{"_id":"6324d1af93245738e970ca31","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd2446448115","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़-सा हौसला : पति की मौत के बाद ट्रक और अब पिंक बस चलाएंगी प्रियंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़-सा हौसला : पति की मौत के बाद ट्रक और अब पिंक बस चलाएंगी प्रियंका
सार
पहाड़-सा हौसला : पति की मौत के बाद ट्रक और अब पिंक बस चलाएंगी प्रियंका साहिबाबाद।पति को बचाने के लिए प्रियंका ने दिन-रात एक कर दिए मगर वह हाथ नहीं आए।2020 में उनकी मौत हो गई।इसलिए लिया चालक बनने का फैसलाप्रियंका बताती हैं कि पति के बीमार पड़ने पर उन्होंने फैक्टरी में काम करना शुरू किया।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पहाड़-सा हौसला : पति की मौत के बाद ट्रक और अब पिंक बस चलाएंगी प्रियंका
साहिबाबाद। कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... इसी का ही जीता जागता उदाहरण प्रियंका कुमारी हैं। पति की मौत के बाद उनकी जिंदगी में तमाम मुश्किलें आईं लेकिन वह घबराई नहीं। हिम्मत के साथ सामना कर रही हैं। परिवार को पालने के लिए पहले ट्रक की स्टेयरिंग थामी, अब उनका चयन उप्र रोडवेज में हो गया है। प्रशिक्षण के बाद कौशांबी डिपो की पिंक बस चलाएंगी।
प्रियंका कुमारी मूलरूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं। 8वीं पास प्रियंका दिल्ली के शालीमार बाग में रहती हैं। उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा 10 साल और बड़ा बेटा 12 साल का है। उप्र रोडवेज में चयन के बाद पहले कानपुर में ट्रेनिंग दी गई। अब कौशांबी डिपो में चालक का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह रोजाना सुबह दिल्ली से कौशांबी आती हैं और शाम को घर वापस जाती हैं। तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद वह पिंक बस चलाएंगी। प्रियंका कौशांबी बस डिपो की पहली महिला बस ड्राइवर होंगी। शुरुआती 10 महीने तक वह किसी पुरुष ड्राइवर के साथ रहेंगी।
2020 में हुई थी पति की मौत
प्रियंका ने बताया कि उनके पति 2015 में बीमार पड़े थे। इलाज में घर भी बिक गया। पति को बचाने के लिए प्रियंका ने दिन-रात एक कर दिए मगर वह हाथ नहीं आए। 2020 में उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
इसलिए लिया चालक बनने का फैसला
प्रियंका बताती हैं कि पति के बीमार पड़ने पर उन्होंने फैक्टरी में काम करना शुरू किया। कम पढ़ी लिखी होने की वजह से ज्यादा वेतन नहीं मिलता था। इसके बाद चाय बेचकर घर का खर्च चलाने की कोशिश कीए लेकिन पति का इलाज और बच्चों का खर्च नहीं निकल पा रहा था। किसी ने सलाह दी कि ड्राइविंग में अच्छे पैसे मिल जाएंगे। इसके बाद ड्राइविंग सीखने का फैसला किया। प्रियंका ने ड्राइविंग सीखने के बाद ट्रक चलाना शुरू किया। राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल समेत कई राज्यों में लंबे रूट पर ड्राइविंग की।
पिंक बस में महिला चालक और परिचालक रहेंगी
रोडवेज की ओर से महिला यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पिंक सेवा बस चलाई जा रही है। कौशांबी रोडवेज के एआरएम शिव बालक ने बताया कि महिला यात्रियों की कम संख्या की वजह से अभी साथ में महिला यात्री के परिवार को भी चलने की अनुमति दी गई है। चालक और परिचालक की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पिंक बस सेवा में महिला चालक और परिचालक ही रहेंगी।
विज्ञापन
साहिबाबाद। कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... इसी का ही जीता जागता उदाहरण प्रियंका कुमारी हैं। पति की मौत के बाद उनकी जिंदगी में तमाम मुश्किलें आईं लेकिन वह घबराई नहीं। हिम्मत के साथ सामना कर रही हैं। परिवार को पालने के लिए पहले ट्रक की स्टेयरिंग थामी, अब उनका चयन उप्र रोडवेज में हो गया है। प्रशिक्षण के बाद कौशांबी डिपो की पिंक बस चलाएंगी।
प्रियंका कुमारी मूलरूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं। 8वीं पास प्रियंका दिल्ली के शालीमार बाग में रहती हैं। उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा 10 साल और बड़ा बेटा 12 साल का है। उप्र रोडवेज में चयन के बाद पहले कानपुर में ट्रेनिंग दी गई। अब कौशांबी डिपो में चालक का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह रोजाना सुबह दिल्ली से कौशांबी आती हैं और शाम को घर वापस जाती हैं। तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद वह पिंक बस चलाएंगी। प्रियंका कौशांबी बस डिपो की पहली महिला बस ड्राइवर होंगी। शुरुआती 10 महीने तक वह किसी पुरुष ड्राइवर के साथ रहेंगी।
विज्ञापन
2020 में हुई थी पति की मौत
प्रियंका ने बताया कि उनके पति 2015 में बीमार पड़े थे। इलाज में घर भी बिक गया। पति को बचाने के लिए प्रियंका ने दिन-रात एक कर दिए मगर वह हाथ नहीं आए। 2020 में उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
इसलिए लिया चालक बनने का फैसला
प्रियंका बताती हैं कि पति के बीमार पड़ने पर उन्होंने फैक्टरी में काम करना शुरू किया। कम पढ़ी लिखी होने की वजह से ज्यादा वेतन नहीं मिलता था। इसके बाद चाय बेचकर घर का खर्च चलाने की कोशिश कीए लेकिन पति का इलाज और बच्चों का खर्च नहीं निकल पा रहा था। किसी ने सलाह दी कि ड्राइविंग में अच्छे पैसे मिल जाएंगे। इसके बाद ड्राइविंग सीखने का फैसला किया। प्रियंका ने ड्राइविंग सीखने के बाद ट्रक चलाना शुरू किया। राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल समेत कई राज्यों में लंबे रूट पर ड्राइविंग की।
पिंक बस में महिला चालक और परिचालक रहेंगी
रोडवेज की ओर से महिला यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पिंक सेवा बस चलाई जा रही है। कौशांबी रोडवेज के एआरएम शिव बालक ने बताया कि महिला यात्रियों की कम संख्या की वजह से अभी साथ में महिला यात्री के परिवार को भी चलने की अनुमति दी गई है। चालक और परिचालक की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पिंक बस सेवा में महिला चालक और परिचालक ही रहेंगी।