{"_id":"6278198f15e75975d7422131","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd238095824","type":"story","status":"publish","title_hn":"27 साल से निगम की सीमा में आए 35 गांवों में लागू हुआ गृहकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
27 साल से निगम की सीमा में आए 35 गांवों में लागू हुआ गृहकर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
27 साल से निगम की सीमा में आए 35 गांवों में लागू हुआ गृहकर
गाजियाबाद। नगर निगम की सीमा में 27 साल पहले शामिल हुए 35 गांवों में गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इन गांवों वाले वार्डों में अब गृहकर लागू कर दिया गया है। एक अप्रैल से लागू हुए टैक्स के बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब जून से इन गांवों के भवन मालिकों को भी नगर निगम में गृहकर जमा करना होगा। यानी करीब एक लाख से ज्यादा भवन मालिकों की जेब पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। निगम के अधिकारियों का दावा है कि गृहकर की वसूली बढ़ेगी तो इन गांवों में विकास कार्य भी ज्यादा कराए जाएंगे।
वर्ष 1995 में नगर निगम के गठन के दौरान गांवों को इसकी सीमा में शामिल किया गया था। इनमें से कई गांव अब पूरी तरह शहर में तब्दील हो चुके हैं और इनमें हाउस टैक्स का निर्धारण भी हो चुका है, लेकिन ग्रामीण परिवेश वाले अधिकांश वार्डों में नगर निगम हाउस टैक्स ही नहीं लागू कर पाया था। अब शहर में कराए गए जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) सर्वे के बाद इन ग्रामीण वार्डों के भवनों को गृहकर के दायरे में लाने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि ग्रामीण परिवेश के वार्डों में भी टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष से यहां भी टैक्स वसूली शुरू कर दी जाएगी। उनका कहना है कि टैक्स से होने वाली आमदनी बढ़ेगी तो शहर में विकास कार्य ज्यादा कराए जाएंगे।
इन क्षेत्रों में लगा हाउस टैक्स
दुहाई, मोरटा, सदरपुर, गुलधर, मैनापुर, नायफल, काजीपुरा, बयाना, महरौली, बम्हेटा, मकनपुर, मिर्जापुर, डूंडाहेड़ा, गढ़ी, सिकरोड़, मवई, अकबरपुर-बहरामपुर, नूरनगर, सद्दीकरनगर, सिहानी, अर्थला, पसौंडा, चिकंबरपुर, करहेड़ा, कडकड़ मॉडल, झंडापुर, महाराजपुर, घूकना, रइसपुर, रजापुर, नासिरपुर, कैला, जटवाड़ा, प्रहलादगढ़ी, हसनपुर भोवापुर और राजनगर एक्सटेंशन व क्रॉसिंग सिटी।
विज्ञापन
पार्षद बोले
वर्तमान समय में टैक्स देने से कोई इनकार नहीं कर रहा है, लेकिन नगर निगम को विकास कार्य तो कराने चाहिए। रइसपुर क्षेत्र में नगर निगम ने बीते साल 60 लाख के विकास कार्य पास किए थे। इनमें से सिर्फ 10 लाख के काम कराए गए हैं। गांवों से यह भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- मनोज चौधरी, पार्षद रईसपुर क्षेत्र
मैं अपने वार्ड में टैक्स लगाए जाने के लिए कई बार नगर निगम अधिकारियों से कह चुका हूं। जिन क्षेत्रों से नगर निगम को टैक्स मिल रहा है, अधिकारी वहां भी विकास कार्य नहीं करा रहे हैं।
- नरेश जाटव, पार्षद
विज्ञापन
गाजियाबाद। नगर निगम की सीमा में 27 साल पहले शामिल हुए 35 गांवों में गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इन गांवों वाले वार्डों में अब गृहकर लागू कर दिया गया है। एक अप्रैल से लागू हुए टैक्स के बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब जून से इन गांवों के भवन मालिकों को भी नगर निगम में गृहकर जमा करना होगा। यानी करीब एक लाख से ज्यादा भवन मालिकों की जेब पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। निगम के अधिकारियों का दावा है कि गृहकर की वसूली बढ़ेगी तो इन गांवों में विकास कार्य भी ज्यादा कराए जाएंगे।
वर्ष 1995 में नगर निगम के गठन के दौरान गांवों को इसकी सीमा में शामिल किया गया था। इनमें से कई गांव अब पूरी तरह शहर में तब्दील हो चुके हैं और इनमें हाउस टैक्स का निर्धारण भी हो चुका है, लेकिन ग्रामीण परिवेश वाले अधिकांश वार्डों में नगर निगम हाउस टैक्स ही नहीं लागू कर पाया था। अब शहर में कराए गए जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) सर्वे के बाद इन ग्रामीण वार्डों के भवनों को गृहकर के दायरे में लाने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि ग्रामीण परिवेश के वार्डों में भी टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष से यहां भी टैक्स वसूली शुरू कर दी जाएगी। उनका कहना है कि टैक्स से होने वाली आमदनी बढ़ेगी तो शहर में विकास कार्य ज्यादा कराए जाएंगे।
विज्ञापन
इन क्षेत्रों में लगा हाउस टैक्स
दुहाई, मोरटा, सदरपुर, गुलधर, मैनापुर, नायफल, काजीपुरा, बयाना, महरौली, बम्हेटा, मकनपुर, मिर्जापुर, डूंडाहेड़ा, गढ़ी, सिकरोड़, मवई, अकबरपुर-बहरामपुर, नूरनगर, सद्दीकरनगर, सिहानी, अर्थला, पसौंडा, चिकंबरपुर, करहेड़ा, कडकड़ मॉडल, झंडापुर, महाराजपुर, घूकना, रइसपुर, रजापुर, नासिरपुर, कैला, जटवाड़ा, प्रहलादगढ़ी, हसनपुर भोवापुर और राजनगर एक्सटेंशन व क्रॉसिंग सिटी।
विज्ञापन
पार्षद बोले
वर्तमान समय में टैक्स देने से कोई इनकार नहीं कर रहा है, लेकिन नगर निगम को विकास कार्य तो कराने चाहिए। रइसपुर क्षेत्र में नगर निगम ने बीते साल 60 लाख के विकास कार्य पास किए थे। इनमें से सिर्फ 10 लाख के काम कराए गए हैं। गांवों से यह भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- मनोज चौधरी, पार्षद रईसपुर क्षेत्र
मैं अपने वार्ड में टैक्स लगाए जाने के लिए कई बार नगर निगम अधिकारियों से कह चुका हूं। जिन क्षेत्रों से नगर निगम को टैक्स मिल रहा है, अधिकारी वहां भी विकास कार्य नहीं करा रहे हैं।
- नरेश जाटव, पार्षद