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३१ मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा चिपियाना आरओबी, अप्रैल से दौड़ेंगे वाहन
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31 मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा चिपियाना आरओबी, अप्रैल में दौड़ेंगे वाहन
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर चिपियाना में निर्माणाधीन आरओबी 31 मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा। अप्रैल में इस आरओबी पर वाहन दौड़ने लगेंगे। बृहस्पतिवार को एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने इस निर्माणाधीन आरओबी के गर्डर का निरीक्षण किया। एक सप्ताह में इस गर्डर को पिलर्स पर रखने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। देश के सबसे भारी 2272 टन वजनी गर्डर को पिलर्स पर शिफ्ट करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की चार लेन पर चिपियाना आरओबी का निर्माण पूरा न होने की वजह से अभी वाहन नहीं दौड़ पा रहे हैं। दिल्ली की ओर से तो सभी लेन पर वाहन दौड़ते हैं, लेकिन आरओबी पर आकर यह ट्रैफिक बाधित हो जाता है। छह लेन का ट्रैफिक सिर्फ दो लेन पर आकर सिमट जाता है। इसकी वजह से यहां अक्सर जाम लग जाता है। इसकी वजह से एनएचएआई दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी शुरू नहीं कर पा रहा है। ऐसे में अब एनएचएआई इस आरओबी का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराना चाहता है। चिपियाना में रेलवे ट्रैक के ऊपरी हिस्से पर एक्सप्रेसवे के हिस्से का निर्माण पूरा करने के लिए तैयार हो चुके गर्डर के नट बोल्ट कसने का काम चल रहा है। एक सप्ताह में इस स्पैन को रेलवे लाइन पर खिसकाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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बिना ब्लॉक लिए 15 मीटर खिसकाया जाएगा गर्डर
इस 2272 टन वजनी गर्डर को रेलवे लाइन के ऊपर रखने के लिए यूं तो रेल ट्रैफिक का ब्लॉक लिया जाएगा, लेकिन 15 मीटर ऐसा हिस्सा है जिस पर गर्डर खिसकाने के लिए ब्लॉक की जरूरत नहीं है। इस नॉन रेलवे हिस्से पर गर्डर को खिसकाने का काम अगले सप्ताह शुरू किया जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि तब तक रेलवे से ब्लॉक की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद बाकी हिस्से पर गर्डर खिसकाने का काम किया जाएगा। इसको खिसकाने के लिए भारी भरकम क्रेन मंगाई गई हैं।
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आरओबी बनने से ऐसे मिलेगी राहत
चिपियाना आरओबी का निर्माण एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से मेरठ जाने वाली सबसे किनारे की चार लेन पर किया जा रहा है। फिलहाल दिल्ली से आरओबी तक इन चार लेन पर ट्रैफिक दौड़ रहा है, लेकिन आरओबी पर आकर यह ट्रैफिक इनके बगल से गुजरने वाली दो लेन पर डायवर्ट कर दिया जाता है। निर्माणाधीन आरओबी के हिस्से को पार करके यानी करीब 125 मीटर आगे जाकर यह ट्रैफिक फिर किनारे की लेन पर शिफ्ट होकर गाजियाबाद लालकुआं तक पहुंचता है। इसकी वजह से वाहन चालक यहां आकर लेन भटक जाते हैं और लालकुआं की बजाय डासना की ओर जाने वाली लेन पर आगे निकल जाते हैं। आरओबी बनने के बाद लालकुआं आने वाले वाहन अपनी लेन में चलने लगेंगे और उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। वहीं जाम से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।
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आंकड़ों में आरओबी
कुल लंबाई 115 मीटर
गर्डर की ऊंचाई 13 मीटर
कैरिज वे की चौड़ाई 15 मीटर
फुटपाथ की चौड़ाई 2.5 मीटर
कुल वजन 2272.4 टन
गर्डर में लगे नटबोल्ट 90 टन
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बयान
आरओबी का गर्डर लांच करने का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही ब्लॉक मिलने की उम्मीद है। इसे 15 मीटर बिना ब्लॉक के खिसकाया जाएगा। अप्रैल में इस आरओबी पर वाहन दौड़ने लगेंगे। - अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर चिपियाना में निर्माणाधीन आरओबी 31 मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा। अप्रैल में इस आरओबी पर वाहन दौड़ने लगेंगे। बृहस्पतिवार को एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने इस निर्माणाधीन आरओबी के गर्डर का निरीक्षण किया। एक सप्ताह में इस गर्डर को पिलर्स पर रखने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। देश के सबसे भारी 2272 टन वजनी गर्डर को पिलर्स पर शिफ्ट करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की चार लेन पर चिपियाना आरओबी का निर्माण पूरा न होने की वजह से अभी वाहन नहीं दौड़ पा रहे हैं। दिल्ली की ओर से तो सभी लेन पर वाहन दौड़ते हैं, लेकिन आरओबी पर आकर यह ट्रैफिक बाधित हो जाता है। छह लेन का ट्रैफिक सिर्फ दो लेन पर आकर सिमट जाता है। इसकी वजह से यहां अक्सर जाम लग जाता है। इसकी वजह से एनएचएआई दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी शुरू नहीं कर पा रहा है। ऐसे में अब एनएचएआई इस आरओबी का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराना चाहता है। चिपियाना में रेलवे ट्रैक के ऊपरी हिस्से पर एक्सप्रेसवे के हिस्से का निर्माण पूरा करने के लिए तैयार हो चुके गर्डर के नट बोल्ट कसने का काम चल रहा है। एक सप्ताह में इस स्पैन को रेलवे लाइन पर खिसकाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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बिना ब्लॉक लिए 15 मीटर खिसकाया जाएगा गर्डर
इस 2272 टन वजनी गर्डर को रेलवे लाइन के ऊपर रखने के लिए यूं तो रेल ट्रैफिक का ब्लॉक लिया जाएगा, लेकिन 15 मीटर ऐसा हिस्सा है जिस पर गर्डर खिसकाने के लिए ब्लॉक की जरूरत नहीं है। इस नॉन रेलवे हिस्से पर गर्डर को खिसकाने का काम अगले सप्ताह शुरू किया जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि तब तक रेलवे से ब्लॉक की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद बाकी हिस्से पर गर्डर खिसकाने का काम किया जाएगा। इसको खिसकाने के लिए भारी भरकम क्रेन मंगाई गई हैं।
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आरओबी बनने से ऐसे मिलेगी राहत
चिपियाना आरओबी का निर्माण एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से मेरठ जाने वाली सबसे किनारे की चार लेन पर किया जा रहा है। फिलहाल दिल्ली से आरओबी तक इन चार लेन पर ट्रैफिक दौड़ रहा है, लेकिन आरओबी पर आकर यह ट्रैफिक इनके बगल से गुजरने वाली दो लेन पर डायवर्ट कर दिया जाता है। निर्माणाधीन आरओबी के हिस्से को पार करके यानी करीब 125 मीटर आगे जाकर यह ट्रैफिक फिर किनारे की लेन पर शिफ्ट होकर गाजियाबाद लालकुआं तक पहुंचता है। इसकी वजह से वाहन चालक यहां आकर लेन भटक जाते हैं और लालकुआं की बजाय डासना की ओर जाने वाली लेन पर आगे निकल जाते हैं। आरओबी बनने के बाद लालकुआं आने वाले वाहन अपनी लेन में चलने लगेंगे और उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। वहीं जाम से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।
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आंकड़ों में आरओबी
कुल लंबाई 115 मीटर
गर्डर की ऊंचाई 13 मीटर
कैरिज वे की चौड़ाई 15 मीटर
फुटपाथ की चौड़ाई 2.5 मीटर
कुल वजन 2272.4 टन
गर्डर में लगे नटबोल्ट 90 टन
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बयान
आरओबी का गर्डर लांच करने का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही ब्लॉक मिलने की उम्मीद है। इसे 15 मीटर बिना ब्लॉक के खिसकाया जाएगा। अप्रैल में इस आरओबी पर वाहन दौड़ने लगेंगे। - अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई