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रात में महिला अस्पताल में नहीं होती सिजेरियन डिलीवरी
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जिला महिला अस्पताल।
- फोटो : GHAZIABAD City
रात में महिला अस्पताल में नहीं होती सिजेरियन डिलीवरी
गाजियाबाद। बीस करोड़ की लागत से बने पांच मजिला महिला अस्पताल में रात में सिजेरियन डिलीवरी नहीं की जाती है, इसलिए अस्पताल में प्रसव कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में लोगों को रात में प्रसव के लिए प्राइवेट अस्पताल या दिल्ली भागना पड़ता है। अस्पताल में प्रतिदिन प्रसव के लिए 15 से 20 महिलाएं अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन इनमें से आठ से दस महिलाओं को यह कहकर रेफर कर दिया जाता है कि अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर नहीं हैं। कई तीमारदार अस्पताल के स्टाफ पर दुर्व्यवहार और सुविधा शुल्क मांगने का भी आरोप लगा चुके हैं। कमोवेश यही स्थिति संयुक्त अस्पताल में भी है।
ऑपरेशन बताकर किया रेफर, हुआ सामान्य प्रसव
पटेल नगर निवासी रामवीर प्राइवेट गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी आशा देवी को प्रसव पीड़ा हुई तो वह महिला अस्पताल में ले गए। वहां पर 16 फरवरी रात 9:40 बजे भर्ती कराया, लेकिन दो घंटे बाद यह कहकर रेफर कर दिया गया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। यहां पर सुविधा नहीं है, इसलिए किसी अन्य सेंटर पर ले जाओ। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराने पर आशा ने सामान्य प्रसव से बेटे को जन्म दिया। अब मां-बेटे दोनों स्वस्थ हैं। रामवीर ने आरोप लगाया कि भर्ती के दौरान अस्पताल का स्टाफ मरीज के तीमारदारों से पैसे की मांग करता है, जो पैसे नहीं देते हैं, उनसे स्टॉफ बदतमीजी करता है। रामवीर ने बताया कि अस्पताल से रेफर करने पर एंबुलेंस भी नहीं दी गई, इसके बाद 102 पर फोन करने पर एबुुंलेंस आई तो जीटीबी ले गए।
पांच माह की गर्भवती पत्नी का हो गया गर्भपात
मुजफ्फरनगर के विशाल गाजियाबाद में एक सिक्योरिटी कंपनी में सुरक्षा गार्ड हैं। उनकी पत्नी कविता दूसरी बार में पांच महीने की गर्भवती थीं। महिला अस्पताल में 16 जनवरी को 1:54 बजे दोपहर में भर्ती कराया, लेकिन रात 8:40 बजे उन्हें यह कहते हुए रेफर कर दिया गया कि यहां पर सुविधा नहीं है। विशाल पत्नी को दिल्ली ले गए, वहां पर भर्ती करने के बाद भी बच्चा पेट में मर गया। विशाल ने आरोप लगाया कि अगर डॉक्टर सही से इलाज करते तो बच्चा बच जाता। उन्होंने बताया कि पहली बार भी ढाई माह में गर्भपात हो गया था।
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हर रात पांच से छह महिलाएं होती रेफर
यह परेशानी सिर्फ आशा व कविता की नहीं थी। बल्कि 19 फरवरी की शाम 4:55 बजे साहिबाबाद की बिंदु को भर्ती किया, लेकिन एनिमिक बताकर रात में ही चलता कर दिया। 22 फरवरी को गुलफ्शा को 12:15 बजे भर्ती किया, रात में ही एनीमिक बताकर रेफर किया गया। रुबीना को दोपहर में भर्ती किया, लेकिन रात 8.10 बजे रेफर कर दिया। जानकारों का कहना है कि हर रात चार से छह महिलाओं को रेफर किया जाता है। रात में बेहोशी का डॉक्टर न होने का बहाना बना दिया जाता है कि बिना एनेस्थेटिस्ट रात में सिजेरियन कराना संभव नहीं हो पाता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है, लेकिन रात में ऑपरेशन नहीं किए जाते हैं। सिर्फ उन्हीं लोगों को रेफर किया जाता है, जिसे रात में तत्काल सिजेरियन की जरूरत होती है। यहीं नहीं अगर किसी महिला को बच्चेदानी में रसौली की परेशानी होती है तो उसे यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है कि अस्पताल में सर्जन नहीं हैं।
सीएमएस, महिला अस्पताल डॉ. संगीता गोयल ने कहा कि सिर्फ उन्हीं महिलाओं को रेफर किया जाता है, जिनको रात में तत्काल सिजेरियन की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में सिर्फ दो एनेस्थेटिस्ट हैं। दोनों सुबह आठ से शाम आठ बजे तक सिजेरियन कराते हैं। एक एनेस्थेटिस्ट और सर्जन की कमी है। शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इसके अलावा एनजीओ से भी संपर्क किया जा रहा है, जिससे ऑपरेशन की सुविधा मिल सके।
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गाजियाबाद। बीस करोड़ की लागत से बने पांच मजिला महिला अस्पताल में रात में सिजेरियन डिलीवरी नहीं की जाती है, इसलिए अस्पताल में प्रसव कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में लोगों को रात में प्रसव के लिए प्राइवेट अस्पताल या दिल्ली भागना पड़ता है। अस्पताल में प्रतिदिन प्रसव के लिए 15 से 20 महिलाएं अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन इनमें से आठ से दस महिलाओं को यह कहकर रेफर कर दिया जाता है कि अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर नहीं हैं। कई तीमारदार अस्पताल के स्टाफ पर दुर्व्यवहार और सुविधा शुल्क मांगने का भी आरोप लगा चुके हैं। कमोवेश यही स्थिति संयुक्त अस्पताल में भी है।
ऑपरेशन बताकर किया रेफर, हुआ सामान्य प्रसव
पटेल नगर निवासी रामवीर प्राइवेट गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी आशा देवी को प्रसव पीड़ा हुई तो वह महिला अस्पताल में ले गए। वहां पर 16 फरवरी रात 9:40 बजे भर्ती कराया, लेकिन दो घंटे बाद यह कहकर रेफर कर दिया गया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। यहां पर सुविधा नहीं है, इसलिए किसी अन्य सेंटर पर ले जाओ। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराने पर आशा ने सामान्य प्रसव से बेटे को जन्म दिया। अब मां-बेटे दोनों स्वस्थ हैं। रामवीर ने आरोप लगाया कि भर्ती के दौरान अस्पताल का स्टाफ मरीज के तीमारदारों से पैसे की मांग करता है, जो पैसे नहीं देते हैं, उनसे स्टॉफ बदतमीजी करता है। रामवीर ने बताया कि अस्पताल से रेफर करने पर एंबुलेंस भी नहीं दी गई, इसके बाद 102 पर फोन करने पर एबुुंलेंस आई तो जीटीबी ले गए।
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पांच माह की गर्भवती पत्नी का हो गया गर्भपात
मुजफ्फरनगर के विशाल गाजियाबाद में एक सिक्योरिटी कंपनी में सुरक्षा गार्ड हैं। उनकी पत्नी कविता दूसरी बार में पांच महीने की गर्भवती थीं। महिला अस्पताल में 16 जनवरी को 1:54 बजे दोपहर में भर्ती कराया, लेकिन रात 8:40 बजे उन्हें यह कहते हुए रेफर कर दिया गया कि यहां पर सुविधा नहीं है। विशाल पत्नी को दिल्ली ले गए, वहां पर भर्ती करने के बाद भी बच्चा पेट में मर गया। विशाल ने आरोप लगाया कि अगर डॉक्टर सही से इलाज करते तो बच्चा बच जाता। उन्होंने बताया कि पहली बार भी ढाई माह में गर्भपात हो गया था।
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हर रात पांच से छह महिलाएं होती रेफर
यह परेशानी सिर्फ आशा व कविता की नहीं थी। बल्कि 19 फरवरी की शाम 4:55 बजे साहिबाबाद की बिंदु को भर्ती किया, लेकिन एनिमिक बताकर रात में ही चलता कर दिया। 22 फरवरी को गुलफ्शा को 12:15 बजे भर्ती किया, रात में ही एनीमिक बताकर रेफर किया गया। रुबीना को दोपहर में भर्ती किया, लेकिन रात 8.10 बजे रेफर कर दिया। जानकारों का कहना है कि हर रात चार से छह महिलाओं को रेफर किया जाता है। रात में बेहोशी का डॉक्टर न होने का बहाना बना दिया जाता है कि बिना एनेस्थेटिस्ट रात में सिजेरियन कराना संभव नहीं हो पाता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है, लेकिन रात में ऑपरेशन नहीं किए जाते हैं। सिर्फ उन्हीं लोगों को रेफर किया जाता है, जिसे रात में तत्काल सिजेरियन की जरूरत होती है। यहीं नहीं अगर किसी महिला को बच्चेदानी में रसौली की परेशानी होती है तो उसे यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है कि अस्पताल में सर्जन नहीं हैं।
सीएमएस, महिला अस्पताल डॉ. संगीता गोयल ने कहा कि सिर्फ उन्हीं महिलाओं को रेफर किया जाता है, जिनको रात में तत्काल सिजेरियन की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में सिर्फ दो एनेस्थेटिस्ट हैं। दोनों सुबह आठ से शाम आठ बजे तक सिजेरियन कराते हैं। एक एनेस्थेटिस्ट और सर्जन की कमी है। शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इसके अलावा एनजीओ से भी संपर्क किया जा रहा है, जिससे ऑपरेशन की सुविधा मिल सके।