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Ghaziabad News: हाईकोर्ट का आदेश छुपाकर १० साल से नौकरी करता रहा ग्राम विकास अधिकारी
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11 साल तक फर्जी तरीके से नौकरी करता रहा वीडीओ, बर्खास्त
गाजियाबाद। हाईकोर्ट के आदेश को छुपाकर मुरादनगर क्षेत्र में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) अरविंद त्यागी फर्जी तरीके से 11 साल से विभाग में नौकरी करता रहा। जिला विकास अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारियों के स्थायीकरण के लिए पुरानी फाइलें खंगाली तो ग्राम सचिव का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। जिला विकास अधिकारी ने उसे बर्खास्त कर दिया है। इस अवधि में लिए गए वेतन की रिकवरी भी करने की तैयारी की जा रही है।
मूलरूप से मेरठ के रहने वाले अरविंद त्यागी की भर्ती 1993 में मेरठ में जिला स्तरीय समिति ने की थी। उस वक्त ग्राम विकास अधिकारी के 16 पद खाली थे और आवेदन 20 दावेेदारों ने किए थे। जिला विकास अधिकारी राम उदरेज यादव ने बताया कि बाद में नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर समिति बना दी गई। इस समिति की ओर से जारी लिस्ट में उनका नाम नहीं था। इसके बाद नौकरी से हटा दिया गया था। इस फैसले के विरोध में अरविंद त्यागी वर्ष 1995 में हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश पर उन्हें तब तक के लिए नौकरी पर दोबारा रख लिया गया था, जब तक कि कोर्ट से कोई अंतिम फैसला नहीं आता। 2012 में हाईकोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाकर अरविंद त्यागी की याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन हाईकोर्ट का यह आदेश उन्होंने विभाग में न तो जमा किया और न ही शासन से कोई निर्देश मिले। अरविंद त्यागी की नियुक्ति मेरठ से हुई थी, इसलिए गाजियाबाद में उनकी नियुक्ति निरस्त होने का कोर्ट का कोई आदेश नहीं मिला। अब ग्राम सचिव की सेवा समाप्त कर दी गई है।
ऐसे चला फर्जीवाड़े का पता
बीते साल शासन ने जिला विकास अधिकारी को आदेश दिया था कि जिन ग्राम विकास अधिकारियों का स्थायीकरण नहीं हो पाया और उनकी नौकरी दो साल से ज्यादा की हो गई है तो उन्हें स्थायी किया जाए। इसके बाद जिले में तैनात अस्थायी ग्राम विकास अधिकारियों का ब्योरा खंगाला गया। जिला विकास अधिकारी ने बताया कि अरविंद त्यागी के बारे में पता चला कि वह लंबे समय से अस्थायी नियुक्ति पर काम कर रहे हैं। इसकी तह तक पहुंचा गया तो जानकारी मिली कि हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर नियुक्ति की गई थी। इस केस से संबंधित हाईकोर्ट के सभी आदेश ऑनलाइन पोर्टल से निकाले गए तो पता चला कि हाईकोर्ट वर्ष 2012 में ही अरविंद त्यागी की याचिका को खारिज कर चुका था। ऐसे में उनकी नियुक्ति को अवैध माना गया।
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रिटायरमेंट में एक साल बचा था बाकी
ग्राम विकास अधिकारी के पद पर करीब 30 साल तक नौकरी कर चुके अरविंद त्यागी के रिटायरमेंट में महज एक साल बाकी था। स्थानीय अधिकारियों और शासन के अधिकारियों ने कभी इसका संज्ञान नहीं लिया। जिला विकास अधिकारी राम उदरेज यादव ने बताया कि अरविंद त्यागी को तीन बार अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए गए लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। 2012 से मौजूदा समय तक उन्हें दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।
मैं हाईकोर्ट जाऊंगा : अरविंद त्यागी
ग्राम विकास अधिकारी के पद से बर्खास्त किए गए अरविंद त्यागी का कहना है कि उन्हें 2012 में आए हाईकोर्ट के आदेश की कोई जानकारी नहीं थी। 1997 में उनकी ट्रेनिंग कराकर उनकी तैनाती मुरादनगर क्षेत्र में की गई थी। यहां भी उन्होंने एक साल का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने जिला विकास अधिकारी से कुछ समय की मोहलत मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। उनका कहना है कि बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ वह हाईकोर्ट जाएंगे।
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गाजियाबाद। हाईकोर्ट के आदेश को छुपाकर मुरादनगर क्षेत्र में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) अरविंद त्यागी फर्जी तरीके से 11 साल से विभाग में नौकरी करता रहा। जिला विकास अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारियों के स्थायीकरण के लिए पुरानी फाइलें खंगाली तो ग्राम सचिव का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। जिला विकास अधिकारी ने उसे बर्खास्त कर दिया है। इस अवधि में लिए गए वेतन की रिकवरी भी करने की तैयारी की जा रही है।
मूलरूप से मेरठ के रहने वाले अरविंद त्यागी की भर्ती 1993 में मेरठ में जिला स्तरीय समिति ने की थी। उस वक्त ग्राम विकास अधिकारी के 16 पद खाली थे और आवेदन 20 दावेेदारों ने किए थे। जिला विकास अधिकारी राम उदरेज यादव ने बताया कि बाद में नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर समिति बना दी गई। इस समिति की ओर से जारी लिस्ट में उनका नाम नहीं था। इसके बाद नौकरी से हटा दिया गया था। इस फैसले के विरोध में अरविंद त्यागी वर्ष 1995 में हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश पर उन्हें तब तक के लिए नौकरी पर दोबारा रख लिया गया था, जब तक कि कोर्ट से कोई अंतिम फैसला नहीं आता। 2012 में हाईकोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाकर अरविंद त्यागी की याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन हाईकोर्ट का यह आदेश उन्होंने विभाग में न तो जमा किया और न ही शासन से कोई निर्देश मिले। अरविंद त्यागी की नियुक्ति मेरठ से हुई थी, इसलिए गाजियाबाद में उनकी नियुक्ति निरस्त होने का कोर्ट का कोई आदेश नहीं मिला। अब ग्राम सचिव की सेवा समाप्त कर दी गई है।
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ऐसे चला फर्जीवाड़े का पता
बीते साल शासन ने जिला विकास अधिकारी को आदेश दिया था कि जिन ग्राम विकास अधिकारियों का स्थायीकरण नहीं हो पाया और उनकी नौकरी दो साल से ज्यादा की हो गई है तो उन्हें स्थायी किया जाए। इसके बाद जिले में तैनात अस्थायी ग्राम विकास अधिकारियों का ब्योरा खंगाला गया। जिला विकास अधिकारी ने बताया कि अरविंद त्यागी के बारे में पता चला कि वह लंबे समय से अस्थायी नियुक्ति पर काम कर रहे हैं। इसकी तह तक पहुंचा गया तो जानकारी मिली कि हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर नियुक्ति की गई थी। इस केस से संबंधित हाईकोर्ट के सभी आदेश ऑनलाइन पोर्टल से निकाले गए तो पता चला कि हाईकोर्ट वर्ष 2012 में ही अरविंद त्यागी की याचिका को खारिज कर चुका था। ऐसे में उनकी नियुक्ति को अवैध माना गया।
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रिटायरमेंट में एक साल बचा था बाकी
ग्राम विकास अधिकारी के पद पर करीब 30 साल तक नौकरी कर चुके अरविंद त्यागी के रिटायरमेंट में महज एक साल बाकी था। स्थानीय अधिकारियों और शासन के अधिकारियों ने कभी इसका संज्ञान नहीं लिया। जिला विकास अधिकारी राम उदरेज यादव ने बताया कि अरविंद त्यागी को तीन बार अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए गए लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। 2012 से मौजूदा समय तक उन्हें दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।
मैं हाईकोर्ट जाऊंगा : अरविंद त्यागी
ग्राम विकास अधिकारी के पद से बर्खास्त किए गए अरविंद त्यागी का कहना है कि उन्हें 2012 में आए हाईकोर्ट के आदेश की कोई जानकारी नहीं थी। 1997 में उनकी ट्रेनिंग कराकर उनकी तैनाती मुरादनगर क्षेत्र में की गई थी। यहां भी उन्होंने एक साल का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने जिला विकास अधिकारी से कुछ समय की मोहलत मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। उनका कहना है कि बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ वह हाईकोर्ट जाएंगे।