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फ्लैट खरीदते वक्त देख लें सोसायटी
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ghaziabad news
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फ्लैट खरीदते वक्त देख लें सोसायटी का पूर्णता प्रमाणपत्र
गाजियाबाद। जीडीए के जोन-दो को छोड़कर अन्य सात जोन में बनी अधिकांश ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में सालों बाद भी मानक पूरे न होने का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। तय नक्शे के तहत काम न होने का परिणाम है कि निजी विकासकर्ता आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट से काम चला रहे हैं। जीडीए ने साल 2010 से 2019 तक विभिन्न क्षेत्रों में 127 ग्रुप हाउसिग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। इन सभी सोसायटियों में बने 894 टावर में 75,112 फ्लैट का निर्माण हुआ। इसके बावजूद बीते एक दशक में केवल 10 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों ने पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया।
पूर्णता प्रमाणपत्र न लेने का प्रमुख कारण ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में अधूरे पड़े काम हैं। वहीं, 127 में से 43 ग्रुप हाउसिंग सोसायटी ने आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया है। आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाली सोसायटियों में बने 162 टावर में 19127 आवंटी रह रहे हैं। महानगर की अधिकांश सोसायटियों में पार्क, पार्किंग, मानकों के तहत लिफ्ट, हरित एरिया सहित तमाम काम अधूरे पड़े हुए हैं। पानी, सफाई के साथ रखरखाव कार्यों को लेकर सोसायटियों में बिल्डर और आवंटियों के बीच विवाद आम बात हो गया है। आवंटी लगातार अधूरे पड़े काम को पूरा कराने की मांग करते रहते हैं। बड़े पैमाने पर अधूरे पड़े कार्य बिल्डर द्वारा पूर्णता प्रमाणपत्र न लेने की मुख्य वजह है। लोगों की लगातार शिकायतों के बावजूद जीडीए बिल्डरों पर कार्रवाई से बचता है।
आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र को बनाया बचाव का जरिया
जीडीए की आंशिक पूर्णता प्रमाण;पत्र की सुविधा का निजी विकासकर्ता गलत फायदा उठा रहे हैं। महानगर में तमाम बिल्डरों ने आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र के आधार पर 43 सोसायटियों में आवंटियों को फ्लैट का पजेशन दे दिया। इन सोसायटियों में लोगों को रहते हुए पांच साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बिल्डर ने अब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। महानगर में सर्वाधिक ग्रुप हाउसिंग सोसायटी क्रॉसिंग रिपब्लिक और राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक में 38 ग्रुप हाउसिग सोसायटी में से शून्य और राजनगर एक्सटेंशन में 31 सोसायटी में से चार ने आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया है। शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के 54 फीसदी फ्लैट इन दोनों क्षेत्रों में बने हुए हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक और राजनगर एक्सटेंशन में विभिन्न सोसायटी में 526 टॉवरों में 40683 फ्लैट हैं।
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केवल 23 सोसायटियों में आरडब्ल्यूए का गठन
विभिन्न ग्रुप हाउसिग सोसायटियों में अधूरे काम के साथ आरडब्ल्यूए का गठन न होने की वजह से आवंटियों और बिल्डर के बीच विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्राधिकरण रिकॉर्ड के मुताबिक केवल 23 सोसायटी में आरडब्ल्यूए का गठन हुआ है। क्रॉसिंग रिपब्लिक, भोपुरा और लोनी क्षेत्र में बनी किसी सोसायटी में आरडब्ल्यूए गठित नहीं हुई है। राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 18 सोसाटियों में आरडब्ल्यूए गठित हैं।
शमन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की है रोक
