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सुसाइड नोट डकार छिपा गई पुलिस, राज खुला तो एक माह बाद 15 पर केस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 05 Apr 2021 01:40 AM IST
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Ghaziabad
सुसाइड नोट डकार छिपा गई पुलिस, राज खुला तो एक माह बाद 15 पर केस
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गाजियाबाद। तमाम आरोपों में घिरी रहने वाली पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। इस बार मसला विजयनगर पुलिस से जुड़ा है, जिसने सुंदरपुरी निवासी विनोद (23) द्वारा सुसाइड करने के बाद उसका सुसाइड डकार लिया। सुसाइड नोट में विनोद ने अपनी मौत के जिम्मेदार लोगों के नाम लिखए थे। परिजन चौकी या थाने जाते तो उन्हें टरका दिया जाता। थक हारकर परिजनों को एसपी सिटी से गुहार लगानी पड़ी तब जाकर घटना के 26 दिन बाद विजयनगर पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर 15 लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विजयनगर क्षेत्र में सुंदरपुरी निवासी ज्ञानचंद केचार बेटे हैं। तीसरे नंबर का 23 वर्षीय बेटा विनोद एक दुकान पर नौकरी कर गुजरा करता था। गत नौ मार्च की रात करीब साढ़े नौ बजे विनोद के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से देखने पर देखा तो विनोद पंखे पर डाले फंदे से लटका हुआ था। सूचना पर सेक्टर-9 विजयनगर चौकी की पुलिस बुलाई गई, जिसने दरवाजा तोड़ा। जब तक विनोद को फंदे से उतारा तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। कमरे में छानबीन में विनोद के मोबाइल के अलावा सुसाइड नोट भी मिला। सुसाइड नोट में उसने अपनी मौत के जिम्मेदार लोगों के नाम लिखे हुए थे। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा और विनोद का मोबाइल व सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर चली गई। गौर करने वाली बात यह है कि सुसाइड नोट मिलने और परिजनों द्वारा तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
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सिपाही बताते कि इंचार्ज कोर्ट में हैं, इंचार्ज खुद को लखनऊ बताते
विनोद के परिजनों ने पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरोपियों से साठगांठ के चलते ही पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की। जब भी वह चौकी पर जाते तो सिपाही कहते कि चौकी इंचार्ज कोर्ट गए हुए हैं। चौकी इंचार्ज को फोन किया जाता तो वह खुद को लखनऊ में बताते थे। इसी तरह उन्हें हर बार अलग-अलग जवाब मिला।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी भी 13 दिन बाद मिली
परिजनों का कहना है कि विनोद के आत्महत्या करने के बाद उन्हें उसका मृत्यु प्रमाणपत्र बनाना था। रिपोर्ट की कॉपी लेने के लिए भी उन्हें पुलिस के चक्कर काटने पड़े। काफी मिन्नतें करने पर घटना के 13 दिन बाद पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी दी। इसके अलावा भी पुलिस उनसे सीधे मुंह बात नहीं करती थी। थाने या चौकी जाने पर उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जाता था।

एसपी सिटी से शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज
ज्ञानचंद का कहना है कि उनके भतीजों व चचेरे भाइयों के साथ उनका मकान संबंधी विवाद चला आ रहा था। उक्त लोग अकसर उनके घर पर आकर गालीगलौज व झगड़ा करते थे, जिसके चलते परिवार में क्लेश चल रहा था। इसी क्लेश में विनोद ने आत्महत्या की। पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर परिजनों ने एसपी सिटी से गुहार लगाई। उनके आदेश से ही विजयनगर पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। केस में नईम खान, अनिल, सुनील, प्रवीन, वीरेंद्र, विद्या देवी, राजरानी, राजकुमार, ममता, पिंकी, ललित, प्रेम कुमार, अनिता, राहुल और नंदलाल को नामजद किया है।
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