{"_id":"63850e5341dc8e22387a782e","slug":"ghaziabad-shahibabad-news-gbd248431284","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: शहर के रूट खाली पड़े... देहात में दौड़ रहीं ई-बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: शहर के रूट खाली पड़े... देहात में दौड़ रहीं ई-बसें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के रूट खाली पड़े... देहात में दौड़ रहीं ई-बसें
साहिबाबाद। सिर्फ शहर में चलाने के लिए आईं इलेक्ट्रिक बसों को अब देहात के रूटों पर भी चलाया जा रहा है। जिस रूट के लिए भी विधायक या अन्य किसी जनप्रतिनिधि की सिफारिश आ जाती है, परिवहन निगम उसी पर बस सेवा शुरू कर देता है। नतीजा यह है कि शहर के आधे से ज्यादा रूट खाली पड़े हैं। यहां तक कि कॉलेजों के आसपास भी कोई रूट नहीं बनाया गया है। छात्रों को पांच से दस किमी. चलने के बाद बस मिलती है।
शासन ने शहर के लिए 200 बसें मंजूर की थीं। इनमें से मिलीं सिर्फ 50 हैं। इनमें भी चल रही हैं सिर्फ 30 ही। 20 का पंजीकरण नहीं हो पाया है। बाकी 150 के जनवरी 2023 में मिलने की उम्मीद है। 30 में से भी एक को अक्सर रिजर्व में रखा जाता है। ऐसे में 29 को ही शहर और देहात के रूट पर चलाया जा रहा है। शुरू में सिर्फ शहर के रूट तय किए गए थे। बाद में देहात के भी जोड़ लिए गए। इससे शहर के रूटों पर बसों की संख्या कम रह गई। सभी 200 मिल जाने के बाद शहर के खाली पड़े रूटों पर बसें चलाने की योजना परिवहन निगम ने बनाई है।
दो शिफ्ट में चल रहीं बसें : ई-बसें सुबह छह बजे से रात करीब 10 बजे तक चलाई जाती है। यह बसें दो शिफ्ट में चलती हैं। दोपहर में करीब एक बजे सभी बस डिपो पर पहुंच जाती है और इन्हें चार्ज करने में 45 से 60 मिनट का समय लगता है।
विज्ञापन
हां, सिफारिश मानी गई है
गाजियाबाद सिटी ट्रांसपोर्ट के प्रबंधक पीआर बेलवरियर ने बताया कि शुरुआत में ई-बसों को सिर्फ शहर में चलाया गया था लेकिन यात्रियों की मांग को देखते हुए देहात तक बढ़ा दिया गया। ऐसे रूटों पर बसें लगाई गई हैं, जहां निजी बसें नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर इन बसों को लगाया गया है। 20 बसों को अगले दो सप्ताह में रूटों पर उतारा जाएगा। इस सप्ताह इन बसों का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। बुधवार को बैठक के दौरान इन बसों के रूट तय किए जाएंगे।
लोनी और मोदीनगर तक जा रही बसें
ई-बसों के सभी रूट पहले शहर के ही थे। फिर पुराना बस अड्डा से मुरादनगर तक का रूट बना। मोदीनगर विधायक की सिफारिश पर इसे मोदीनगर तक बढ़ा दिया गया। इसी तरह एक रूट पुराना बस अड्डा से लोनी तक बनाया गया। इसे बढ़ाकर मंडोला तक कर दिया गया। एक रूट पिलखुवा तक का बनाया गया है। हालांकि, इस पर बसें अभी नहीं चल रही हैं।
यह तय हुए थे रूट
- पुराने बस अड्डे से नोएडा सिटी सेंटर, वाया विजयनगर
- पुराने बस अड्डे से हापुड़ चुंगी, डायमंड फ्लाईओवर, लालकुआं, विजयनगर, नए बस अड्डे होते हुए पुराना बस अड्डा।
- मोहननगर से राजनगर एक्सटेंशन होते हुए एएलटी रोड के रास्ते एनएच-9 तक।
- दिलशाद गार्डन से डासना वाया गोविंदपुरम व मोहन नगर।
- कौशांबी से एएलटी सेंटर वाया मोहन नगर व पुराना बस अड्डा।
- सूर्यनगर से नोएडा सिटी सेंटर वाया कनावनी, सीआईएसएफ रोड।
- कौशांबी से डासना वाया गोविंदपुरम, एनएच-9, लालकुआं।
- टीला मोड़ से नया बस अड्डा, वाया भोपुरा, मोहननगर।
- डासना से कौशांबी, वाया पुराना बस अड्डा, मोहननगर।
- शालीमार गार्डन से पुराना रेलवे स्टेशन, वाया मोहन नगर, नया बस अड्डा।
इन पर चल रहीं बसें
- पुराने बस अड्डे से लोनी (आठ बस)
- मसूरी से दिलशाद गार्डन (नौ बस)
- कौशांबी से मोदीनगर (आठ बस)
- पुराना बस अड्डे से मंडोला (चार बस)
एक हफ्ते बाद चलने लगी ...
जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी ने बताया कि ई बसों के लिए करीब डेढ़ माह पहले परिवहन निगम से मंडोला के लिए बसें चलाने की मांग की गई थी। इसके एक हफ्ते के बाद बसें आने शुरू हो गई थीं।
विज्ञापन
साहिबाबाद। सिर्फ शहर में चलाने के लिए आईं इलेक्ट्रिक बसों को अब देहात के रूटों पर भी चलाया जा रहा है। जिस रूट के लिए भी विधायक या अन्य किसी जनप्रतिनिधि की सिफारिश आ जाती है, परिवहन निगम उसी पर बस सेवा शुरू कर देता है। नतीजा यह है कि शहर के आधे से ज्यादा रूट खाली पड़े हैं। यहां तक कि कॉलेजों के आसपास भी कोई रूट नहीं बनाया गया है। छात्रों को पांच से दस किमी. चलने के बाद बस मिलती है।
शासन ने शहर के लिए 200 बसें मंजूर की थीं। इनमें से मिलीं सिर्फ 50 हैं। इनमें भी चल रही हैं सिर्फ 30 ही। 20 का पंजीकरण नहीं हो पाया है। बाकी 150 के जनवरी 2023 में मिलने की उम्मीद है। 30 में से भी एक को अक्सर रिजर्व में रखा जाता है। ऐसे में 29 को ही शहर और देहात के रूट पर चलाया जा रहा है। शुरू में सिर्फ शहर के रूट तय किए गए थे। बाद में देहात के भी जोड़ लिए गए। इससे शहर के रूटों पर बसों की संख्या कम रह गई। सभी 200 मिल जाने के बाद शहर के खाली पड़े रूटों पर बसें चलाने की योजना परिवहन निगम ने बनाई है।
विज्ञापन
दो शिफ्ट में चल रहीं बसें : ई-बसें सुबह छह बजे से रात करीब 10 बजे तक चलाई जाती है। यह बसें दो शिफ्ट में चलती हैं। दोपहर में करीब एक बजे सभी बस डिपो पर पहुंच जाती है और इन्हें चार्ज करने में 45 से 60 मिनट का समय लगता है।
विज्ञापन
हां, सिफारिश मानी गई है
गाजियाबाद सिटी ट्रांसपोर्ट के प्रबंधक पीआर बेलवरियर ने बताया कि शुरुआत में ई-बसों को सिर्फ शहर में चलाया गया था लेकिन यात्रियों की मांग को देखते हुए देहात तक बढ़ा दिया गया। ऐसे रूटों पर बसें लगाई गई हैं, जहां निजी बसें नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर इन बसों को लगाया गया है। 20 बसों को अगले दो सप्ताह में रूटों पर उतारा जाएगा। इस सप्ताह इन बसों का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। बुधवार को बैठक के दौरान इन बसों के रूट तय किए जाएंगे।
लोनी और मोदीनगर तक जा रही बसें
ई-बसों के सभी रूट पहले शहर के ही थे। फिर पुराना बस अड्डा से मुरादनगर तक का रूट बना। मोदीनगर विधायक की सिफारिश पर इसे मोदीनगर तक बढ़ा दिया गया। इसी तरह एक रूट पुराना बस अड्डा से लोनी तक बनाया गया। इसे बढ़ाकर मंडोला तक कर दिया गया। एक रूट पिलखुवा तक का बनाया गया है। हालांकि, इस पर बसें अभी नहीं चल रही हैं।
यह तय हुए थे रूट
- पुराने बस अड्डे से नोएडा सिटी सेंटर, वाया विजयनगर
- पुराने बस अड्डे से हापुड़ चुंगी, डायमंड फ्लाईओवर, लालकुआं, विजयनगर, नए बस अड्डे होते हुए पुराना बस अड्डा।
- मोहननगर से राजनगर एक्सटेंशन होते हुए एएलटी रोड के रास्ते एनएच-9 तक।
- दिलशाद गार्डन से डासना वाया गोविंदपुरम व मोहन नगर।
- कौशांबी से एएलटी सेंटर वाया मोहन नगर व पुराना बस अड्डा।
- सूर्यनगर से नोएडा सिटी सेंटर वाया कनावनी, सीआईएसएफ रोड।
- कौशांबी से डासना वाया गोविंदपुरम, एनएच-9, लालकुआं।
- टीला मोड़ से नया बस अड्डा, वाया भोपुरा, मोहननगर।
- डासना से कौशांबी, वाया पुराना बस अड्डा, मोहननगर।
- शालीमार गार्डन से पुराना रेलवे स्टेशन, वाया मोहन नगर, नया बस अड्डा।
इन पर चल रहीं बसें
- पुराने बस अड्डे से लोनी (आठ बस)
- मसूरी से दिलशाद गार्डन (नौ बस)
- कौशांबी से मोदीनगर (आठ बस)
- पुराना बस अड्डे से मंडोला (चार बस)
एक हफ्ते बाद चलने लगी ...
जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी ने बताया कि ई बसों के लिए करीब डेढ़ माह पहले परिवहन निगम से मंडोला के लिए बसें चलाने की मांग की गई थी। इसके एक हफ्ते के बाद बसें आने शुरू हो गई थीं।