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प्राइवेट हाथों में जाएगा शहर में कूड़ा उठाने का काम, निगम करेगा भुगतान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jul 2022 12:48 AM IST
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प्राइवेट हाथों में जाएगा शहर में कूड़ा उठाने का काम, निगम करेगा भुगतान
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गाजियाबाद। शहर में कूड़ा उठाने का काम अब नगर निगम नहीं करेगा। ढलाबघरों से उठाकर कूड़ा निस्तारण केंद्र तक कचरा पहुंचाने का काम अब प्राइवेट कंपनी करेगी। नगर निगम ने वसुंधरा जोन में ट्रायल के बाद अब चार अन्य जोन का कूड़ा उठाने का काम भी प्राइवेट कंपनी को देने का फैसला कर लिया है। नगर निगम इस प्राइवेट कंपनी को अपने डंपर, जेसीबी, लोडर समेत बड़े वाहन देने के साथ-साथ प्रति टन कचरा उठाने की एवज में 750 रुपये से 950 रुपये का भुगतान भी करेगा।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने ट्रायल के तौर पर वसुंधरा जोन से कूड़ा उठाने का काम करीब तीन माह पहले प्राइवेट कंपनी को दिया था। निगम अधिकारियों का दावा है कि यह ट्रायल सफल रहा और नगर निगम को डीजल व कर्मचारियों के वेतन पर होने वाले खर्च से कम रकम का भुगतान कंपनी को करना पड़ा। इसके बाद अब निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पूरे शहर में कूड़ा उठाकर निस्तारण केंद्र तक ले जाने का काम प्राइवेट कंपनी को देने की तैयारी कर रहे हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार का कहना है कि इसके लिए जारी किए गए टेंडर में दिल्ली से लेकर गुजरात तक की कंपनियों ने काम करने के लिए निविदा डाली हैं। सबसे कम दरों पर काम करने का प्रस्ताव देने वाली फर्म को कार्यादेश जारी किया जाएगा।
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पांच साल के लिए होगा ठेका, नए वाहन नहीं खरीदेगा निगम
नगर निगम की ओर से प्राइवेट कंपनी को कूड़ा उठाने का ठेका पांच साल के लिए दिया जाएगा। शर्तों के अनुसार इस अवधि में काम संतोषजनक रहा तो ठेके की अवधि दो साल और बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान नगर निगम प्राइवेट कंपनी को अपने मौजूदा वाहन देगा, इनकी मेंटेनेंस का जिम्मा प्राइवेट कंपनी पर होगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि इनमें से जो वाहन 10 साल की अवधि पूरी कर चलन से बाहर हो जाएगा, उसके बदले कंपनी अपना वाहन लगाएगी। नगर निगम कोई नया वाहन खरीदकर कंपनी को नहीं देगा।
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बीते साल सफाई पर 133 करोड़ रुपये हुए थे खर्च
नगर निगम का शहर की सफाई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 106.85 करोड़ रुपये, 2020-21 में 107 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बाद 2021-22 में 133 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें छह करोड़ रुपये वाहनों की मेंटेनेंस और मरम्मत पर खर्च किए। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि कूड़ा उठान ठेके पर दिए जाने के बाद नगर निगम का बजट काफी कम हो जाएगा।
रोजाना निकलता है 1250 मीट्रिक टन कचरा
शहर की करीब 25 लाख की आबादी में रोजाना तकरीबन 1250 से 1300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इस कचरे को निगम के वाहन घरों से कलेक्शन करके ढलाबघरों तक लाते हैं। यहां से यह कचरा निस्तारण केंद्र तक ले जाया जाएगा। नगर निगम इस कचरे की ढुलाई के लिए रोजाना करीब 10 लाख रुपये और महीने में करीब 3 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यानी कचरे की ढुलाई पर 36 करोड़ रपये खर्च किए जाएंगे।

सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट से कचरे को उठाकर निस्तारण केंद्र तक ले जाने का ठेका देने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली फर्मों के प्रस्तावों का अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही कार्यादेश जारी कर काम कंपनी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस कंपनी को पांचों जोन में 150 मीट्रिक टन का यार्ड भी बनाना होगा। - डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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