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चाहत थी बेटे की, पैदा हुई बेटी तो छोड़ गए अनाथालय में

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 03 Oct 2022 12:54 AM IST
सार

चाहत थी बेटे की, पैदा हुई बेटी तो छोड़ गए अनाथालय मेंगाजियाबाद।मासूम को मां के आंचल और पिता के प्यार से सिर्फ इसलिए वंचित कर दिया गया क्योंकि वह बेटी है।लेकिन, यह बदनसीबी इस अकेली बच्ची की नहीं है।दिल पर पत्थर रखकर मां बेटी को छोड़ने के लिए राजी हो गई।

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विस्तार

चाहत थी बेटे की, पैदा हुई बेटी तो छोड़ गए अनाथालय में
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गाजियाबाद। हमारी पहले से तीन बेटियां थीं, हमारी चाहत थी कि एक बेटा हो जाए लेकिन चौथी संतान भी बेटी हो गई। परिवार में कोई भी इसे रखने के लिए राजी नहीं है, भारी कलह हो रही है, आप इसे अनाथालय में रख लीजिए.... यह कहते हुए विजय नगर के दंपती ने चार माह की बेटी को सौंप दिया और चले गए। मासूम को मां के आंचल और पिता के प्यार से सिर्फ इसलिए वंचित कर दिया गया क्योंकि वह बेटी है।
लेकिन, यह बदनसीबी इस अकेली बच्ची की नहीं है। गोविंदपुरम स्थित अनाथालय घरौंदा में पिछले डेढ़ साल में कुल 22 बच्चे छोड़े गए हैं। इनमें 19 बेटियां हैं। सब बेटियों की कहानी लगभग एक जैसी ही है। शहीद नगर के दंपती भी आठ माह की चौथी बेटी को छोड़ गए। वजह पूछने पर पिता ने सिर्फ इतना कहा, चार बेटियों का बोझ नहीं उठा सकता। डासना के दंपती के छठी संतान बेटी हुई। उसके दो माह की होते ही घरोंदा में छोड़ दिया। दंपती की पहले से चार बेटियां और एक बेटा है। उनकी चाहत थी कि एक और बेटा हो जाए।
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घरोंदा की अध्यक्ष कनिका गौतम बताती हैं कि अनाथालय लगभग 12 साल से चल रहा है। यहां 250 बच्चे छोड़े गए हैं। इनमें 95 फीसदी से ज्यादा बेटियां हैं। बेटा वे लोग छोड़ जाते हैं जिनके पहले से कई बेटे हों और गरीबी के कारण पालन-पोषण में परेशानी आ रही हो। बेटियां छोड़ने वाले वे लोग हैं जो चाहते बेटा हैं, लेकिन पैदा बेटी होती है।
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बेटी को छोड़ो या तलाक ले लो
शहर से ही एक मामला ऐसा भी आया जिसमें तीन बेटियां होने पर पति ने पत्नी से कहा कि या तो बेटी को अनाथालय भेजने के लिए राजी हो जाओ या फिर तलाक ले लो। दिल पर पत्थर रखकर मां बेटी को छोड़ने के लिए राजी हो गई। बेटी को सौंपते समय उसकी आंख में आंसू रुक नहीं रहे थे लेकिन पति के सामने वह बेबस थी।

लावारिस बच्चों में भी बेटियां ज्यादा
घरोंदा में पिछले डेढ़ साल में 19 लावारिस बच्चे लाए गए हैं। कोई झाड़ी में मिला तो कोई सड़क किनारे। इनमें 18 लड़कियां हां और चार लड़के। सिर्फ यही नहीं। कई बेटियों को जन्म ही नहीं लेने दिया जा रहा। पिछले दो साल में दस मामले लिंग भ्रूण परीक्षण के पकड़े गए हैं। ऐसे भी केस में जिनमें गर्भ में बेटी होने का पता चलने पर गर्भपात करा दिया गया।
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