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नरेंद्र मोदी ने दिया था वीरता पुरस्कार, अब प्रमाणपत्र भी नहीं बना रहे अधिकारी
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नरेंद्र मोदी ने दिया था वीरता पुरस्कार, अब प्रमाणपत्र भी नहीं बना रहे अधिकारी
गाजियाबाद। लोनी के रहने वाले राजीव सिंह पिछले तीन महीने से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। गुजरात में हुए एक अग्निकांड में वह चार बच्चों की जान बचाते हुए झुलस गए थे। इससे उनके कंधे और सीने पर काफी जख्म हो गए थे। सरकारी सहायता के लिए अब प्रमाणपत्र की जरूरत है। जिसकेलिए वह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। राजीव को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीरता पुरस्कार भी दिया था।
राजीव सिंह गुजरात में एम्स में काम करते थे। वर्ष 2009 में गुजरात में एक अग्निकांड के दौरान उन्होंने अपनी जान पर खेलकर चार बच्चों की जान बचाई थी। ऑटो में जाते वक्त उन्होंने देखा कि एक भवन में भयंकर आग लगी है। अंदर फंसे लोगों को बचाने कोई अंदर नहीं जा रहा था तो वह भीगा बोरा लपेटकर अंदर घुस गए और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जब वह बाहर निकलने लगे तो सीलिंग का एक बड़ा हिस्सा उनके ऊपर गिर गया। अस्पताल में उनका इलाज चला लेकिन छह महीने बाद इंफेक्शन होने की वजह से वह दिव्यांग हो गए। वह ठीक से खड़े नहीं हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्होंने दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बनवाया था लेकिन अब सरकारी सहायता के लिए प्रमाणपत्र चाहिए इसलिए वह स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। एसीएमओ डॉ. डीएम सक्सेना ने बताया कि उनका मेडिकल हो रहा है, जब सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो उनको प्रमाणपत्र मिल जाएगा। राजीव ने बताया कि उनकी बहादुरी के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वीरता पुरस्कार भी दिया था।
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गाजियाबाद। लोनी के रहने वाले राजीव सिंह पिछले तीन महीने से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। गुजरात में हुए एक अग्निकांड में वह चार बच्चों की जान बचाते हुए झुलस गए थे। इससे उनके कंधे और सीने पर काफी जख्म हो गए थे। सरकारी सहायता के लिए अब प्रमाणपत्र की जरूरत है। जिसकेलिए वह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। राजीव को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीरता पुरस्कार भी दिया था।
राजीव सिंह गुजरात में एम्स में काम करते थे। वर्ष 2009 में गुजरात में एक अग्निकांड के दौरान उन्होंने अपनी जान पर खेलकर चार बच्चों की जान बचाई थी। ऑटो में जाते वक्त उन्होंने देखा कि एक भवन में भयंकर आग लगी है। अंदर फंसे लोगों को बचाने कोई अंदर नहीं जा रहा था तो वह भीगा बोरा लपेटकर अंदर घुस गए और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जब वह बाहर निकलने लगे तो सीलिंग का एक बड़ा हिस्सा उनके ऊपर गिर गया। अस्पताल में उनका इलाज चला लेकिन छह महीने बाद इंफेक्शन होने की वजह से वह दिव्यांग हो गए। वह ठीक से खड़े नहीं हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्होंने दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बनवाया था लेकिन अब सरकारी सहायता के लिए प्रमाणपत्र चाहिए इसलिए वह स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। एसीएमओ डॉ. डीएम सक्सेना ने बताया कि उनका मेडिकल हो रहा है, जब सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो उनको प्रमाणपत्र मिल जाएगा। राजीव ने बताया कि उनकी बहादुरी के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वीरता पुरस्कार भी दिया था।
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