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पहली ही जांच में मिले भ्रष्टाचार के सुबूत
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पहली ही जांच में मिले भ्रष्टाचार के सुबूत
गाजियाबाद। मुरादनगर हादसे के तीसरे दिन श्मशान घाट में जमींदोज हुए गलियारे में लगी निर्माण सामग्री और इसी परिसर में हुए अन्य निर्माण कार्यों की जांच के लिए गठित टीम ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के सुराग खंगाले। राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक छेदी लाल, जीडीए के चीफ इंजीनियर वीएन सिंह और नगर निगम के चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान को टीम में शामिल किया गया है। मंगलवार को टीम ने मुरादनगर श्मशान घाट में पहुंचकर करीब दो घंटे तक जांच की। टीम को गलियारे में पिलर्स की संख्या भी कम मिली। टीम को और भी कई खामियां मिली हैं। परिसर में बने दो बरामदे और एक हाल को सील कर दिया गया। तीन दिन में यह टीम अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
तीन सीनियर इंजीनियरों की इस टीम ने न केवल जमींदोज हुए गलियारे से संबंधित सुबूत जुटाए, बल्कि इसी परिसर में बने अन्य हॉल, शौचालयों, बरामदों में बने क्रॉस बीम, पिलर्स की चौड़ाई और मोर्टाई के बारे में जानकारी जुटाई। टीम में शामिल इंजीनियरों ने हथौड़ा मारकर कॉलम की गुणवत्ता को मानकों पर परखा। वहीं स्थानीय और चश्मदीद लोगों से भी बातचीत कर घटना की जानकारी ली। करीब दो घंटे तक टीम श्मशान घाट परिसर में छानबीन करती रही। जांच टीम को श्मशान घाट में कराए गए चार बड़े निर्माण कार्यों से सिर्फ एक बरामदे का डिजाइन फाइल में मिला। जमींदोज हुए गलियारे का डिजाइन पत्रावली में थी ही नहीं। माना जा रहा है कि इसका डिजाइन बनवाए बिना ही निर्माण शुरू कर दिया गया था।
हालांकि टीम में शामिल इंजीनियर मीडिया से बचते रहे। उन्होंने फिलहाल कुछ भी बोलने से इनकार किया। जांच टीम के सदस्यों ने कहा कि तीन दिन में जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।
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सिर्फ चार पिलर पर खड़ा कर दिया 200 वर्ग फुट का हॉल
श्मशान घाट में इस गलियारे से कुछ महीनों पूर्व एक बड़ा हॉल और दो बरामदे बनाए गए हैं। करीब 200 वर्ग फुट क्षेत्रफल के हॉल में जांच टीम को सिर्फ चार पिलर मिले। चारों कोनों पर एक-एक पिलर बनाया गया था। इस हॉल के बीच में एक क्रॉस बीम मिला। इस बीम की लंबाई ज्यादा होने की वजह से यह झुका होगा तो ठेकेदार ने इस बीम के नीचे एक पिलर बाद में खड़ा कर दिया। लकड़ियां रखने के लिए बनाए गए इस हॉल के बीच में पिलर नहीं होना चाहिए था। मानकों के मुताबिक इस हॉल में करीब 8 पिलर होने चाहिए थे।
श्मशान घाट में बने बरामदे असुरक्षित घोषित, कराया सील
श्मशान घाट परिसर में चंद महीने पहले ही बरामदे, एक हॉल, शौचालय, बाउंड्रीवॉल बनाए गए हैं। गलियारे के जमींदोज होने के बाद इन बरामदे को भी गुणवत्ता के मानकों पर परखा गया तो कई खामियां मिलीं। पिलर्स की संख्या कम मिली। प्रथम दृष्टया इन अन्य निर्माण को भी जिला प्रशासन और इंजीनियरिंग टीम ने खतरनाक माना है। यानी इनकी वजह से भी कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका है। ऐसे में जिला प्रशासन ने इन सभी बरामदों, हॉल को सील करा दिया है। प्रशासन ने इन पर असुरक्षित होने का नोटिस चस्पा कर दिया है। इन परिसर में लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
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आईआईटी रुड़की या राइट्स से मदद लेगी जांच टीम
जांच टीम श्मशान घाट में पहुंचकर निर्माण कार्यों की जांच की, लेकिन टीम को अब आईआईटी रुड़की या भारत सरकार के उपक्रम राइट्स से मदद लेनी पड़ेगी। ऐसे निर्माण कार्यों के लिए वर्तमान मानकों की जानकारी समेत कई बिंदुओं पर उनकी मदद लेनी पड़ सकती है। जांच टीम के सदस्य इस पर विचार कर रहे हैं।
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गाजियाबाद। मुरादनगर हादसे के तीसरे दिन श्मशान घाट में जमींदोज हुए गलियारे में लगी निर्माण सामग्री और इसी परिसर में हुए अन्य निर्माण कार्यों की जांच के लिए गठित टीम ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के सुराग खंगाले। राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक छेदी लाल, जीडीए के चीफ इंजीनियर वीएन सिंह और नगर निगम के चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान को टीम में शामिल किया गया है। मंगलवार को टीम ने मुरादनगर श्मशान घाट में पहुंचकर करीब दो घंटे तक जांच की। टीम को गलियारे में पिलर्स की संख्या भी कम मिली। टीम को और भी कई खामियां मिली हैं। परिसर में बने दो बरामदे और एक हाल को सील कर दिया गया। तीन दिन में यह टीम अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
तीन सीनियर इंजीनियरों की इस टीम ने न केवल जमींदोज हुए गलियारे से संबंधित सुबूत जुटाए, बल्कि इसी परिसर में बने अन्य हॉल, शौचालयों, बरामदों में बने क्रॉस बीम, पिलर्स की चौड़ाई और मोर्टाई के बारे में जानकारी जुटाई। टीम में शामिल इंजीनियरों ने हथौड़ा मारकर कॉलम की गुणवत्ता को मानकों पर परखा। वहीं स्थानीय और चश्मदीद लोगों से भी बातचीत कर घटना की जानकारी ली। करीब दो घंटे तक टीम श्मशान घाट परिसर में छानबीन करती रही। जांच टीम को श्मशान घाट में कराए गए चार बड़े निर्माण कार्यों से सिर्फ एक बरामदे का डिजाइन फाइल में मिला। जमींदोज हुए गलियारे का डिजाइन पत्रावली में थी ही नहीं। माना जा रहा है कि इसका डिजाइन बनवाए बिना ही निर्माण शुरू कर दिया गया था।
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हालांकि टीम में शामिल इंजीनियर मीडिया से बचते रहे। उन्होंने फिलहाल कुछ भी बोलने से इनकार किया। जांच टीम के सदस्यों ने कहा कि तीन दिन में जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।
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सिर्फ चार पिलर पर खड़ा कर दिया 200 वर्ग फुट का हॉल
श्मशान घाट में इस गलियारे से कुछ महीनों पूर्व एक बड़ा हॉल और दो बरामदे बनाए गए हैं। करीब 200 वर्ग फुट क्षेत्रफल के हॉल में जांच टीम को सिर्फ चार पिलर मिले। चारों कोनों पर एक-एक पिलर बनाया गया था। इस हॉल के बीच में एक क्रॉस बीम मिला। इस बीम की लंबाई ज्यादा होने की वजह से यह झुका होगा तो ठेकेदार ने इस बीम के नीचे एक पिलर बाद में खड़ा कर दिया। लकड़ियां रखने के लिए बनाए गए इस हॉल के बीच में पिलर नहीं होना चाहिए था। मानकों के मुताबिक इस हॉल में करीब 8 पिलर होने चाहिए थे।
श्मशान घाट में बने बरामदे असुरक्षित घोषित, कराया सील
श्मशान घाट परिसर में चंद महीने पहले ही बरामदे, एक हॉल, शौचालय, बाउंड्रीवॉल बनाए गए हैं। गलियारे के जमींदोज होने के बाद इन बरामदे को भी गुणवत्ता के मानकों पर परखा गया तो कई खामियां मिलीं। पिलर्स की संख्या कम मिली। प्रथम दृष्टया इन अन्य निर्माण को भी जिला प्रशासन और इंजीनियरिंग टीम ने खतरनाक माना है। यानी इनकी वजह से भी कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका है। ऐसे में जिला प्रशासन ने इन सभी बरामदों, हॉल को सील करा दिया है। प्रशासन ने इन पर असुरक्षित होने का नोटिस चस्पा कर दिया है। इन परिसर में लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
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आईआईटी रुड़की या राइट्स से मदद लेगी जांच टीम
जांच टीम श्मशान घाट में पहुंचकर निर्माण कार्यों की जांच की, लेकिन टीम को अब आईआईटी रुड़की या भारत सरकार के उपक्रम राइट्स से मदद लेनी पड़ेगी। ऐसे निर्माण कार्यों के लिए वर्तमान मानकों की जानकारी समेत कई बिंदुओं पर उनकी मदद लेनी पड़ सकती है। जांच टीम के सदस्य इस पर विचार कर रहे हैं।