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वेव सिटी कार्यालय पर किसानों ने जड़ा ताला, दिया धरना
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हाइटेक सिटी अधिकारियों के द्वारा क्षेत्र के प्रभावित किसानों की वार्ता नहीं होने पर आक्रोशित कि
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वेव सिटी कार्यालय पर किसानों ने जड़ा ताला, दिया धरना
मसूरी। इंटीग्रेटेड हाईटेक टाउनशिप में वेव सिटी से प्रभावित किसानों ने बिल्डर के एनएच-9 से लगे कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ताला जड़ दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों के साथ महिलाएं ताला लगाने के बाद गेट पर धरने पर बैठ गए। किसान बिल्डर के पुलिस व्यवस्था न होने का हवाला देकर बुधवार को होने वाली वार्ता स्थगित करने से नाराज थे। हंगामा प्रदर्शन के बाद पहुंचे पुलिस बल और जीडीए ओएसडी सुशील कुमार चौबे ने किसानों को समझाकर गेट का ताला खुलवाया।
जीडीए ओएसडी ने किसानों को 10 फरवरी को चुनाव के बाद वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। तब जाकर किसानों का गुस्सा शांत हुआ। घटना के वक्त मसूरी थाना का पुलिस बल तैनात रहा। किसान नेता प्रदीप शर्मा, लोकेश नागर, जीत पाल नागर, रूपम यादव व अमित चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दो दिन के अंदर लिखित में वार्ता की तिथि निर्धारित नहीं होती है तो अब आरपार की लड़ाई शुरू होगी। अब बिल्डर से किसानों की बंद कमरे में वार्ता नहीं होगी। धरने में महेंद्र प्रधान, नितिन नागर, सोनू प्रधान, आशीष गुर्जर व पाली सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
दूसरी ओर वेव समूह के प्रवक्ता का कहना है कि हमने समझौते के तहत ज्यादातर बिंदुओं को लागू कर दिया है। कुछ बिंदुओं को किसानों और विनियामक मुद्दों का अनुपालन नहीं किए जाने के कारण लागू नहीं किया जा सका है। समझौते के तहत विकास कार्यों में किसानों द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने पर समझौता निरस्त होने का भी प्रावधान है। हमें उम्मीद है कि सभी पक्षों द्वारा समझौते की प्रतिबद्धता को पूरा कर लिया जाए तो इसका समाधान जल्द से जल्द हो जाएगा।
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मसूरी। इंटीग्रेटेड हाईटेक टाउनशिप में वेव सिटी से प्रभावित किसानों ने बिल्डर के एनएच-9 से लगे कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ताला जड़ दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों के साथ महिलाएं ताला लगाने के बाद गेट पर धरने पर बैठ गए। किसान बिल्डर के पुलिस व्यवस्था न होने का हवाला देकर बुधवार को होने वाली वार्ता स्थगित करने से नाराज थे। हंगामा प्रदर्शन के बाद पहुंचे पुलिस बल और जीडीए ओएसडी सुशील कुमार चौबे ने किसानों को समझाकर गेट का ताला खुलवाया।
जीडीए ओएसडी ने किसानों को 10 फरवरी को चुनाव के बाद वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। तब जाकर किसानों का गुस्सा शांत हुआ। घटना के वक्त मसूरी थाना का पुलिस बल तैनात रहा। किसान नेता प्रदीप शर्मा, लोकेश नागर, जीत पाल नागर, रूपम यादव व अमित चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दो दिन के अंदर लिखित में वार्ता की तिथि निर्धारित नहीं होती है तो अब आरपार की लड़ाई शुरू होगी। अब बिल्डर से किसानों की बंद कमरे में वार्ता नहीं होगी। धरने में महेंद्र प्रधान, नितिन नागर, सोनू प्रधान, आशीष गुर्जर व पाली सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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दूसरी ओर वेव समूह के प्रवक्ता का कहना है कि हमने समझौते के तहत ज्यादातर बिंदुओं को लागू कर दिया है। कुछ बिंदुओं को किसानों और विनियामक मुद्दों का अनुपालन नहीं किए जाने के कारण लागू नहीं किया जा सका है। समझौते के तहत विकास कार्यों में किसानों द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने पर समझौता निरस्त होने का भी प्रावधान है। हमें उम्मीद है कि सभी पक्षों द्वारा समझौते की प्रतिबद्धता को पूरा कर लिया जाए तो इसका समाधान जल्द से जल्द हो जाएगा।
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