फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghaziabad news

किसान आंदोलन विपक्षी दलों को दे सकता है ऑक्सीजन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jan 2021 01:09 AM IST
विज्ञापन
ghaziabad news
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर नारेबाजी करते किसान। - फोटो : GHAZIABAD City
किसान आंदोलन विपक्षी दलों को दे सकता है ऑक्सीजन
विज्ञापन

गाजियाबाद। यूपी में भाकियू के झंडे के नीचे चल रहे किसान आंदोलन के यू-टर्न लेने के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तस्वीर भी बदल सकती है। गाजीपुर के बाद पश्चिमी यूपी में किसानों की महापंचायत के आयोजन से किसान राजनीति गर्माई है। जाट बेल्ट में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद पटी बिरादरियों की खाई को पाटकर विपक्षी दल आंदोलन के जरिये किसानों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर, मथुरा में हुई किसानों की महापंचायत में काफी हद तक यह तस्वीर नजर भी आई। एक तरफ रालोद, कांग्रेस और सपा जाट-मुस्लिम समीकरण को फिर वापस लाना चाहते हैं तो भाजपा के लिए इस समीकरण से चुनौती बढ़ सकती है।
दरअसल, पश्चिमी यूपी में हमेशा से ही जाट-मुस्लिम राजनीतिक समीकरण रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के बाद से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिरादरियों में खाई पटी तो नए समीकरण सामने आए। जाट और किसान वोट बैंक के सहारे राजनीति में बने रहने वाले राष्ट्रीय लोकदल अपना गढ़ भी नहीं बचा पाया। जाट-मुस्लिम समीकरण टूट जाने से सपा के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई। भाजपा को इन नई परिस्थितियों का फायदा मिला और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद से ज्यादा सीटें मिलीं थीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने वेस्ट यूपी को साधा और विपक्षी दलों को क्लीन स्वीप कर उत्तर प्रदेश में 312 सीटें जीतीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने वेस्ट यूपी में ऑपरेशन क्लीन स्वीप जारी रखा। भाजपा ने रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह और पार्टी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को अपने गढ़ में वापसी नहीं करने दी। अब किसान आंदोलन के जरिए फिर वेस्ट यूपी में राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। न सिर्फ भाकियू और रालोद एक मंच पर आने लगे हैं, बल्कि बिरादरियों को छोड़ किसानों को एक मंच पर लाने के प्रयास होने लगे हैं।
विज्ञापन

भाजपा विरोधी हुए किसान तो रालोद को हो सकता है फायदा
26 जनवरी के बाद किसान आंदोलन के डगमगाने से लेकर दोबारा संभलने के बीच के सफर ने वेस्ट यूपी की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का मुजफ्फरनगर की महापंचायत के मंच से भाषण देकर चौधरी अजित सिंह को हराकर भूल मानने में भी बड़ा संदेश है। यह संदेश 2022 में नए राजनीतिक समीकरण बना सकता है। 2017 में वेस्ट यूपी में रालोद चार सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी थी। ऐसे में किसानों का रुख भाजपा के खिलाफ हुआ तो सबसे ज्यादा फायदा रालोद को हो सकता है। वेस्ट यूपी में रालोद अभी भी किसानों की पसंद की फेहरिस्त में नंबर-2 पर है। 2017 के चुनाव में रालोद ने बागपत जिले की छपरौली विधानसभा पर जीत हासिल की। वहीं बड़ौत, सादाबाद, मांट और बलदेव विधानसभा सीट पर रालोद प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

भाजपा को करना होगा डैमेज कंट्रोल
वेस्ट यूपी ही नहीं, किसान आंदोलन को भाजपा की राजनीति के लिए पूरे प्रदेश में तगड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीति के जानकारों की मानें तो यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा को जल्द इस डैमेज को कंट्रोल करना होगा। वेस्ट यूपी में किसानों का बदला रुख सत्तासीन दल के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

अन्य विपक्षी दलों की भी वेस्ट यूपी पर नजर
न सिर्फ रालोद बल्कि कांग्रेस, सपा, बसपा और राजनीति में सक्रिय हो रहे चंद्रशेखर की नजर भी वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन पर टिकी है। यही वजह है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, समाजवादी पार्टी के बड़े नेता, भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर यूपी गेट स्थित आंदोलन स्थल और मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत में पहुंचे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed