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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की एलिवेटड रोड डिजाइन को मिली मंजूरी
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड डिजाइन को मंजूरी
गाजियाबाद। जल्द ही जिले में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य गति पकड़ने जा रहा है। दिल्ली से शुरू होकर लोनी के रास्ते देहरादून तक जाने वाले इकॉनमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) को लेकर कवायद तेज हो गई है। दिल्ली और लोनी की सीमा में बनाने वाले 17.6 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड के डिजाइन को नेशनल हाईव अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की सहमति के बाद सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। रामबोल इंडिया लिमिटेड की तरफ से तैयार डिजाइन को स्वीकृति मिलने के बाद अब मुंबई में डाई (सांचा) बनवाया जा रहा है। अगले महीने तक स्टील का सांचा बनकर मिल जाएगा। इसके बाद एलिवेटेड रोड के लिए प्री कास्ट स्लैब तैयार होने शुरू हो जाएंगे, जिन्हें पिलर तैयार होने के बाद लांच करने का काम शुरू किया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पहले दो चरण का टेंडर जारी हो चुका है, जिसमें अक्षरधाम से शुरू होेकर लोनी के रास्त बागपत बॉर्डर तक कुल 31.6 किलोमीटर का छह लेन एक्सप्रेसवे तैयार होगा। इसमें कोई जमीन अधिग्रहण नहीं होना है। लोग बिना रुके एक्सप्रेसवे पर जा सकें, इसके लिए पहले दो चरणों के बीच 17.6 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड बनाई जानी है। जहां से एक्सप्रेसवे को एलिवेटेड रोड के रास्ते निकाला जाना है, वहां पर घनी आबादी है और काफी घुमावदार मोड़ भी हैं। इसलिए डिजाइन के लिहाज से काफी चुनौती पूर्ण काम था। इसलिए डिजाइन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाली रामबोल इंडिया को काम सौंपा गया, जिसने पूरा डिजाइन तैयार करके एनएचएआई को सौंपा था। इसके बाद मंत्रालय और एनएचएआई की कमेटी ने उसे स्वीकृति दे दी है।
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हर 400 मीटर पर होगा एक पिलर
डिजाइन के हिसाब से एलिवेटेड रोड में हर 40 मीटर की दूरी पर पिलर बनाया जाएगा। जहां पर अंडरपास और ओवरब्रिज होंगे, वहां पर पिलरों की संख्या जरूरत के हिसाब से कम ज्यादा भी हो सकती है। पूरा छह लेन एक्सप्रेसवे सिंगल पिलर पर होगा। इसमें 6.4 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड दिल्ली में होगी जबकि 11.2 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड लोनी (यूपी) के हिस्से में बनेगी।
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एक्सप्रेसवे पहले दो चरण
चरण लागत (रुपये) लंबाई (कि.मी) एलिवेटेड (किमी) कहां से कहां तक
पहला 1063 करोड़ 14.75 6.4 अक्षरधाम से यूपी बॉर्डर
दूसरा 1335 करोड़ 16.85 11.2 यूपी बॉर्डर से बागपत बॉर्डर
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2023 तक तैयार होने का एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे अप्रैल 2023 तक पूरा होना है। बाकी बागपत, शामिल, सहारनपुर और हरिद्वार व देहरादून के हिस्से के काम मार्च 2024 तक पूरा होना है। हालांकि मंत्रालय चाहता है कि दिसंबर 2023 तक एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाए लेकिन जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया धीमा होने के कारण समय लग सकता है। उधर, उत्तराखंड में वन्य क्षेत्र पड़ने के कारण वहां पर भी 12 किलोमीटर की वाइल्ड लाइफ एलिवेटेड रोड बननी है।
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वर्जन
