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ठगी के शिकार ने ठग बनकर 500 लोगों को ठगा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 01:36 AM IST
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गिरफ्तार आरोपी। - फोटो : GHAZIABAD City
ठगी के शिकार ने ठग बनकर 500 लोगों को ठगा
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए नंदग्राम पुलिस ने मोदीनगर निवासी सरगना अतुल बैंसला और बागपत निवासी उसके सहयोगी अंकुर शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक 12वीं पास अतुल के साथ दिल्ली में नौकरी के नाम पर 20 हजार रुपये की ठगी हुई थी। जिसके बाद उसने भी नौकरी के बहाने लोगों को ठगने के लिए पांच महीने पहले कॉल सेंटर खोल लिया। इस दौरान 500 लोगों से करीब 20 लाख की ठगी का अनुमान है।
सीओ द्वितीय अवनीश कुमार ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन स्थित वीवीआईपी सोसायटी के पीछे मेगा मार्केट में किराए की दुकान में कॉल सेंटर चल रहा था। मोदीनगर के सौंदा रोड देवनगर निवासी अतुल बैंसला ने अपने मेरठ निवासी रिश्तेदार के साथ कॉल सेंटर शुरू किया था। बाद में थाना खेकड़ा, बागपत के मुबारिकपुर निवासी अंकुर शर्मा को भी कॉल सेंटर में सहयोगी बना लिया। लोगों से ठगी गई रकम तीनों में बांटी जाती थी। आरोपियों के कब्जे से आईफोन समेत 5 मोबाइल बरामद हुए हैं। वहीं, मेरठ निवासी फरार आरोपी की तलाश की जा रही है।
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कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों ने की थी शिकायत
कॉल सेंटर में काम करने वाली तीन युवतियों ने नंदग्राम पुलिस से शिकायत की थी कि दो महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। साथ ही यह जानकारी भी दी कि उनसे रोजाना सैकड़ों लोगों को फोन कराकर नौकरी के नाम पर उनके दस्तावेज मंगाए जाते हैं और फिर रकम ट्रांसफर कराई जाती है। लेकिन आज तक एक भी व्यक्ति को इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया।
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प्रतिष्ठित जॉब साइट से लेते थे आवेदकों का डाटा
पुलिस के अनुसार प्रतिष्ठित जॉब साइट से आवेदकों का डाटा लेकर उन्हें कॉल कराई जाती और विभिन्न कंपनियों और विभागों में नौकरी का झांसा देकर रकम ऐंठी जाती थी। एक पीड़ित से प्लेसमेंट चार्ज, इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 3 से 5 हजार रुपये लिए जाते थे।

दिल्ली से जुड़े हैं कॉल सेंटर के तार
पुलिस के अनुसार फर्जी कॉल सेंटर के ताल दिल्ली के एक कॉल सेंटर से जुड़े हैं। वहां से भी लोगों का डाटा मुहैया कराया जाता था। इसके अलावा पकड़े गए कॉल सेंटर में नौकरी के नाम भी युवतियों को ठगा जाता था। दो महीना नौकरी कराने के बाद सरगना उन्हें हटा देता था। आरोपियों ने दिल्ली में बैठे अपने सहयोगियों के नाम भी बताए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
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