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गर्भनाल और स्टेम सेल से बहरेपन का इलाज
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बधिरपन का इलाज के दौरान मरीज से बातचीत करते डॉ बीपी त्यागी
- फोटो : GHAZIABAD City
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गर्भनाल और स्टेम सेल से बहरेपन का इलाज
गाजियाबाद। शहर का शोर और अधिक देर तक मोबाइल पर बात करने से न सिर्फ सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि समझने में दिक्कत होती है। इलाज की आधुनिक तकनीक से बधिरपन का इलाज भी आसान हो गया है। स्टीम सेल थेरेपी व बच्चे के गर्भनाल से जन्मजात बधिरता का इलाज आसान हो गया है। तीन मार्च वर्ल्ड हियरिंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हियरिंग केयर फॉर ऑल थीम रखी है।
गंभीर अवस्था में कान में अचानक दर्द व भारीपन होता है। बुखार, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी होने लगती है। कई बार कान बहने लगता है। इसके बाद दर्द में आराम मिलता है। गंभीर अवस्था में प्राय: दर्द नहीं होता है। इसमें कान बार-बार कुछ समय के लिए या लगातार बहता है, सुनाई कम देने लगता है। हड्डी गलाने वाली स्थिति कोलेस्टिएटोमा से कान से बदबू आने लगती है। एक दिन में सबसे अधिक कान का ऑपरेशन करने पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दो बार नाम दर्ज करा चुके वरिष्ठ नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी ने स्टेम सेल थेरेपी से इलाज शुरू किया है। वह बिना कान के ऊपरी हिस्से को हटाए अंदर गली हुई कान की हड्डी बदलने का ऑपरेशन भी कर रहे हैं। चार साल पहले इस विधि से इलाज शुरू किया था और अब तक तीन सौ लोगों का इलाज कर चुके हैं। डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि मरीज का प्लेटलेट्स व प्लाज्मा लेकर एक इंजेेक्शन तैयार किया जाता है। इसके बाद मरीज को लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई जन्मजात बधिर रहता है तो 12 इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है। इसमें 99 फीसदी सुनने की क्षमता में सुधार हो जाता है। अगर मरीज में किसी कारण से बाद में बधिरता बढ़ गई हो तो उसे चार इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है। जुकाम भी परेशान कर सकता है। जुकाम रहने पर नाक से कान तक जाने वाली यूस्टेशियन ट्यूब कार्य करना बंद कर देती है, जिससे पर्दे के पीछे दबाव असामान्य हो जाता है। वहां सूजन आने लगती है। इसके बाद कई बार पर्दे में छेद हो जाता है, जो कुछ में स्थायी रह जाता है।
बच्चे के गर्भनाल से भी दूर होती है बधिरता
अगर किसी बच्चे का गर्भनाल प्रिजर्व किया गया हो तो उसकी सेल से 120 गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलती है। इनमें बधिरपन का भी इलाज है। डॉ. त्यागी ने बताया कि अब तक गर्भनाल से 25 लोगों का इलाज कर चुके हैं। इनमें से एक मरीज गाजियाबाद के 55 वर्षीय व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे की गर्भनाल से डीएनए का मिलान होने पर दादा-दादी व नाना-नानी का भी इलाज हो जाता है।
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अमेरिका से इलाज कराने पहुंचे गाजियाबाद
गाजियाबाद। अमेरिका के लास वेगास में वाहन चलाने वाले 52 वर्षीय सरदार निमतेज सिंह बधिरपन का इलाज गाजियाबाद में करा रहे हैं। मूलरूप से फगवाड़ा, पंजाब के रहने वाले निमतेज 40 साल से अमेरिका में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में शिक्षक ने पढ़ाते समय चांटा मार दिया था, जिससे कान का पर्दा फट गया था। उन्होंने बताया कि नेट पर सर्च करने के बाद इलाज कराने के लिए अस्पताल में आ गए। अस्पताल में स्टेम सेल थेरेपी से इलाज करा रहा हूं। इलाज के बाद अब सुनाई देने लगा है।
इकलौती बेटी सुनने लगी, होती है खुशी
शास्त्रीनगर निवासी प्रतीक मिश्रा एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी इकलौती तीन वर्षीय बेटी को बचपन से ही सुनाई नहीं देता था। प्रतीक ने बताया कि छह महीने पहले बच्ची कोई भी बात सुनती नहीं थी, दिसंबर से स्टेम सेल थेरेपी करा रहे हैं। दो इंजेक्शन पहले लग चुके थे। मंगलवार को तीसरा इंजेक्शन लगाया गया। उन्होंने बताया कि अब बच्ची बेहतर तरीके से सुनती और समझती है।
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गाजियाबाद। शहर का शोर और अधिक देर तक मोबाइल पर बात करने से न सिर्फ सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि समझने में दिक्कत होती है। इलाज की आधुनिक तकनीक से बधिरपन का इलाज भी आसान हो गया है। स्टीम सेल थेरेपी व बच्चे के गर्भनाल से जन्मजात बधिरता का इलाज आसान हो गया है। तीन मार्च वर्ल्ड हियरिंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हियरिंग केयर फॉर ऑल थीम रखी है।
गंभीर अवस्था में कान में अचानक दर्द व भारीपन होता है। बुखार, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी होने लगती है। कई बार कान बहने लगता है। इसके बाद दर्द में आराम मिलता है। गंभीर अवस्था में प्राय: दर्द नहीं होता है। इसमें कान बार-बार कुछ समय के लिए या लगातार बहता है, सुनाई कम देने लगता है। हड्डी गलाने वाली स्थिति कोलेस्टिएटोमा से कान से बदबू आने लगती है। एक दिन में सबसे अधिक कान का ऑपरेशन करने पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दो बार नाम दर्ज करा चुके वरिष्ठ नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी ने स्टेम सेल थेरेपी से इलाज शुरू किया है। वह बिना कान के ऊपरी हिस्से को हटाए अंदर गली हुई कान की हड्डी बदलने का ऑपरेशन भी कर रहे हैं। चार साल पहले इस विधि से इलाज शुरू किया था और अब तक तीन सौ लोगों का इलाज कर चुके हैं। डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि मरीज का प्लेटलेट्स व प्लाज्मा लेकर एक इंजेेक्शन तैयार किया जाता है। इसके बाद मरीज को लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई जन्मजात बधिर रहता है तो 12 इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है। इसमें 99 फीसदी सुनने की क्षमता में सुधार हो जाता है। अगर मरीज में किसी कारण से बाद में बधिरता बढ़ गई हो तो उसे चार इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ती है। जुकाम भी परेशान कर सकता है। जुकाम रहने पर नाक से कान तक जाने वाली यूस्टेशियन ट्यूब कार्य करना बंद कर देती है, जिससे पर्दे के पीछे दबाव असामान्य हो जाता है। वहां सूजन आने लगती है। इसके बाद कई बार पर्दे में छेद हो जाता है, जो कुछ में स्थायी रह जाता है।
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बच्चे के गर्भनाल से भी दूर होती है बधिरता
अगर किसी बच्चे का गर्भनाल प्रिजर्व किया गया हो तो उसकी सेल से 120 गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलती है। इनमें बधिरपन का भी इलाज है। डॉ. त्यागी ने बताया कि अब तक गर्भनाल से 25 लोगों का इलाज कर चुके हैं। इनमें से एक मरीज गाजियाबाद के 55 वर्षीय व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे की गर्भनाल से डीएनए का मिलान होने पर दादा-दादी व नाना-नानी का भी इलाज हो जाता है।
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अमेरिका से इलाज कराने पहुंचे गाजियाबाद
गाजियाबाद। अमेरिका के लास वेगास में वाहन चलाने वाले 52 वर्षीय सरदार निमतेज सिंह बधिरपन का इलाज गाजियाबाद में करा रहे हैं। मूलरूप से फगवाड़ा, पंजाब के रहने वाले निमतेज 40 साल से अमेरिका में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में शिक्षक ने पढ़ाते समय चांटा मार दिया था, जिससे कान का पर्दा फट गया था। उन्होंने बताया कि नेट पर सर्च करने के बाद इलाज कराने के लिए अस्पताल में आ गए। अस्पताल में स्टेम सेल थेरेपी से इलाज करा रहा हूं। इलाज के बाद अब सुनाई देने लगा है।
इकलौती बेटी सुनने लगी, होती है खुशी
शास्त्रीनगर निवासी प्रतीक मिश्रा एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी इकलौती तीन वर्षीय बेटी को बचपन से ही सुनाई नहीं देता था। प्रतीक ने बताया कि छह महीने पहले बच्ची कोई भी बात सुनती नहीं थी, दिसंबर से स्टेम सेल थेरेपी करा रहे हैं। दो इंजेक्शन पहले लग चुके थे। मंगलवार को तीसरा इंजेक्शन लगाया गया। उन्होंने बताया कि अब बच्ची बेहतर तरीके से सुनती और समझती है।