पहले दो चरणों के बीच में बनने वाले एलिवेटेड का डिजाइन तैयार हो गया है। उसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। अब मुंबई से स्टील का सांचा बनकर आने के बाद एलिवेटेड रोड के प्रीकॉस्ट स्लैब बनने का काम शुरू हो जाएगा, जिससे एलिवेटेड रोड बनाने के काम में तेजी आएगी। - मुदित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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गाजियाबाद। जल्द ही जिले में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य गति पकड़ने जा रहा है। दिल्ली से शुरू होकर लोनी के रास्ते देहरादून तक जाने वाले इकॉनमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) को लेकर कवायद तेज हो गई है। दिल्ली और लोनी की सीमा में बनाने वाले 17.6 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड के डिजाइन को नेशनल हाईव अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की सहमति के बाद सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। रामबोल इंडिया लिमिटेड की तरफ से तैयार डिजाइन को स्वीकृति मिलने के बाद अब मुंबई में डाई (सांचा) बनवाया जा रहा है। अगले महीने तक स्टील का सांचा बनकर मिल जाएगा। इसके बाद एलिवेटेड रोड के लिए प्री कास्ट स्लैब तैयार होने शुरू हो जाएंगे, जिन्हें पिलर तैयार होने के बाद लांच करने का काम शुरू किया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पहले दो चरण का टेंडर जारी हो चुका है, जिसमें अक्षरधाम से शुरू होेकर लोनी के रास्त बागपत बॉर्डर तक कुल 31.6 किलोमीटर का छह लेन एक्सप्रेसवे तैयार होगा। इसमें कोई जमीन अधिग्रहण नहीं होना है। लोग बिना रुके एक्सप्रेसवे पर जा सकें, इसके लिए पहले दो चरणों के बीच 17.6 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड बनाई जानी है। जहां से एक्सप्रेसवे को एलिवेटेड रोड के रास्ते निकाला जाना है, वहां पर घनी आबादी है और काफी घुमावदार मोड़ भी हैं। इसलिए डिजाइन के लिहाज से काफी चुनौती पूर्ण काम था। इसलिए डिजाइन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाली रामबोल इंडिया को काम सौंपा गया, जिसने पूरा डिजाइन तैयार करके एनएचएआई को सौंपा था। इसके बाद मंत्रालय और एनएचएआई की कमेटी ने उसे स्वीकृति दे दी है।
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हर 400 मीटर पर होगा एक पिलर
डिजाइन के हिसाब से एलिवेटेड रोड में हर 40 मीटर की दूरी पर पिलर बनाया जाएगा। जहां पर अंडरपास और ओवरब्रिज होंगे, वहां पर पिलरों की संख्या जरूरत के हिसाब से कम ज्यादा भी हो सकती है। पूरा छह लेन एक्सप्रेसवे सिंगल पिलर पर होगा। इसमें 6.4 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड दिल्ली में होगी जबकि 11.2 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड लोनी (यूपी) के हिस्से में बनेगी।
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एक्सप्रेसवे पहले दो चरण
चरण लागत (रुपये) लंबाई (कि.मी) एलिवेटेड (किमी) कहां से कहां तक
पहला 1063 करोड़ 14.75 6.4 अक्षरधाम से यूपी बॉर्डर
दूसरा 1335 करोड़ 16.85 11.2 यूपी बॉर्डर से बागपत बॉर्डर
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2023 तक तैयार होने का एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे अप्रैल 2023 तक पूरा होना है। बाकी बागपत, शामिल, सहारनपुर और हरिद्वार व देहरादून के हिस्से के काम मार्च 2024 तक पूरा होना है। हालांकि मंत्रालय चाहता है कि दिसंबर 2023 तक एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाए लेकिन जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया धीमा होने के कारण समय लग सकता है। उधर, उत्तराखंड में वन्य क्षेत्र पड़ने के कारण वहां पर भी 12 किलोमीटर की वाइल्ड लाइफ एलिवेटेड रोड बननी है।
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वर्जन
पहले दो चरणों के बीच में बनने वाले एलिवेटेड का डिजाइन तैयार हो गया है। उसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। अब मुंबई से स्टील का सांचा बनकर आने के बाद एलिवेटेड रोड के प्रीकॉस्ट स्लैब बनने का काम शुरू हो जाएगा, जिससे एलिवेटेड रोड बनाने के काम में तेजी आएगी। - मुदित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई