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मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनियों को निगम से लेना होगा लाइसेंस
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मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनियों को निगम से लेना होगा लाइसेंस
गाजियाबाद। नगर निगम क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनियों को अब लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। आठ साल पहले जारी किए गए शासनादेश को नगर निगम ने लागू कर दिया है। इसके लिए उपविधि (बाइलाज) बना ली गई है। एक सप्ताह में गजट नोटिफिकेशन का प्रकाशन होने आने के बाद लाइसेंस शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। एक टावर के लिए कंपनी को 25 हजार रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क जमा कराना होगा।
निगम क्षेत्र में विभिन्न मोबाइल कंपनियों के 408 टावर हैं। इन्हें व्यावसायिक श्रेणी में माना गया है। वर्ष 2014 में शासन ने ऐसे टावर से लाइसेंस शुल्क लेने का आदेश जारी कर दिया था, लेकिन नगर निगम ने इसे लागू नहीं किया था। निगम अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंस शुल्क से निगम को सालाना 10 करोड़ से ज्यादा की आमदनी होगी।
बोर्ड से पास हो चुका प्रस्ताव
टावर लगाने वाली मोबाइल कंपनियों से लाइसेंस शुल्क लेने के लिए इसी साल जून में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो चुका है। जुलाई में गजट प्रकाशन के लिए उपविधि शासन को भेज दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि एक सप्ताह में गजट नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा।
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आठ साल तक शासनादेश दबाए रहे अधिकारी
लाइसेंस शुल्क वसूलने के लिए 30 जून 2014 को शासनादेश सभी नगर निगम को जारी किया गया था। प्रदेश के कई जिलों में टावरों को लाइसेंस शुल्क लिया जा रहा है लेकिन गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारी आठ साल तक शासनादेश को दबाए रखा।
केबल आपरेटर से भी लिया जाएगा लाइसेंस शुल्क
नगर निगम क्षेत्र में केबल ऑपरेटरों से भी लाइसेंस शुल्क लेने को हरी झंडी मिल गई है। 200 तक कनेक्शन देने वालों से पांच हजार रुपये सालाना और 200 से अधिक कनेक्शन देने वाले केबल आपरेटरों से 7000 रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा।
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गाजियाबाद। नगर निगम क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनियों को अब लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। आठ साल पहले जारी किए गए शासनादेश को नगर निगम ने लागू कर दिया है। इसके लिए उपविधि (बाइलाज) बना ली गई है। एक सप्ताह में गजट नोटिफिकेशन का प्रकाशन होने आने के बाद लाइसेंस शुल्क की वसूली के लिए नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। एक टावर के लिए कंपनी को 25 हजार रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क जमा कराना होगा।
निगम क्षेत्र में विभिन्न मोबाइल कंपनियों के 408 टावर हैं। इन्हें व्यावसायिक श्रेणी में माना गया है। वर्ष 2014 में शासन ने ऐसे टावर से लाइसेंस शुल्क लेने का आदेश जारी कर दिया था, लेकिन नगर निगम ने इसे लागू नहीं किया था। निगम अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंस शुल्क से निगम को सालाना 10 करोड़ से ज्यादा की आमदनी होगी।
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बोर्ड से पास हो चुका प्रस्ताव
टावर लगाने वाली मोबाइल कंपनियों से लाइसेंस शुल्क लेने के लिए इसी साल जून में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो चुका है। जुलाई में गजट प्रकाशन के लिए उपविधि शासन को भेज दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि एक सप्ताह में गजट नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा।
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आठ साल तक शासनादेश दबाए रहे अधिकारी
लाइसेंस शुल्क वसूलने के लिए 30 जून 2014 को शासनादेश सभी नगर निगम को जारी किया गया था। प्रदेश के कई जिलों में टावरों को लाइसेंस शुल्क लिया जा रहा है लेकिन गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारी आठ साल तक शासनादेश को दबाए रखा।
केबल आपरेटर से भी लिया जाएगा लाइसेंस शुल्क
नगर निगम क्षेत्र में केबल ऑपरेटरों से भी लाइसेंस शुल्क लेने को हरी झंडी मिल गई है। 200 तक कनेक्शन देने वालों से पांच हजार रुपये सालाना और 200 से अधिक कनेक्शन देने वाले केबल आपरेटरों से 7000 रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा।