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आधे शहर में घरों से नहीं उठा कूड़ा
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जीडीए फ्लाईओवर के पास की सर्विस रोड पर पड़े कूड़े की दुर्गंध से नाक ढक कर जाती महिला।
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आधे शहर में घरों से नहीं उठा कूड़ा
गाजियाबाद। डंपिंग ग्राउंड बंद होने से शहर कूड़े के ढेर में तब्दील होता जा रहा है। सेकेंडरी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट के बाद सोमवार से आधे शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी बंद हो गया। लोग घरों का कचरा सड़कों पर फेंक रहे हैं। कॉलोनियों में कूड़े के ढेर लग जाने से स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम को राजनगर एक्सटेंशन में बनाई गई सैनिटरी लैंडफिल साइट स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय विधायक अजित पाल त्यागी के दबाव में बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर निगम ने गालंद में अपनी जमीन पर कचरा डालना शुरू किया तो धौलाना विधायक और स्थानीय लोगों के दबाव में कूड़ा डालना बंद करना पड़ा। कई दिन तक नगर निगम चोरी-छिपे खाली जगहों पर कचरा डालता रहा, लेकिन नंदग्राम में लोडर के ड्राइवर की हादसे में मौत के बाद से यह बंद कर दिया गया। अब कॉलोनियों में कचरे के ढेर लग गए हैं। डंपिंग साइट न होने की वजह से नगर निगम के डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन बंद हो गया है और घरों से कचरा उठाने वाले 194 में से करीब 100 वाहन गैराज में खड़े हो गए हैं। शहर की सड़कों पर करीब 5 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है। हालात यही रहे तो तीन-चार दिन में सड़कों पर कचरा ही कचरा दिखाई देने लगेगा।
राजनगर एक्सटेंशन और गालंद में कूड़ा डलना बंद हो जाने के बाद नगर निगम के अधिकारी वैकल्पिक इंतजाम कर सैनिटरी लैंडफिल साइट के लिए जमीन तलाश रहे हैं। नगर निगम ने तीन स्थानों पर जमीन देखी है, लेकिन अभी किसानों से जमीन नहीं मिली है। ऐसे में कुछ दिन कचरे का यह संकट और झेलना पड़ सकता है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों ने मंगलवार तक समस्या का समाधान करने का दावा किया है।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी = हर जगह कचरा डालने का विरोध हो रहा है, फिर भी जितना संभव हो रहा है, कूड़ा उठवाया जा रहा है। सैनिटरी लैंडफिल साइट के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही जमीन लीज पर लेकर कूड़े का निस्तारण शुरू कराया जाएगा।
महापौर = अपनी जमीन पर कचरा डालने पर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। शहर को कचरे का ढेर नहीं बनने देंगे। अधिकारियों को जमीन तलाशकर कूड़े का निस्तारण शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक-दो दिन में समस्या हल हो जाएगी
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गाजियाबाद। डंपिंग ग्राउंड बंद होने से शहर कूड़े के ढेर में तब्दील होता जा रहा है। सेकेंडरी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट के बाद सोमवार से आधे शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी बंद हो गया। लोग घरों का कचरा सड़कों पर फेंक रहे हैं। कॉलोनियों में कूड़े के ढेर लग जाने से स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम को राजनगर एक्सटेंशन में बनाई गई सैनिटरी लैंडफिल साइट स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय विधायक अजित पाल त्यागी के दबाव में बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर निगम ने गालंद में अपनी जमीन पर कचरा डालना शुरू किया तो धौलाना विधायक और स्थानीय लोगों के दबाव में कूड़ा डालना बंद करना पड़ा। कई दिन तक नगर निगम चोरी-छिपे खाली जगहों पर कचरा डालता रहा, लेकिन नंदग्राम में लोडर के ड्राइवर की हादसे में मौत के बाद से यह बंद कर दिया गया। अब कॉलोनियों में कचरे के ढेर लग गए हैं। डंपिंग साइट न होने की वजह से नगर निगम के डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन बंद हो गया है और घरों से कचरा उठाने वाले 194 में से करीब 100 वाहन गैराज में खड़े हो गए हैं। शहर की सड़कों पर करीब 5 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है। हालात यही रहे तो तीन-चार दिन में सड़कों पर कचरा ही कचरा दिखाई देने लगेगा।
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राजनगर एक्सटेंशन और गालंद में कूड़ा डलना बंद हो जाने के बाद नगर निगम के अधिकारी वैकल्पिक इंतजाम कर सैनिटरी लैंडफिल साइट के लिए जमीन तलाश रहे हैं। नगर निगम ने तीन स्थानों पर जमीन देखी है, लेकिन अभी किसानों से जमीन नहीं मिली है। ऐसे में कुछ दिन कचरे का यह संकट और झेलना पड़ सकता है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों ने मंगलवार तक समस्या का समाधान करने का दावा किया है।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी = हर जगह कचरा डालने का विरोध हो रहा है, फिर भी जितना संभव हो रहा है, कूड़ा उठवाया जा रहा है। सैनिटरी लैंडफिल साइट के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही जमीन लीज पर लेकर कूड़े का निस्तारण शुरू कराया जाएगा।
महापौर = अपनी जमीन पर कचरा डालने पर भी विरोध झेलना पड़ रहा है। शहर को कचरे का ढेर नहीं बनने देंगे। अधिकारियों को जमीन तलाशकर कूड़े का निस्तारण शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक-दो दिन में समस्या हल हो जाएगी