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लगातार दूसरी बार भाजपा का क्लीन स्वीप
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लगातार दूसरी बार भाजपा का क्लीन स्वीप
गाजियाबाद। भाजपा ने लगातार दूसरे विधान सभा चुनाव में जिले की पांचों सीटों पर शानदार जीत का परचम लहराया है। पीएम योगी और सीएम मोदी का जादू ऐसा चला कि सपा-रालोद गठबंधन, बसपा और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका। आजादी के बाद सिर्फ भाजपा ही लगातार दो चुनाव में क्लीन स्वीप कर पाई है। इस बार भगवा रंग और चटख हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार पहले से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर लखनऊ पहुंचे हैं।
चुनाव के दौरान माना जा रहा था कि सपा-रालोद गठबंधन से भाजपा को कड़ी टक्कर मिलेगी। खासकर मोदीनगर, मुरादनगर और लोनी में। ये तीनों सीटें देहात में आती हैं। तीनों ही जगह किसान आंदोलन का प्रभाव रहा था लेकिन चुनाव के नतीजों में इसका कुछ असर नहीं पड़ा। हर सीट पर भाजपा को एकतरफा जीत मिली। सुबह गोविंदपुर मंडी में मतगणना शुरू होने के बाद भाजपा ने एक बार बढ़त बनाई तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। भाजपा ने 2017 में जीते पांचों विधायकों पर भरोसा किया था। पांचों लगातार दूसरी बार विधान सभा पहुंचे हैं। पांचों सीटों पर गठबंधन दूसरे नंबर पर रहा। सदर से अतुल गर्ग ने विशाल वर्मा, साहिबाबाद से सुनील शर्मा ने अमरपाल शर्मा, मुरादनगर से अजीतपाल त्यागी ने सुरेंद्र कुमार मुन्नी, मोदीनगर से डॉ. मंजू शिवाच ने सुदेश शर्मा और लोनी से नंद किशोर गुर्जर ने मदन भैया को करारी शिकस्त दी।
आठ साल में भाजपा की सातवीं जीत
भाजपा ने इस बार की कामयाबी के साथ जीत का छक्का लगा दिया है। पहले 2014 में वीके सिंह रिकॉर्ड वोटों से लोकसभा चुनाव जीते थे। 2016 में जिला पंचायत में जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने पांचों सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया। 2017 में ही मेयर का चुनाव जीता। 2019 में एक बार फिर वीके सिंह जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2021 में जिला पंचायत में कमल खिला। अब सातवीं जीत विधान सभा चुनाव में दर्ज की है। राम लहर में भी भाजपा को कभी इतनी बड़ी जीत नहीं मिली थी जितनी इस बार मिली है।
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सुनील शर्मा को मिली सबसे बड़ी जीत
देश की सबसे बड़ी विधान सभा सीट साहिबाबाद के भाजपा उम्मीदवार सुनील शर्मा को सबसे बड़ी जीत मिली है। उन्होंने सपा के अमरपाल शर्मा को दो लाख 14 हजार 845 वोटों से हराया है। गाजियाबाद जिले के इतिहास में इससे पहले इतनी बड़ी जीत किसी को नहीं मिली है। अमरपाल शर्मा 2012 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2017 में वह कांग्रेस के टिकट से उतरे, लेकिन सुनील शर्मा से करीब डेढ़ लाख वोटों से हारे। इस बार सुनील शर्मा ने उन्हें और ज्यादा अंतर से मात दी।
बसपा, कांग्रेस, आप प्रत्याशियों की जमानत जब्त
चुनाव हारने वाले दलों में सिर्फ गठबंधन के उम्मीदवार जमानत बचा पाए। बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। बसपा के उम्मीदवार लोनी को छोड़कर चार सीटों पर तीसरे नंबर पर रहे। लोनी में निर्दलीय रंजीता धामा को तीसरा स्थान मिला। यहां बसपा चौथे पर रही। लोनी में कांग्रेस उम्मीदवार आम आदमी पार्टीए एआईएमआईएम और निर्दलीय उम्मीदवार से भी पीछे रहा। सदर सीट पर भी कांग्रेस चौथे नंबर पर रही।
बागी उम्मीदवारों नहीं गली दाल
सदर सीट पर भाजपा के बागी केके शुक्ला हाथी पर सवार होकर चुनाव मैदान में उतरे। उनकी जमानत जब्त हो गई। लोनी में पालिका चेयर पर्सन रंजीता धामा ने निर्दलीय लड़कर मोर्चा लिया, लेकिन उनकी जमानत भी न बच पाई। पार्षद पिंटू सिंह भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे। नहीं मिला तो सदर सीट से निर्दलीय कूद पड़े थे। उनकी जमानत भी नहीं बच पाई है। अन्य बागियों को भाजपा ने मना लिया था।
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गाजियाबाद। भाजपा ने लगातार दूसरे विधान सभा चुनाव में जिले की पांचों सीटों पर शानदार जीत का परचम लहराया है। पीएम योगी और सीएम मोदी का जादू ऐसा चला कि सपा-रालोद गठबंधन, बसपा और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका। आजादी के बाद सिर्फ भाजपा ही लगातार दो चुनाव में क्लीन स्वीप कर पाई है। इस बार भगवा रंग और चटख हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार पहले से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर लखनऊ पहुंचे हैं।
चुनाव के दौरान माना जा रहा था कि सपा-रालोद गठबंधन से भाजपा को कड़ी टक्कर मिलेगी। खासकर मोदीनगर, मुरादनगर और लोनी में। ये तीनों सीटें देहात में आती हैं। तीनों ही जगह किसान आंदोलन का प्रभाव रहा था लेकिन चुनाव के नतीजों में इसका कुछ असर नहीं पड़ा। हर सीट पर भाजपा को एकतरफा जीत मिली। सुबह गोविंदपुर मंडी में मतगणना शुरू होने के बाद भाजपा ने एक बार बढ़त बनाई तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। भाजपा ने 2017 में जीते पांचों विधायकों पर भरोसा किया था। पांचों लगातार दूसरी बार विधान सभा पहुंचे हैं। पांचों सीटों पर गठबंधन दूसरे नंबर पर रहा। सदर से अतुल गर्ग ने विशाल वर्मा, साहिबाबाद से सुनील शर्मा ने अमरपाल शर्मा, मुरादनगर से अजीतपाल त्यागी ने सुरेंद्र कुमार मुन्नी, मोदीनगर से डॉ. मंजू शिवाच ने सुदेश शर्मा और लोनी से नंद किशोर गुर्जर ने मदन भैया को करारी शिकस्त दी।
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आठ साल में भाजपा की सातवीं जीत
भाजपा ने इस बार की कामयाबी के साथ जीत का छक्का लगा दिया है। पहले 2014 में वीके सिंह रिकॉर्ड वोटों से लोकसभा चुनाव जीते थे। 2016 में जिला पंचायत में जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने पांचों सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया। 2017 में ही मेयर का चुनाव जीता। 2019 में एक बार फिर वीके सिंह जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2021 में जिला पंचायत में कमल खिला। अब सातवीं जीत विधान सभा चुनाव में दर्ज की है। राम लहर में भी भाजपा को कभी इतनी बड़ी जीत नहीं मिली थी जितनी इस बार मिली है।
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सुनील शर्मा को मिली सबसे बड़ी जीत
देश की सबसे बड़ी विधान सभा सीट साहिबाबाद के भाजपा उम्मीदवार सुनील शर्मा को सबसे बड़ी जीत मिली है। उन्होंने सपा के अमरपाल शर्मा को दो लाख 14 हजार 845 वोटों से हराया है। गाजियाबाद जिले के इतिहास में इससे पहले इतनी बड़ी जीत किसी को नहीं मिली है। अमरपाल शर्मा 2012 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2017 में वह कांग्रेस के टिकट से उतरे, लेकिन सुनील शर्मा से करीब डेढ़ लाख वोटों से हारे। इस बार सुनील शर्मा ने उन्हें और ज्यादा अंतर से मात दी।
बसपा, कांग्रेस, आप प्रत्याशियों की जमानत जब्त
चुनाव हारने वाले दलों में सिर्फ गठबंधन के उम्मीदवार जमानत बचा पाए। बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। बसपा के उम्मीदवार लोनी को छोड़कर चार सीटों पर तीसरे नंबर पर रहे। लोनी में निर्दलीय रंजीता धामा को तीसरा स्थान मिला। यहां बसपा चौथे पर रही। लोनी में कांग्रेस उम्मीदवार आम आदमी पार्टीए एआईएमआईएम और निर्दलीय उम्मीदवार से भी पीछे रहा। सदर सीट पर भी कांग्रेस चौथे नंबर पर रही।
बागी उम्मीदवारों नहीं गली दाल
सदर सीट पर भाजपा के बागी केके शुक्ला हाथी पर सवार होकर चुनाव मैदान में उतरे। उनकी जमानत जब्त हो गई। लोनी में पालिका चेयर पर्सन रंजीता धामा ने निर्दलीय लड़कर मोर्चा लिया, लेकिन उनकी जमानत भी न बच पाई। पार्षद पिंटू सिंह भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे। नहीं मिला तो सदर सीट से निर्दलीय कूद पड़े थे। उनकी जमानत भी नहीं बच पाई है। अन्य बागियों को भाजपा ने मना लिया था।