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हंगरी से लौटे तीन लोग जांच के लिए अस्पताल में भटकते रहे
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हंगरी से लौटे तीन लोग जांच के लिए अस्पताल में भटकते रहे
गाजियाबाद। कोरोना की सही जानकारी न होने के चलते जिले के लोगों में डर बना हुआ हैे। इसकी सही जानकारी कोई लेना चाहे तो इसके लिए भी उचित व्यवस्था नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी डरे हुए लोगों को और डरा रही है। बृहस्पतिवार को जिला एमएमजी अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। चार दिन पूर्व हंगरी से लौटे दो युवक और एक युवती कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचे थे लेकिन तीन घंटे तक वे संक्रामक रोग विभाग और ओपीडी के बीच ही भटकते रहे। वहीं, एक निजी अस्पताल से भी दो मरीजों को कोरोना संदिग्ध मानते हुए एमएमजी भेजा गया। उन्हें भी संक्रामक रोग विभाग से ओपीडी में दिखाने की सलाह देकर रवाना कर दिया गया।
शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले छह लोग हंगरी में जॉब करते हैं। सभी लोग रविवार को ही लौट आए। यहां आने के बाद से एक युवती और दो युवकों को जुकाम व गले में खराश और सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है। उन्होंने निजी डॉक्टर को दिखाया और उपचार शुरू किया। डॉक्टर ने उन्हें जिला अस्पताल स्थित संक्रामक रोग विभाग पहुंचकर कोरोना संबंधी जांच करवाने की सलाह दी। तीनों बृहस्पतिवार को जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की ओर से इमरजेंसी में बने हेल्प डेस्क पर उन्होंने परेशानी बताई। हेल्प डेस्क से उन्हें संक्रामक रोग विभाग भेज दिया गया। पीड़ितों ने बताया कि संक्रामक रोग विभाग से उन्हें ओपीडी में दिखाने की सलाह दी गई। ओपीडी में डॉक्टर ने उन्हें देखने से मना कर इमरजेंसी में जाने की सलाह दी। तीनों फिर से हेल्प डेस्क पहुंचे। जहां से उन्हें ओपीडी में बैठने वाले दूसरे डॉक्टर के पास भेजा गया लेकिन उस डॉक्टर ने भी उन्हें वापस कर दिया। इसके बाद हेल्प डेस्क के कर्मचारी उन्हें अस्पताल के सीएमएस के पास लेकर पहुंचीं तब तक दो बज चुके थे और ओपीडी बंद हो चुकी। सीएमएस ने तीनों को इमरजेंसी में भेजा, जहां ईएनटी स्पेशलिस्ट ने जांच की और दवाएं लिख दीं। तीनों पीड़ितों ने बताया कि वे तीन घंटे से अस्पताल में भटक रहे थे लेकिन कोई भी उन्हें न तो सलाह दे रहा था और न की काउंसलिंग ही कर रहा था। फिलहाल इमरजेंसी में डॉक्टर ने उन्हें देखकर दवाएं लेने की सलाह दी है। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें कोरोना का संदेह नहीं है, क्योंकि न तो उनकी ऐसी कोई ट्रैवेल हिस्ट्री है और न ही वे किसी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए हैं। हंगरी हाई रिस्क वाली सूची से बाहर है। इसके बाद तीनों ने राहत की सांस ली।
आए थे कोरोेना की जांच कराने, डॉक्टर बोले-कल आना
बृहस्पतिवार को एक निजी अस्पताल से भी दो मरीजों को कोरोना वायरस का संक्रमण होने की आशंका जताते हुए जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग पहुंचे दोनों मरीजों से डॉक्टरों ने कल आने के लिए कहा या इमरजेंसी में दिखाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों मरीज बिना जांच कराए लौट गए।
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कोट
जो मरीज आए थे उनकी औपचारिक जांच करवा दी गई है। किसी में कोरोना के लक्षण नहीं थे और न ही उनकी ऐसी हिस्ट्री थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संक्रामक रोग विभाग में स्क्रीनिंग और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कोरोना संदिग्धों को सैकड़ों मरीजों की भीड़ के बीच ओपीडी में न भेजा जाए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
डा. रविंद्र राणा, सीएमएस एमएमजी अस्पताल
विदेशों से आने वाले लोगों को यदि कोरोना का संदेह है तो उन्हें संक्रामक रोग विभाग के कंट्रोल रूम में फोन करके सूचना देनी चाहिए। उनकी जांच और काउंसलिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पहुंचेगी। उन्हें अस्पताल आने की जरूरत नहीं है। निजी अस्पतालों से भी किसी मरीज में उसकी हिस्ट्री और लक्षण के आधार पर ही कोरोना टेस्ट की सलाह देनी चाहिए और मामले में कोरोना कंट्रोल रूम फोन करके सूचना देनी चाहिए।
डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। कोरोना की सही जानकारी न होने के चलते जिले के लोगों में डर बना हुआ हैे। इसकी सही जानकारी कोई लेना चाहे तो इसके लिए भी उचित व्यवस्था नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी डरे हुए लोगों को और डरा रही है। बृहस्पतिवार को जिला एमएमजी अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। चार दिन पूर्व हंगरी से लौटे दो युवक और एक युवती कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचे थे लेकिन तीन घंटे तक वे संक्रामक रोग विभाग और ओपीडी के बीच ही भटकते रहे। वहीं, एक निजी अस्पताल से भी दो मरीजों को कोरोना संदिग्ध मानते हुए एमएमजी भेजा गया। उन्हें भी संक्रामक रोग विभाग से ओपीडी में दिखाने की सलाह देकर रवाना कर दिया गया।
शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले छह लोग हंगरी में जॉब करते हैं। सभी लोग रविवार को ही लौट आए। यहां आने के बाद से एक युवती और दो युवकों को जुकाम व गले में खराश और सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है। उन्होंने निजी डॉक्टर को दिखाया और उपचार शुरू किया। डॉक्टर ने उन्हें जिला अस्पताल स्थित संक्रामक रोग विभाग पहुंचकर कोरोना संबंधी जांच करवाने की सलाह दी। तीनों बृहस्पतिवार को जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की ओर से इमरजेंसी में बने हेल्प डेस्क पर उन्होंने परेशानी बताई। हेल्प डेस्क से उन्हें संक्रामक रोग विभाग भेज दिया गया। पीड़ितों ने बताया कि संक्रामक रोग विभाग से उन्हें ओपीडी में दिखाने की सलाह दी गई। ओपीडी में डॉक्टर ने उन्हें देखने से मना कर इमरजेंसी में जाने की सलाह दी। तीनों फिर से हेल्प डेस्क पहुंचे। जहां से उन्हें ओपीडी में बैठने वाले दूसरे डॉक्टर के पास भेजा गया लेकिन उस डॉक्टर ने भी उन्हें वापस कर दिया। इसके बाद हेल्प डेस्क के कर्मचारी उन्हें अस्पताल के सीएमएस के पास लेकर पहुंचीं तब तक दो बज चुके थे और ओपीडी बंद हो चुकी। सीएमएस ने तीनों को इमरजेंसी में भेजा, जहां ईएनटी स्पेशलिस्ट ने जांच की और दवाएं लिख दीं। तीनों पीड़ितों ने बताया कि वे तीन घंटे से अस्पताल में भटक रहे थे लेकिन कोई भी उन्हें न तो सलाह दे रहा था और न की काउंसलिंग ही कर रहा था। फिलहाल इमरजेंसी में डॉक्टर ने उन्हें देखकर दवाएं लेने की सलाह दी है। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें कोरोना का संदेह नहीं है, क्योंकि न तो उनकी ऐसी कोई ट्रैवेल हिस्ट्री है और न ही वे किसी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए हैं। हंगरी हाई रिस्क वाली सूची से बाहर है। इसके बाद तीनों ने राहत की सांस ली।
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आए थे कोरोेना की जांच कराने, डॉक्टर बोले-कल आना
बृहस्पतिवार को एक निजी अस्पताल से भी दो मरीजों को कोरोना वायरस का संक्रमण होने की आशंका जताते हुए जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग पहुंचे दोनों मरीजों से डॉक्टरों ने कल आने के लिए कहा या इमरजेंसी में दिखाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों मरीज बिना जांच कराए लौट गए।
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जो मरीज आए थे उनकी औपचारिक जांच करवा दी गई है। किसी में कोरोना के लक्षण नहीं थे और न ही उनकी ऐसी हिस्ट्री थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संक्रामक रोग विभाग में स्क्रीनिंग और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कोरोना संदिग्धों को सैकड़ों मरीजों की भीड़ के बीच ओपीडी में न भेजा जाए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
डा. रविंद्र राणा, सीएमएस एमएमजी अस्पताल
विदेशों से आने वाले लोगों को यदि कोरोना का संदेह है तो उन्हें संक्रामक रोग विभाग के कंट्रोल रूम में फोन करके सूचना देनी चाहिए। उनकी जांच और काउंसलिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पहुंचेगी। उन्हें अस्पताल आने की जरूरत नहीं है। निजी अस्पतालों से भी किसी मरीज में उसकी हिस्ट्री और लक्षण के आधार पर ही कोरोना टेस्ट की सलाह देनी चाहिए और मामले में कोरोना कंट्रोल रूम फोन करके सूचना देनी चाहिए।
डा. एनके गुप्ता, सीएमओ