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काम आया सांसों के संकट में सीखा सबक-
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काम आया सांसों के संकट में सीखा सबक
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान सांसों के संकट में सीखा सबक काम आया। तीसरी लहर से निपटने के लिए जिले की 10 अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी नहीं मिली। हालांकि संयुक्त अस्पताल में किए गए मॉक ड्रिल में बच्चों के इलाज से संबंधित 68 में 16 दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। पीकू वार्ड में मानक के अनुरूप संसाधन में कुछ कमियां भी सामने आई। मॉक ड्रिल का निरीक्षण करने पहुंचे मेरठ मंडल के सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने अस्पताल प्रबंधन से दवाइयों सहित अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दस मिनट के बजाए पांच मिनट में मिला इलाज
शुक्रवार को अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे बच्चों के साथ मॉक ड्रिल किया गया। इसमें भाई-बहन बुखार का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उनकी मां से अनुमति लेकर उन्हें मॉक ड्रिल में शामिल किया गया। जबकि एक एंबुलेंस चालक का आठ वर्षीय बेटा भी शामिल हुआ। अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया ने बताया कि एंबुलेंस से एक बच्ची को रिसेप्शन एरिया में लाया गया। बच्ची का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उसकी पल्स व ऑक्सीजन सेचुुरेशन की जांच की गई। बच्ची को स्ट्रेचर पर लाने के दौरान वह गिरते-गिरते बची, इससे वह डरकर रोने लगी और उसने वार्ड में जाने से मना कर दिया। सीएमएस ने बताया कि बच्ची के भाई और एंबुलेंस चालक को ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ वार्ड तक पहुंचाया गया। इस दौरान दोनों ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई भी एक से डेढ़ मिनट में शुरू हो गई। मेरठ मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राजकुमार सिंह ने बताया कि एक मरीज भर्ती करने का समय दस मिनट है, लेकिन पांच मिनट में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। उच्च अधिकारियों के मौजूद होने से इलाज में जुटे नर्स व वार्ड ब्वॉय में घबराहट भी दिखाई दी।
यहां हुआ मॉक ड्रिल
जिले में संयुक्त जिला अस्पताल, ईएसआई अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना के अलावा चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैयार पीकू वार्ड पर इलाज को लेकर मॉक ड्रिल किया गया।
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अस्पताल में 68 में 16 दवाइयां नहीं मिली
अपर निदेशक ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान 50 से अधिक बिंदुओं पर जांच करने के साथ ही दवा व उपकरण की भी जांच की गई। उन्होंने बताय कि 68 दवाइयों में अभी 16 दवाई अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। इसमें विटामिन-सी, डी ड्रॉप, इंजेक्शन समेत कई दवा शामिल हैं। 48 उपकरण में से ऑक्सीजन हूड समेत 8 उपकरण नहीं मिले। अपर निदेशक ने अस्पताल प्रबंधन से मांग पत्र भेजने को कहा है, जिससे कि तीसरी लहर से पूर्व पर्याप्त दवाओं एवं अन्य उपकरण की कमियों को दूर कर लिया जाए। दवाइयों की कमी अन्य केंद्रों पर हुए मॉक ड्रिल के दौरान भी देखने को मिली। मॉक ड्रिल के दौरान सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार, एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी, सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह, कोविड प्रभारी डॉ. सुर्यांशु ओझा, आरडी यादव सहित अन्य स्टाफ उपस्थित थे।
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान सांसों के संकट में सीखा सबक काम आया। तीसरी लहर से निपटने के लिए जिले की 10 अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी नहीं मिली। हालांकि संयुक्त अस्पताल में किए गए मॉक ड्रिल में बच्चों के इलाज से संबंधित 68 में 16 दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। पीकू वार्ड में मानक के अनुरूप संसाधन में कुछ कमियां भी सामने आई। मॉक ड्रिल का निरीक्षण करने पहुंचे मेरठ मंडल के सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने अस्पताल प्रबंधन से दवाइयों सहित अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दस मिनट के बजाए पांच मिनट में मिला इलाज
शुक्रवार को अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे बच्चों के साथ मॉक ड्रिल किया गया। इसमें भाई-बहन बुखार का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उनकी मां से अनुमति लेकर उन्हें मॉक ड्रिल में शामिल किया गया। जबकि एक एंबुलेंस चालक का आठ वर्षीय बेटा भी शामिल हुआ। अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया ने बताया कि एंबुलेंस से एक बच्ची को रिसेप्शन एरिया में लाया गया। बच्ची का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उसकी पल्स व ऑक्सीजन सेचुुरेशन की जांच की गई। बच्ची को स्ट्रेचर पर लाने के दौरान वह गिरते-गिरते बची, इससे वह डरकर रोने लगी और उसने वार्ड में जाने से मना कर दिया। सीएमएस ने बताया कि बच्ची के भाई और एंबुलेंस चालक को ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ वार्ड तक पहुंचाया गया। इस दौरान दोनों ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई भी एक से डेढ़ मिनट में शुरू हो गई। मेरठ मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राजकुमार सिंह ने बताया कि एक मरीज भर्ती करने का समय दस मिनट है, लेकिन पांच मिनट में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। उच्च अधिकारियों के मौजूद होने से इलाज में जुटे नर्स व वार्ड ब्वॉय में घबराहट भी दिखाई दी।
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यहां हुआ मॉक ड्रिल
जिले में संयुक्त जिला अस्पताल, ईएसआई अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना के अलावा चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैयार पीकू वार्ड पर इलाज को लेकर मॉक ड्रिल किया गया।
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अस्पताल में 68 में 16 दवाइयां नहीं मिली
अपर निदेशक ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान 50 से अधिक बिंदुओं पर जांच करने के साथ ही दवा व उपकरण की भी जांच की गई। उन्होंने बताय कि 68 दवाइयों में अभी 16 दवाई अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। इसमें विटामिन-सी, डी ड्रॉप, इंजेक्शन समेत कई दवा शामिल हैं। 48 उपकरण में से ऑक्सीजन हूड समेत 8 उपकरण नहीं मिले। अपर निदेशक ने अस्पताल प्रबंधन से मांग पत्र भेजने को कहा है, जिससे कि तीसरी लहर से पूर्व पर्याप्त दवाओं एवं अन्य उपकरण की कमियों को दूर कर लिया जाए। दवाइयों की कमी अन्य केंद्रों पर हुए मॉक ड्रिल के दौरान भी देखने को मिली। मॉक ड्रिल के दौरान सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार, एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी, सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह, कोविड प्रभारी डॉ. सुर्यांशु ओझा, आरडी यादव सहित अन्य स्टाफ उपस्थित थे।