शासन की ओर से लाई गई शमन योजना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इसी के चलते पूर्णता प्रमाण-पत्र पर कार्रवाई को लेकर जीडीए के हाथ बंधे हुए हैं। कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में बिल्डरों ने नक्शे के अनुरूप विकास पूरे नहीं कराए हैं। ऐसे बिल्डरों को जीडीए पूर्णता प्रमाण पत्र तब तक जारी नहीं कर सकता, जब तक काम पूरे नहीं होते। नक्शे से अधिक निर्माण पर बिल्डरों को शमन शुल्क भी जमा करना पड़ेगा। ऐसे में जीडीए के साथ बिल्डरों को भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। जीडीए सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि शमन योजना पर हाईकोर्ट की रोक लगी हुई है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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गाजियाबाद। जीडीए के जोन-दो को छोड़कर अन्य सात जोन में बनी अधिकांश ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में सालों बाद भी मानक पूरे न होने का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। तय नक्शे के तहत काम न होने का परिणाम है कि निजी विकासकर्ता आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट से काम चला रहे हैं। जीडीए ने साल 2010 से 2019 तक विभिन्न क्षेत्रों में 127 ग्रुप हाउसिग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। इन सभी सोसायटियों में बने 894 टावर में 75,112 फ्लैट का निर्माण हुआ। इसके बावजूद बीते एक दशक में केवल 10 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों ने पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया।
पूर्णता प्रमाणपत्र न लेने का प्रमुख कारण ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में अधूरे पड़े काम हैं। वहीं, 127 में से 43 ग्रुप हाउसिंग सोसायटी ने आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया है। आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाली सोसायटियों में बने 162 टावर में 19127 आवंटी रह रहे हैं। महानगर की अधिकांश सोसायटियों में पार्क, पार्किंग, मानकों के तहत लिफ्ट, हरित एरिया सहित तमाम काम अधूरे पड़े हुए हैं। पानी, सफाई के साथ रखरखाव कार्यों को लेकर सोसायटियों में बिल्डर और आवंटियों के बीच विवाद आम बात हो गया है। आवंटी लगातार अधूरे पड़े काम को पूरा कराने की मांग करते रहते हैं। बड़े पैमाने पर अधूरे पड़े कार्य बिल्डर द्वारा पूर्णता प्रमाणपत्र न लेने की मुख्य वजह है। लोगों की लगातार शिकायतों के बावजूद जीडीए बिल्डरों पर कार्रवाई से बचता है।
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आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र को बनाया बचाव का जरिया
जीडीए की आंशिक पूर्णता प्रमाण;पत्र की सुविधा का निजी विकासकर्ता गलत फायदा उठा रहे हैं। महानगर में तमाम बिल्डरों ने आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र के आधार पर 43 सोसायटियों में आवंटियों को फ्लैट का पजेशन दे दिया। इन सोसायटियों में लोगों को रहते हुए पांच साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बिल्डर ने अब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। महानगर में सर्वाधिक ग्रुप हाउसिंग सोसायटी क्रॉसिंग रिपब्लिक और राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक में 38 ग्रुप हाउसिग सोसायटी में से शून्य और राजनगर एक्सटेंशन में 31 सोसायटी में से चार ने आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र लिया है। शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के 54 फीसदी फ्लैट इन दोनों क्षेत्रों में बने हुए हैं। क्रॉसिंग रिपब्लिक और राजनगर एक्सटेंशन में विभिन्न सोसायटी में 526 टॉवरों में 40683 फ्लैट हैं।
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केवल 23 सोसायटियों में आरडब्ल्यूए का गठन
विभिन्न ग्रुप हाउसिग सोसायटियों में अधूरे काम के साथ आरडब्ल्यूए का गठन न होने की वजह से आवंटियों और बिल्डर के बीच विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्राधिकरण रिकॉर्ड के मुताबिक केवल 23 सोसायटी में आरडब्ल्यूए का गठन हुआ है। क्रॉसिंग रिपब्लिक, भोपुरा और लोनी क्षेत्र में बनी किसी सोसायटी में आरडब्ल्यूए गठित नहीं हुई है। राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 18 सोसाटियों में आरडब्ल्यूए गठित हैं।
शमन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की है रोक
शासन की ओर से लाई गई शमन योजना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इसी के चलते पूर्णता प्रमाण-पत्र पर कार्रवाई को लेकर जीडीए के हाथ बंधे हुए हैं। कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में बिल्डरों ने नक्शे के अनुरूप विकास पूरे नहीं कराए हैं। ऐसे बिल्डरों को जीडीए पूर्णता प्रमाण पत्र तब तक जारी नहीं कर सकता, जब तक काम पूरे नहीं होते। नक्शे से अधिक निर्माण पर बिल्डरों को शमन शुल्क भी जमा करना पड़ेगा। ऐसे में जीडीए के साथ बिल्डरों को भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। जीडीए सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि शमन योजना पर हाईकोर्ट की रोक लगी हुई है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।