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दरिंदगी का झूठा केस खारिज, पांच को क्लीनचिट
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दरिंदगी का झूठा केस खारिज, पांच को क्लीनचिट
गाजियाबाद। 56 लाख का मकान हड़पने के लिए निर्भया जैसी दरिंदगी की झूठी कहानी रचने वाली नर्स पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नर्स के भाई के कहने पर दर्ज कराए गए मुकदमे को पुलिस ने खारिज कर दिया। इसमें नामजद पांचों लोगों को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है। पुलिस नर्स और उसके करीबी दोस्त आजाद, अफजाल और गौरव को गिरफतार कर जेल भेज चुकी है। अब उनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
नर्स ने अपने भाई से साजिश के तहत कबीरनगर के मकान मालिक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने शक के आधार पर एक नामजद समेत पांच युवकों को हिरासत में ले लिया था लेकिन पूरी घटना से झूठ का पर्दा उठने पर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। सीओ द्वितीय आलोक दुबे का कहना है कि मामले में नर्स के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ बहन को अगवा करने और सामूहिक दुष्कर्म करने का जो मुकदमा कराया था वह पूरी तरह झूठा निकला। मुकदमे को स्पंज करके पांचों नामजद को क्लीनचिट दे दी गई है। टीम अब महिला पत्रकार की भूमिका की जांच में जुटी है।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सभी सबूत जुटाए जा चुके हैं। एफआईआर में बताई गई घटना के अनुसार पुलिस को कोई सबूत नहीं मिले बल्कि इसके विपरित नर्स की दिल्ली कबीरनगर में उसके मकान से निकलने की सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन मिली है। साथ ही उसके मेडिकल परीक्षण भी पुलिस के लिए पुख्ता सबूत है। इसके अलावा नर्स के करीबी दोस्त आजाद, अफजाल और गौरव की लोकेशन भी उनके बताए अनुसार नहीं मिली। ऐसे में पुलिस उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाकर जेल भेज दिया है।
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गाजियाबाद। 56 लाख का मकान हड़पने के लिए निर्भया जैसी दरिंदगी की झूठी कहानी रचने वाली नर्स पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नर्स के भाई के कहने पर दर्ज कराए गए मुकदमे को पुलिस ने खारिज कर दिया। इसमें नामजद पांचों लोगों को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है। पुलिस नर्स और उसके करीबी दोस्त आजाद, अफजाल और गौरव को गिरफतार कर जेल भेज चुकी है। अब उनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
नर्स ने अपने भाई से साजिश के तहत कबीरनगर के मकान मालिक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने शक के आधार पर एक नामजद समेत पांच युवकों को हिरासत में ले लिया था लेकिन पूरी घटना से झूठ का पर्दा उठने पर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। सीओ द्वितीय आलोक दुबे का कहना है कि मामले में नर्स के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ बहन को अगवा करने और सामूहिक दुष्कर्म करने का जो मुकदमा कराया था वह पूरी तरह झूठा निकला। मुकदमे को स्पंज करके पांचों नामजद को क्लीनचिट दे दी गई है। टीम अब महिला पत्रकार की भूमिका की जांच में जुटी है।
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पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सभी सबूत जुटाए जा चुके हैं। एफआईआर में बताई गई घटना के अनुसार पुलिस को कोई सबूत नहीं मिले बल्कि इसके विपरित नर्स की दिल्ली कबीरनगर में उसके मकान से निकलने की सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन मिली है। साथ ही उसके मेडिकल परीक्षण भी पुलिस के लिए पुख्ता सबूत है। इसके अलावा नर्स के करीबी दोस्त आजाद, अफजाल और गौरव की लोकेशन भी उनके बताए अनुसार नहीं मिली। ऐसे में पुलिस उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाकर जेल भेज दिया है।
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