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कौशांबी में भूमिगत पानी पीने लायक नहीं
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कौशांबी में भूमिगत पानी पीने लायक नहीं
साहिबाबाद। कौशांबी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (कारवा) की ओर से सभी अपार्टमेंट्स में गाइडलाइन जारी की गई हैं कि लोग भूमिगत पानी को पीने के प्रयोग में न लाएं, वरना कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। कारवा ने कौशांबी के पानी की जांच रिपोर्ट आने की बाद गाइडलाइन जारी की है।
कारवा अध्यक्ष विनय मित्तल ने बताया कि पिछले दिनों कई सोसायटियों में मटमैला पानी आ रहा था। लोगों की शिकायत के बाद पूरी कौशांबी को कवर करने के उद्देश्य से यहां की कामदगिरी, विंध्याचल और सुमेरु से पानी का सैंपल लिया गया, जिसकी जांच दिल्ली की एक लैब के साथ ही गाजियाबाद स्थित नेशनल टेस्ट हाउस में भी कराई गई। उन्होंने बताया कि दोनों ही जांच में क्लोराइड की वैल्यू सामान्य से दोगुना अधिक मिली है। वहीं, टीडीएस की मात्रा सामान्य से चार गुना अधिक एवं हार्डनेस भी अधिक मिला है। विनय मित्तल का कहना है कि रिपोर्ट के बाद कई विशेषज्ञों से बात की गई, जिनके मुताबिक यदि क्लोराइड अधिक होने पर भी पानी का प्रयोग करते हैं तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके साथ ही किडनी और लीवर संबंधी भी रोग होता है। ऐसे में एहतियातन लोगों को बता दिया गया है कि वह पीने के लिए बोतलबंद पानी ही खरीदें।
सेहत के लिए खतरा
पानी के नमूनों में टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स (टीडीएस) 2348 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है, जबकि यह 500 से अधिक नहीं होना चाहिए। क्लोराइड सामान्य (250) मिलीग्राम प्रति लीटर से चार गुना 1027 मिला है। कठोरता 250 तक सामान्य होती है जबकि मिली 1950 है।
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पानी दूषित होने के हैं कई कारण
कारवा अध्यक्ष का कहना है कि कौशांबी का पानी जनपद में अन्य इलाकों के मुकाबले सबसे अधिक खराब है। पिछले दिनों पानी और भी अधिक प्रदूषित हुआ है और इसकी कई वजह हैं। दरअसल कौशांबी के पास ही साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र है। आरोप है कि इन कंपनियों से निकलने वाले गंदे पानी को बिना शोधन किए ही बहा दिया जाता है, जो कि रसायनयुक्त होता है। वहीं, साहिबाबाद ड्रेन एवं गाजीपुर डंपिंग ग्राउंड सब कुछ मिलकर कौशांबी के भूजल को प्रदूषित कर रहे हैं।
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साहिबाबाद। कौशांबी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (कारवा) की ओर से सभी अपार्टमेंट्स में गाइडलाइन जारी की गई हैं कि लोग भूमिगत पानी को पीने के प्रयोग में न लाएं, वरना कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। कारवा ने कौशांबी के पानी की जांच रिपोर्ट आने की बाद गाइडलाइन जारी की है।
कारवा अध्यक्ष विनय मित्तल ने बताया कि पिछले दिनों कई सोसायटियों में मटमैला पानी आ रहा था। लोगों की शिकायत के बाद पूरी कौशांबी को कवर करने के उद्देश्य से यहां की कामदगिरी, विंध्याचल और सुमेरु से पानी का सैंपल लिया गया, जिसकी जांच दिल्ली की एक लैब के साथ ही गाजियाबाद स्थित नेशनल टेस्ट हाउस में भी कराई गई। उन्होंने बताया कि दोनों ही जांच में क्लोराइड की वैल्यू सामान्य से दोगुना अधिक मिली है। वहीं, टीडीएस की मात्रा सामान्य से चार गुना अधिक एवं हार्डनेस भी अधिक मिला है। विनय मित्तल का कहना है कि रिपोर्ट के बाद कई विशेषज्ञों से बात की गई, जिनके मुताबिक यदि क्लोराइड अधिक होने पर भी पानी का प्रयोग करते हैं तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके साथ ही किडनी और लीवर संबंधी भी रोग होता है। ऐसे में एहतियातन लोगों को बता दिया गया है कि वह पीने के लिए बोतलबंद पानी ही खरीदें।
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सेहत के लिए खतरा
पानी के नमूनों में टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स (टीडीएस) 2348 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है, जबकि यह 500 से अधिक नहीं होना चाहिए। क्लोराइड सामान्य (250) मिलीग्राम प्रति लीटर से चार गुना 1027 मिला है। कठोरता 250 तक सामान्य होती है जबकि मिली 1950 है।
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पानी दूषित होने के हैं कई कारण
कारवा अध्यक्ष का कहना है कि कौशांबी का पानी जनपद में अन्य इलाकों के मुकाबले सबसे अधिक खराब है। पिछले दिनों पानी और भी अधिक प्रदूषित हुआ है और इसकी कई वजह हैं। दरअसल कौशांबी के पास ही साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र है। आरोप है कि इन कंपनियों से निकलने वाले गंदे पानी को बिना शोधन किए ही बहा दिया जाता है, जो कि रसायनयुक्त होता है। वहीं, साहिबाबाद ड्रेन एवं गाजीपुर डंपिंग ग्राउंड सब कुछ मिलकर कौशांबी के भूजल को प्रदूषित कर रहे हैं।