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यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग, स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शनयूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग, स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन
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स्थानीय लोग प्रदर्शन करते।
- फोटो : GHAZIABAD City
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यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग, स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन
गाजियाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को बृहस्पतिवार को दो माह बाद पहली बार स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। बृहस्पतिवार शाम को आंदोलन स्थल खाली कराने की जुगत में गाजियाबाद पुलिस-प्रशासन जुटा हुआ था। इस बीच वैशाली, सीमांत विहार सहित आसपास के लोगों ने यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। 26 जनवरी पर लालकिला पर हुई हिंसा और तिरंगे के अपमान को लेकर लोगों में गुस्सा दिखाई दिया। लोगों ने नारे लगाए कि तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे। साथ ही किसानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बॉर्डर खाली कराने की मांग कर रहे लोगों ने किसानों पर फर्जी आंदोलन चलाने सहित कई गंभीर आरोप मड़ दिए। यूपी बॉर्डर पर जारी आंदोलन के खिलाफ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हुए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना था कि बीते दो माह से यूपी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का कब्जा है। ऐसे में स्थानीय लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। दिल्ली जाने के लिए पांच मिनट के सफर में घंटों लग रहे हैं। ऐसे में आंदोलन के चलते पैसा और समय दोनों जाया हो रहा है।
गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर हुई घटना की कड़ी निंदा करते हुए लोगों ने कहा कि किसी को हक नहीं है कि वह तिरंगे का अपमान करे। शांतिपूर्ण आंदोलन की जगह किसानों ने सारी हदें लांघ दी। लालकिले पर तिरंगे के अपमान की घटना की कड़ी भत्सना करते हैं। इस घटना से आंदोलन कर रहे किसानों का असली चरित्र सामने आ गया है। दूसरी ओर स्थानीय लोगों के आंदोलन से पुलिस-प्रशासन भी हरकत में आ गया। पुलिस ने हंगामा प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से हटाया। पुलिस के हटाने के बावजूद लोग किसानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे।
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किसान बोले-भाजपा विधायक के इशारे पर हुआ प्रदर्शन
यूपी बॉर्डर पर बीते दो माह से जारी किसानों के आंदोलन में बृहस्पतिवार को समीकरण एकाएक बदल गए। पहली बार किसानों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध की आवाज उठाई। लोगों के विरोध प्रदर्शन को किसान नेताओं ने भाजपा की साजिश करार दिया। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा विधायक के इशारे पर भाजपा के लोगों ने आंदोलन को बदनाम करने के लिए प्रदर्शन किया है। किसानों के बीते दो माह से जारी आंदोलन को स्थानीय लेागों का पूरा समर्थन प्राप्त है। भाजपा के लोगों की उन्हें बदनाम करने की साजिश कभी सफल नहीं होगी। किसानों ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक के इशारे पर आंदोलन का माहौल खराब करने आए एक कार्यकर्ता को भी उन्होंने धर दबोचा। इससे भाजपा का असली चेहरा सबके सामने आ गया है। किसान अपनी मांगों का अडिग हैं। कृषि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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गाजियाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को बृहस्पतिवार को दो माह बाद पहली बार स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। बृहस्पतिवार शाम को आंदोलन स्थल खाली कराने की जुगत में गाजियाबाद पुलिस-प्रशासन जुटा हुआ था। इस बीच वैशाली, सीमांत विहार सहित आसपास के लोगों ने यूपी बॉर्डर खाली कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। 26 जनवरी पर लालकिला पर हुई हिंसा और तिरंगे के अपमान को लेकर लोगों में गुस्सा दिखाई दिया। लोगों ने नारे लगाए कि तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे। साथ ही किसानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बॉर्डर खाली कराने की मांग कर रहे लोगों ने किसानों पर फर्जी आंदोलन चलाने सहित कई गंभीर आरोप मड़ दिए। यूपी बॉर्डर पर जारी आंदोलन के खिलाफ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हुए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना था कि बीते दो माह से यूपी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का कब्जा है। ऐसे में स्थानीय लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। दिल्ली जाने के लिए पांच मिनट के सफर में घंटों लग रहे हैं। ऐसे में आंदोलन के चलते पैसा और समय दोनों जाया हो रहा है।
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गणतंत्र दिवस पर लालकिले पर हुई घटना की कड़ी निंदा करते हुए लोगों ने कहा कि किसी को हक नहीं है कि वह तिरंगे का अपमान करे। शांतिपूर्ण आंदोलन की जगह किसानों ने सारी हदें लांघ दी। लालकिले पर तिरंगे के अपमान की घटना की कड़ी भत्सना करते हैं। इस घटना से आंदोलन कर रहे किसानों का असली चरित्र सामने आ गया है। दूसरी ओर स्थानीय लोगों के आंदोलन से पुलिस-प्रशासन भी हरकत में आ गया। पुलिस ने हंगामा प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से हटाया। पुलिस के हटाने के बावजूद लोग किसानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे।
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किसान बोले-भाजपा विधायक के इशारे पर हुआ प्रदर्शन
यूपी बॉर्डर पर बीते दो माह से जारी किसानों के आंदोलन में बृहस्पतिवार को समीकरण एकाएक बदल गए। पहली बार किसानों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध की आवाज उठाई। लोगों के विरोध प्रदर्शन को किसान नेताओं ने भाजपा की साजिश करार दिया। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा विधायक के इशारे पर भाजपा के लोगों ने आंदोलन को बदनाम करने के लिए प्रदर्शन किया है। किसानों के बीते दो माह से जारी आंदोलन को स्थानीय लेागों का पूरा समर्थन प्राप्त है। भाजपा के लोगों की उन्हें बदनाम करने की साजिश कभी सफल नहीं होगी। किसानों ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक के इशारे पर आंदोलन का माहौल खराब करने आए एक कार्यकर्ता को भी उन्होंने धर दबोचा। इससे भाजपा का असली चेहरा सबके सामने आ गया है। किसान अपनी मांगों का अडिग हैं। कृषि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा।