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घरों में छाई हरियाली, शहर में बढ़ गई 133 नर्सरी
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विवेकानंद रोड के किनारे ग्रीन बेल्ट पर बनी नर्सरी। संवाद
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घरों में छाई हरियाली, शहर में बढ़ गई 133 नर्सरी
गाजियाबाद। शहर के लोगों को हरियाली ज्यादा भाने लगी है। रूफ टॉप गार्डन और किचन गार्डन का चलन बढ़ा है तो गाजियाबाद में पौधों की मांग भी बढ़ी है। यही कारण है कि अब नर्सरी युवाओं को रोजगार के रूप में पसंद आ रही हैं। पिछले दो साल में नगर निगम सीमा क्षेत्र में 133 नई नर्सरी खुली हैं। इससे पहले शहर में महज 78 नर्सरी थीं।
गार्डनिंग का शौक लोगों में पहले भी था, लेकिन कोरोना काल में लॉकडाउन के बीच कई माह तक लोग घरों में रहे तो उन्होंने बागवानी में दिलचस्पी दिखाई। घरों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने वाले पौधों से लेकर किचन के लिए सब्जियों वाले पौधों की मांग अचानक बढ़ गई। इसी का असर है कि नर्सरी में पेड़-पौधों की बिक्री बढ़ी है। अब उन कॉलोनियों में भी नर्सरी का कारोबार पहुंच गया है। नगर निगम ने नई नर्सरियों का आवंटन कर लोगों को रोजगार दिया तो दूसरी ओर शहर के लोगों को घर के आसपास ही मनपसंद पेड़-पौधे मिलने लगे हैं।
दिमागी खुशी देती है बागवानी : साइकोलॉजिस्ट
साइकोलॉजिस्ट डॉ. अल्पना मोहन का कहना है कि बागवानी से डिप्रेशन दूर होता है। पेड़-पौधों में लोगों को जीवन नजर आता है। अपनी मेहनत के परिणाम के तौर पर जब पेड़-पौधों को बढ़ता हुआ और उन पर फूल-फल निकलते देखते हैं तो लोगों को खुशी मिलती है। ऐसी खुशी कुकिंग, किताबें पढ़ने या किसी ऐसे अन्य शौक को पूरा करने में नहीं मिलती, जिनमें जीवन न हो। कोरोना काल में देखा गया है कि लोगों की गार्डनिंग में रुचि बढ़ी है।
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शहर में नर्सरियां
वर्ष नर्सरी
2019 तक 78
2020 में आवंटित 44
2021 में आवंटित 89
कुल संख्या 211
बागवानी में बढ़ा रुझान
कोविड के दौरान बागवानी के प्रति रुझान बढ़ा है। फूलवाले पौधों से लेकर ड्राइंग रूम में रखे जाने वाले सजावटी पौधों की मांग बढ़ी है। पहले सिर्फ बड़े घरों में लोग पौधे लगाते थे, अब फ्लैटों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।
- हरीश भाटी, नर्सरी संचालक
लोगों को मिला रोजगार
पांच-छह साल से नर्सरियों का आवंटन नहीं हुआ था। रोजगार के रूप में लोग इसकी मांग कर रहे थे। उनके आवेदन पर नई नर्सरी का आवंटन किया गया है।
- डॉ. अनुज सिंह, उद्यान अधिकारी, नगर निगम
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गाजियाबाद। शहर के लोगों को हरियाली ज्यादा भाने लगी है। रूफ टॉप गार्डन और किचन गार्डन का चलन बढ़ा है तो गाजियाबाद में पौधों की मांग भी बढ़ी है। यही कारण है कि अब नर्सरी युवाओं को रोजगार के रूप में पसंद आ रही हैं। पिछले दो साल में नगर निगम सीमा क्षेत्र में 133 नई नर्सरी खुली हैं। इससे पहले शहर में महज 78 नर्सरी थीं।
गार्डनिंग का शौक लोगों में पहले भी था, लेकिन कोरोना काल में लॉकडाउन के बीच कई माह तक लोग घरों में रहे तो उन्होंने बागवानी में दिलचस्पी दिखाई। घरों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने वाले पौधों से लेकर किचन के लिए सब्जियों वाले पौधों की मांग अचानक बढ़ गई। इसी का असर है कि नर्सरी में पेड़-पौधों की बिक्री बढ़ी है। अब उन कॉलोनियों में भी नर्सरी का कारोबार पहुंच गया है। नगर निगम ने नई नर्सरियों का आवंटन कर लोगों को रोजगार दिया तो दूसरी ओर शहर के लोगों को घर के आसपास ही मनपसंद पेड़-पौधे मिलने लगे हैं।
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दिमागी खुशी देती है बागवानी : साइकोलॉजिस्ट
साइकोलॉजिस्ट डॉ. अल्पना मोहन का कहना है कि बागवानी से डिप्रेशन दूर होता है। पेड़-पौधों में लोगों को जीवन नजर आता है। अपनी मेहनत के परिणाम के तौर पर जब पेड़-पौधों को बढ़ता हुआ और उन पर फूल-फल निकलते देखते हैं तो लोगों को खुशी मिलती है। ऐसी खुशी कुकिंग, किताबें पढ़ने या किसी ऐसे अन्य शौक को पूरा करने में नहीं मिलती, जिनमें जीवन न हो। कोरोना काल में देखा गया है कि लोगों की गार्डनिंग में रुचि बढ़ी है।
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शहर में नर्सरियां
वर्ष नर्सरी
2019 तक 78
2020 में आवंटित 44
2021 में आवंटित 89
कुल संख्या 211
बागवानी में बढ़ा रुझान
कोविड के दौरान बागवानी के प्रति रुझान बढ़ा है। फूलवाले पौधों से लेकर ड्राइंग रूम में रखे जाने वाले सजावटी पौधों की मांग बढ़ी है। पहले सिर्फ बड़े घरों में लोग पौधे लगाते थे, अब फ्लैटों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।
- हरीश भाटी, नर्सरी संचालक
लोगों को मिला रोजगार
पांच-छह साल से नर्सरियों का आवंटन नहीं हुआ था। रोजगार के रूप में लोग इसकी मांग कर रहे थे। उनके आवेदन पर नई नर्सरी का आवंटन किया गया है।
- डॉ. अनुज सिंह, उद्यान अधिकारी, नगर निगम