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बजट मेें खेल : 40 हजार में धुले हाथ, तीन लाख में फूटा नारियल
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बजट मेें खेल : 40 हजार में धुले हाथ, तीन लाख में फूटा नारियल
गाजियाबाद। सरकारी विकास योजनाओं पर खर्च के बजट में अजब-गजब खेल देख आप चौंक जाएंगे। डासना देहात के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के हाथ धुलवाने पर 40-40 हजार रुपये खर्च कर दिए गए। गांव में विकास कार्यों का नारियल फोड़ने और फीता काटने पर भी तीन लाख खर्च हो गए। खास बात यह है कि एस्टिमेट बनता गया और ऊपर बैठे साहब बिना रोकटोक पास करते चले गए।
वर्ष 2019-20 में डासना देहात क्षेत्र में विकास के लिए 40 करोड़ 25 लाख से अधिक का फंड दिया गया। इससे े 947 विकास कार्य कराए गए। अधिकांश कार्यों पर तीन और पांच लाख रुपये खर्च दिखाकर एस्टिमेट बनाया गया। इसी वित्तीय वर्ष में चार बार इमरजेंसी कार्य दिखाया गया और हर बार तीन-तीन लाख रुपया खर्च हुआ। यानी हर बार का इमरजेंसी कार्य तीन लाख का था। आंकड़े यही बताते हैं कि खेल के मैदान के सुंदरीकरण, गांव में फॉगिंग, वृक्षारोपण पर भी तीन-तीन लाख के दो एस्टिमेट बनाकर धन खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक तीन करोड़ 73 लाख 58 हजार रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 893 विकास कार्य कराए गए हैं। इनमें भी कुछ ऐसी मद हैं जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर तक सरकारी की फिजूलखर्ची की गई। भूड़गढ़ी आंगनबाड़ी केंद्र -02, कल्लूगढ़ी आंगनबाड़ी केंद्र -117 पर दो-दो बार स्वच्छता जागरूकता का कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों और महिलाओं के हाथ धुलवाकर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर हर बार 40-40 हजार रुपया खर्च किया गया। अब विभाग का तर्क है कि यह सिर्फ अनुमानित लागत थी जिस पर एस्टिमेट तैयार किया गया। कुछ मदों में कम या ज्यादा भी खर्च हुआ है। अब सवाल उठता है कि अगर यह एस्टिमेट हैं तो फिर सभी कार्यों का एक समान एस्टिमेट कैसे बन सकता है।
यहां हर सड़क की लंबाई और चौड़ाई बराबर
डासना देहात क्षेत्र में हर सड़क और गली की लंबाई और चौड़ाई बराबर है। न कोई बड़ी हैं और न कोई छोटी है। सरकारी खर्च यह बता रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 893 निर्माण कार्य हुए। इनमें करीब 20 कार्य ही 40 हजार रुपये से अधिक या उससे कम के एस्टिमेट बनाकर कराए गए। बाकी सभा कार्यों पर 40-40 हजार रुपया का एस्टिमेट बनाकर खर्च किया गया। हैरत की बात यह है कि किसी अधिकारी न इस पर आपत्ति नहीं लगाई।
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पहले शौचालय बनाया, फिर मरम्मत पर खर्च कर दिए 40 हजार
वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही कई ऐसे खर्च किए गए जिन पर जांच हो तो बड़ा गोलमाल सामने आ सकता है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल एवं एप पर अपलोड रिकॉर्ड बताता है कि क्रमांक संख्या-214 पर 40 हजार रुपया खर्च कर गुर्जर गढ़ी के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय बनाया गया। फिर उसके बाद क्रमांक संख्या - 216 पर 40 हजार रुपये में इसी विद्यालय में शौचालय की मरम्मत करा दी गई।
2019 में 50 और 2020 में 40 हजार में बना शौचालय
किसी भी निर्माण को लेकर खर्च का सामान्य सा गणित है कि साल दर साल खर्च की लागत बढ़ती जाती है लेकिन यह पर उल्टा हुआ है। उस्मानगढ़ी प्राइमरी स्कूल में 50 हजार रुपये की लागत से बीते वित्तीय वर्ष में शौचालय बनाया गया लेकिन इसी स्कूल में चालू वित्तीय वर्ष में 40 हजार रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण हुआ। यानी यहां पर निर्माण लागत बढ़ने के बजाय एक साल बाद 10 हजार रुपये घट गई।
वर्जन
हम सभी मामलों की जांच कराएंगे। निश्चित तौर पर 40 हजार एस्टिमेट से जुड़ी लागत होगी, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि सभी का एस्टिमेट एक जैसा कैसे बनाया गया। इस पर संबंधित क्षेत्र के ग्राम सचिव से वार्ता की जाएगी। अगर कहीं पर एस्टिमेट में गड़बड़ी है तो उस पर भी जवाब तलब कर कार्रवाई होगी।
अनिल त्रिपाठी, जिला पंचायती राज अधिकारी
खर्च मद में हाथों की धुलाई दिखाई गई है लेकिन उसमें पूरा सिस्टम तैयार किया गया है, जिस पर 40 हजार रुपया खर्च हुआ है। इसमें वॉशबेसिन, टोंटी लगाने जैसा कार्य भी किया गया है। बाकी सभी मदों पर निर्धारित प्रारूप में धनराशि खर्च की गई।
सतीश कुमार प्रधान पति
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गाजियाबाद। सरकारी विकास योजनाओं पर खर्च के बजट में अजब-गजब खेल देख आप चौंक जाएंगे। डासना देहात के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के हाथ धुलवाने पर 40-40 हजार रुपये खर्च कर दिए गए। गांव में विकास कार्यों का नारियल फोड़ने और फीता काटने पर भी तीन लाख खर्च हो गए। खास बात यह है कि एस्टिमेट बनता गया और ऊपर बैठे साहब बिना रोकटोक पास करते चले गए।
वर्ष 2019-20 में डासना देहात क्षेत्र में विकास के लिए 40 करोड़ 25 लाख से अधिक का फंड दिया गया। इससे े 947 विकास कार्य कराए गए। अधिकांश कार्यों पर तीन और पांच लाख रुपये खर्च दिखाकर एस्टिमेट बनाया गया। इसी वित्तीय वर्ष में चार बार इमरजेंसी कार्य दिखाया गया और हर बार तीन-तीन लाख रुपया खर्च हुआ। यानी हर बार का इमरजेंसी कार्य तीन लाख का था। आंकड़े यही बताते हैं कि खेल के मैदान के सुंदरीकरण, गांव में फॉगिंग, वृक्षारोपण पर भी तीन-तीन लाख के दो एस्टिमेट बनाकर धन खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक तीन करोड़ 73 लाख 58 हजार रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 893 विकास कार्य कराए गए हैं। इनमें भी कुछ ऐसी मद हैं जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर तक सरकारी की फिजूलखर्ची की गई। भूड़गढ़ी आंगनबाड़ी केंद्र -02, कल्लूगढ़ी आंगनबाड़ी केंद्र -117 पर दो-दो बार स्वच्छता जागरूकता का कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों और महिलाओं के हाथ धुलवाकर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर हर बार 40-40 हजार रुपया खर्च किया गया। अब विभाग का तर्क है कि यह सिर्फ अनुमानित लागत थी जिस पर एस्टिमेट तैयार किया गया। कुछ मदों में कम या ज्यादा भी खर्च हुआ है। अब सवाल उठता है कि अगर यह एस्टिमेट हैं तो फिर सभी कार्यों का एक समान एस्टिमेट कैसे बन सकता है।
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यहां हर सड़क की लंबाई और चौड़ाई बराबर
डासना देहात क्षेत्र में हर सड़क और गली की लंबाई और चौड़ाई बराबर है। न कोई बड़ी हैं और न कोई छोटी है। सरकारी खर्च यह बता रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 893 निर्माण कार्य हुए। इनमें करीब 20 कार्य ही 40 हजार रुपये से अधिक या उससे कम के एस्टिमेट बनाकर कराए गए। बाकी सभा कार्यों पर 40-40 हजार रुपया का एस्टिमेट बनाकर खर्च किया गया। हैरत की बात यह है कि किसी अधिकारी न इस पर आपत्ति नहीं लगाई।
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पहले शौचालय बनाया, फिर मरम्मत पर खर्च कर दिए 40 हजार
वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही कई ऐसे खर्च किए गए जिन पर जांच हो तो बड़ा गोलमाल सामने आ सकता है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल एवं एप पर अपलोड रिकॉर्ड बताता है कि क्रमांक संख्या-214 पर 40 हजार रुपया खर्च कर गुर्जर गढ़ी के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय बनाया गया। फिर उसके बाद क्रमांक संख्या - 216 पर 40 हजार रुपये में इसी विद्यालय में शौचालय की मरम्मत करा दी गई।
2019 में 50 और 2020 में 40 हजार में बना शौचालय
किसी भी निर्माण को लेकर खर्च का सामान्य सा गणित है कि साल दर साल खर्च की लागत बढ़ती जाती है लेकिन यह पर उल्टा हुआ है। उस्मानगढ़ी प्राइमरी स्कूल में 50 हजार रुपये की लागत से बीते वित्तीय वर्ष में शौचालय बनाया गया लेकिन इसी स्कूल में चालू वित्तीय वर्ष में 40 हजार रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण हुआ। यानी यहां पर निर्माण लागत बढ़ने के बजाय एक साल बाद 10 हजार रुपये घट गई।
वर्जन
हम सभी मामलों की जांच कराएंगे। निश्चित तौर पर 40 हजार एस्टिमेट से जुड़ी लागत होगी, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि सभी का एस्टिमेट एक जैसा कैसे बनाया गया। इस पर संबंधित क्षेत्र के ग्राम सचिव से वार्ता की जाएगी। अगर कहीं पर एस्टिमेट में गड़बड़ी है तो उस पर भी जवाब तलब कर कार्रवाई होगी।
अनिल त्रिपाठी, जिला पंचायती राज अधिकारी
खर्च मद में हाथों की धुलाई दिखाई गई है लेकिन उसमें पूरा सिस्टम तैयार किया गया है, जिस पर 40 हजार रुपया खर्च हुआ है। इसमें वॉशबेसिन, टोंटी लगाने जैसा कार्य भी किया गया है। बाकी सभी मदों पर निर्धारित प्रारूप में धनराशि खर्च की गई।
सतीश कुमार प्रधान पति