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मुख्यमंत्री के निरीक्षण को लेकर इमरजेंसी का मुख्य गेट रहा बंद
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मुख्यमंत्री के निरीक्षण को लेकर इमरजेंसी का मुख्य गेट रहा बंद
गाजियाबाद। मुख्यमंत्री द्वारा शनिवार को अस्पताल के संभावित निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी का मुख्य गेट बंद कर पूरे दिन दीवारों पर फाइबर सीट लगाने के अलावा बिजली के बोर्ड और तार दुरुस्त करने का काम चलता रहा। इस दौरान इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना था कि इमरजेंसी में मरम्मत का काम चल रहा था, इसलिए मुख्य गेट बंद कराया गया था। दूसरा गेट खोला गया था, किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं हुई।
इमरजेंसी का बदला लुक
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर इमरजेंसी के सभी पुराने बेड बदलकर नए बेड लगाए गए। सभी बेडों पर नई चादर बिछाई गई। मरीज या घायल के तीमारदार शिकायत न कर दें, इसलिए स्टाफ का व्यवहार भी बदला-बदला सा नजर आया। चतुर्थ श्रेणी स्टाफ और स्टाफ नर्स मरीज ही नहीं तीमारदारों से बेहतर व्यवहार करते दिखे।
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नोटिस जारी करने के बाद डॉक्टरों को दी हिदायत
एमएमजी अस्पताल में देर से आने वाले 21 डॉक्टरों को नोटिस जारी करने के दूसरे दिन सभी डॉक्टरों के साथ बैठक कर हिदायत दी गई कि इसके बाद अगर कोई डॉक्टर या स्टाफ आठ बजे के बाद अस्पताल पहुंचा तो संबंधित की रिपोर्ट शासन और प्रशासन को भेजी जाएगी। अगर किसी स्टाफ को अस्पताल आने में देरी होती है या नहीं आते हैं तो उसके बारे में समय से सूचना दी जाए, जिससे कि वैकल्पिक व्यवस्था किया जाए और मरीजों को कोई परेशानी न हो।
संयुक्त अस्पताल में नहीं है कोई सुधार
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे संयुक्त अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आ रहा है। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में काम करने वाला एक कर्मचारी अवकाश पर होने के बावजूद उसकी उपस्थिति रजिस्टर में लग रही है। इस बारे में अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। कर्मचारी के छुट्टी पर होने और उसकी हाजिरी लगने को लेकर अन्य कर्मचारियों में खासा रोष है।
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गाजियाबाद। मुख्यमंत्री द्वारा शनिवार को अस्पताल के संभावित निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी का मुख्य गेट बंद कर पूरे दिन दीवारों पर फाइबर सीट लगाने के अलावा बिजली के बोर्ड और तार दुरुस्त करने का काम चलता रहा। इस दौरान इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना था कि इमरजेंसी में मरम्मत का काम चल रहा था, इसलिए मुख्य गेट बंद कराया गया था। दूसरा गेट खोला गया था, किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं हुई।
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इमरजेंसी का बदला लुक
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर इमरजेंसी के सभी पुराने बेड बदलकर नए बेड लगाए गए। सभी बेडों पर नई चादर बिछाई गई। मरीज या घायल के तीमारदार शिकायत न कर दें, इसलिए स्टाफ का व्यवहार भी बदला-बदला सा नजर आया। चतुर्थ श्रेणी स्टाफ और स्टाफ नर्स मरीज ही नहीं तीमारदारों से बेहतर व्यवहार करते दिखे।
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नोटिस जारी करने के बाद डॉक्टरों को दी हिदायत
एमएमजी अस्पताल में देर से आने वाले 21 डॉक्टरों को नोटिस जारी करने के दूसरे दिन सभी डॉक्टरों के साथ बैठक कर हिदायत दी गई कि इसके बाद अगर कोई डॉक्टर या स्टाफ आठ बजे के बाद अस्पताल पहुंचा तो संबंधित की रिपोर्ट शासन और प्रशासन को भेजी जाएगी। अगर किसी स्टाफ को अस्पताल आने में देरी होती है या नहीं आते हैं तो उसके बारे में समय से सूचना दी जाए, जिससे कि वैकल्पिक व्यवस्था किया जाए और मरीजों को कोई परेशानी न हो।
संयुक्त अस्पताल में नहीं है कोई सुधार
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे संयुक्त अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं आ रहा है। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में काम करने वाला एक कर्मचारी अवकाश पर होने के बावजूद उसकी उपस्थिति रजिस्टर में लग रही है। इस बारे में अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। कर्मचारी के छुट्टी पर होने और उसकी हाजिरी लगने को लेकर अन्य कर्मचारियों में खासा रोष है।