लेकिन कागजों में रिबोरिंग दर्शा दिया। इसके बाद आंधी में खजूर का पेड़ भी गिर गया था। जिनके घर के पास यह खजूर का पेड़ था उन्होंने स्थान को सीमेंट से पक्का करा दिया है। अब यहां न हैंडपंप है और न ही खजूर का पेड़ बचा।
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गाजियाबाद। मुरादनगर ब्लॉक के गांव जलालपुर-रघुनाथपुर में ग्राम प्रधान ने जहां हैंडपंप रीबोर कराया गया दर्शाया, जांच में वहां खजूर का पेड़ मिला। खजूर को हैंडपंप बताकर रिबोरिंग की रकम हड़प ली गई। घोटाला सिर्फ हैंडपंप रिबोरिंग में नहीं, गांव को स्वच्छ बनाने के नाम पर भी किया गया। सिर्फ 6 स्थानों पर डस्टबिन लगाकर 96 हजार रुपये का खर्च दर्शा दिया गया। अब डीएम ने तत्कालीन प्रधान को नोटिस जारी सरकारी फंड को खर्च करने के सुबूत समेत स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब ना देने पर प्रधान पर कार्रवाई कर रिकवरी भी की जा सकती है।
गांव जलालपुर-रघुनाथपुर में तत्कालीन प्रधान सुनीता के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016-17 में गांव में कराए गए विकास कार्य के संबंध में स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। इसके आधार पर प्रशासन ने दो-दो अधिकारियों से दो बार जांच कराई। इन अधिकारियों ने 11 बिंदुओं पर जांच की। इसमें यह पाया गया कि कागजों में 13 हैंडपंप रिबोर का भुगतान दिखाया गया, इनमें 10 हैंडपंप का कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया गया। इसमें भी जिस हैंडपंप का कागजों में कार्य दिखाया गया है वहां खजूर का पेड़ मिला। हालांकि जांच पूरी होने के बाद अब यहां से खजूर का पेड़ भी उखाड़ दिया गया।
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जांच के दौरान कहीं नाली के निर्माण के दस्तावेज नहीं मिले तो कहीं निर्माण कार्य मिला ही नहीं। गांव में डस्टबिन लगाने पर 96000 हजार का खर्च दर्शाया गया, लेकिन मौके पर महज छह डस्टबिन मिले। इसके अलावा शमशान घाट के चारदीवारी की मरम्मत, तालाब की सफाई, आरसीसी रोड का निर्माण, पुलिया का निर्माण इन सभी में सरकारी फंड का गबन पाया गया।
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इनसेट-
तीन साल में पूरी हुई जांच
तत्कालीन प्रधान के कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच लगभग तीन वर्ष में पूरी हुई है। प्रारंभिक जांच जनवरी 2019 से शुरू की गई थी और जुलाई 2019 में पूरी हुई। गांव के निवासी विपिन, मुकेश, उदयवीर सिंह, ललित कुमार ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई थी। जुलाई 2019 में जांच के बाद संबंधित प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब और साक्ष्य मांगे गए थे। दस्तावेजों और साक्ष्य की जांच अगस्त 2019 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी गई थी। डेढ़ साल बाद अधिकारी ने किसी अन्य जांच अधिकारी को नामित करने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद जांच अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग और सहकारिता विभाग के सहायक उपायुक्त एवं सहायक निबंधक को सौंपी गई। यह जांच जुलाई 2021 में पूरी हुई है। इसके बाद प्रक्रिया चलती रही और हाल ही में डीएम की ओर से प्रधान को नोटिस जारी किया गया है।
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बयान
ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया और निर्माण कार्यों के दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। 15 दिन में साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए तो डीएम द्वारा कमेटी गठित करके गबन हुई धनराशि और रिकवरी के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद कार्रवाई होगी। - राकेश सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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किसी जांच या साक्ष्य उपलब्ध कराने का नोटिस अभी मेरे पास नहीं आया है। मामले की कोई जानकारी मुझे नहीं है। जानकारी करने के बाद जवाब दे सकूंगी। - सुनीता देवी, तत्कालीन ग्रामप्रधान,
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गांव निवासी अंकित कुमार ने बताया कि खजूर के पेड़ के पास 2015 तक हैंडपंप था। जब खराब हुआ तो इसको रिबोर कराना था। तत्कालीन प्रधान ने उस स्थान पर हैंडपंप रिबोर नहीं कराया, लेकिन कागजों में रिबोरिंग दर्शा दिया। इसके बाद आंधी में खजूर का पेड़ भी गिर गया था। जिनके घर के पास यह खजूर का पेड़ था उन्होंने स्थान को सीमेंट से पक्का करा दिया है। अब यहां न हैंडपंप है और न ही खजूर का पेड़ बचा।