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बेटियों के नाम पर है घर की पहचान
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बेटियों के नाम पर है घर की पहचान
गाजियाबाद। जमाना बदल रहा है। बेटे से परिवार का नाम होगा यह धारना टूट रही है। जब बेटियां माता-पिता का नाम रौशन कर रही हैं तो घर की नेम प्लेट पर उनका नाम क्यों न हो। इस सोच को लोग अपना रहे हैं। घर की नेम प्लेट पर बेटियों का नाम दर्ज कर रहे हैं। यह इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिनके बेटा भी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों महिला एवं बाल कल्याण विभाग बेटी के नाम पर घर की पहचान कायम करने के लिए बेटियों के नाम की नेम
महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने कुछ समय पहले एक योजना शुरू की है। इसमें उन्होंने बेटी के नाम पर घर की पहचान के लिए बेटियों के नाम की नेम प्लेट बांटी थीं। मगर शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने योजना के तहत नहीं बल्कि पहले से ही अपने घर का नाम बेटियों के नाम पर रखा है। इसमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनके बेटा और एक बेटी दोनों हैं।
बेटियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की योजना
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिनकी बेटियां थी, उनके नाम से नेम प्लेट दी गईं थीं। जिसको उन्होंने अपने घरों में लगा रखा है। इसके तहत अभी तक 25 नेम प्लेट बांटी गई हैं। विभाग में कई लोग बेटियों के नाम की नेम प्लेट बनवाने पहुंच रहे हैं।
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हजार बालकों पर हैं 902 बालिकाएं
जिले में लड़कों के अनुपात में अभी भी लड़कियों की संख्या है। अभी 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 902 है।
कोट्स
मेरा एक बेटा और एक बेटी है। बेटा बड़ा है और बेटी उससे छोटी है। मैंने जब अपना घर बनवाया तो अपनी बेटी देविका के नाम पर घर का नाम रखा है। मुझे अपने दोनों बच्चे प्यारे हैं, लेकिन मुझे अपनी बेटी से सबसे अधिक लगाव है। - गोपाल बबूना, शालीमार गार्डन
---
मेरी पहली बेटी का नाम अवनि है। अब मुझे दूसरी भी बेटी ही हुई है। हमने अपने फ्लैट पर बड़ी बेटी के नाम पर नेम प्लेट लगाई है। मेरे पति अरविंद शर्मा और मेरी दोनों की इच्छा थी कि बेटी के नाम पर ही घर का नाम हो। मुझे अपनी दोनों बेटियों पर नाज है। - पिंकी शर्मा, राजनगर एक्सटेंशन निवासी
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गाजियाबाद। जमाना बदल रहा है। बेटे से परिवार का नाम होगा यह धारना टूट रही है। जब बेटियां माता-पिता का नाम रौशन कर रही हैं तो घर की नेम प्लेट पर उनका नाम क्यों न हो। इस सोच को लोग अपना रहे हैं। घर की नेम प्लेट पर बेटियों का नाम दर्ज कर रहे हैं। यह इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिनके बेटा भी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों महिला एवं बाल कल्याण विभाग बेटी के नाम पर घर की पहचान कायम करने के लिए बेटियों के नाम की नेम
महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने कुछ समय पहले एक योजना शुरू की है। इसमें उन्होंने बेटी के नाम पर घर की पहचान के लिए बेटियों के नाम की नेम प्लेट बांटी थीं। मगर शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने योजना के तहत नहीं बल्कि पहले से ही अपने घर का नाम बेटियों के नाम पर रखा है। इसमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनके बेटा और एक बेटी दोनों हैं।
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बेटियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की योजना
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिनकी बेटियां थी, उनके नाम से नेम प्लेट दी गईं थीं। जिसको उन्होंने अपने घरों में लगा रखा है। इसके तहत अभी तक 25 नेम प्लेट बांटी गई हैं। विभाग में कई लोग बेटियों के नाम की नेम प्लेट बनवाने पहुंच रहे हैं।
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हजार बालकों पर हैं 902 बालिकाएं
जिले में लड़कों के अनुपात में अभी भी लड़कियों की संख्या है। अभी 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 902 है।
कोट्स
मेरा एक बेटा और एक बेटी है। बेटा बड़ा है और बेटी उससे छोटी है। मैंने जब अपना घर बनवाया तो अपनी बेटी देविका के नाम पर घर का नाम रखा है। मुझे अपने दोनों बच्चे प्यारे हैं, लेकिन मुझे अपनी बेटी से सबसे अधिक लगाव है। - गोपाल बबूना, शालीमार गार्डन
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मेरी पहली बेटी का नाम अवनि है। अब मुझे दूसरी भी बेटी ही हुई है। हमने अपने फ्लैट पर बड़ी बेटी के नाम पर नेम प्लेट लगाई है। मेरे पति अरविंद शर्मा और मेरी दोनों की इच्छा थी कि बेटी के नाम पर ही घर का नाम हो। मुझे अपनी दोनों बेटियों पर नाज है। - पिंकी शर्मा, राजनगर एक्सटेंशन निवासी