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मेले में झूला टूटा... दो बच्चों समेत चार घायल
सार
मेले में झूला टूटा... दो बच्चों समेत चार घायलगाजियाबाद।झूले के मालिक और संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।एडीएम सिटी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।झूले का निरीक्षण किया गया है।
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विस्तार
मेले में झूला टूटा... दो बच्चों समेत चार घायल
गाजियाबाद। घंटाघर स्थित रामलीला मैदान में शुक्रवार रात करीब 11 बजे झूला टूट जाने से दो महिलाएं दो बच्चे और घायल हो गए। ब्रेक डांस नाम के इस झूले में कपनुमा सीट टूटकर अलग जा गिरी। घायल हुए बच्चे और महिलाएं इसी सीट पर बैठे थे। उन्हें संयुक्त अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद की गई लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की प्रारंभिक जांच में पता चला कि नट-बोल्ट ढीले होने के बावजूद झूला अपनी पूरी रफ्तार के साथ चलाया जा रहा था।
यही लापरवाही हादसे का सबब बनी। इसका पता चलने पर रामलीला मैदान के सभी झूले बंद करा दिए गए। झूले के मालिक और संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की है। हादसे में शहर के विजयनगर मिर्जापुर के निवासी अवनीश की पत्नी निशा, साली हेमा और दो बच्चे घायल हुए। अवनीश ने ही केस दर्ज कराया है। घायलों के सिर में चोट लगी। उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हेमा के सिर में चार टांके आए हैं। उधर, शनिवार देर शाम मेरठ से पहुंची लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल विंग के इंजीनियरों की टीम ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि झूले के नट-बोल्ट ढीले होने की वजह से हादसा हुआ।
एडीएम सिटी बिपिन कुमार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट गंभीर सिंह ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि तहसीलदार और एसएचओ जांच करके रिपोर्ट देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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मैंने कहा था, झूला टेढ़ा हो रहा है...
हादसे में घायल निशा ने कहा कि झूले में बैठते ही लग रहा था कि कुछ गड़बड़ है। इसकी सीट टेढ़ी हो रही थी। बैठने के दौरान ही लग रहा था कि यह हिल रही है। इस पर वहां मौजूद कर्मचारी को बुलाकर कहा था कि एक बार चेक कर ले लेकिन उसने नजरअंदाज कर दिया। झूलता चलते ही सीट से तेज आवाज आने लगी। एक मिनट बाद ही यह टूटकर जा गिरी।
झूला टूटते ही मची भगदड़
झूला टूटकर जैसे ही दूर जाकर गिरा, वहां भगदड़ मच गई। मेला कमेटी के लोग पहुंच गए और सभी झूले बंद करा दिए गए। झूले पर बैठे लोग इसके रुकते ही वहां से तेजी से निकल गए। सूचना पर थोड़ी ही दूर में पुलिस पहुंच गई। सीओ प्रथम अंशु जैन ने बताया कि मेला कमेटी से बात करके सुरक्षा की दृष्टि से सभी झूलों को फिलहाल बंद करा दिया गया है।
बड़ी लापरवाही : बगैर जांच के ही चलने दिए झूले
जिस झूले पर शुक्रवार को हादसा हुआ, उसकी स्वीकृति मनोरंजन कर विभाग ने पीडब्ल्यूडी की मेरठ स्थित मेकेनिकल शाखा के इंजीनियरों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर दी थी। एनओसी देने में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की लापरवाही भी सामने आई है। बताया गया है कि झूले का निरीक्षण किए बिना ही एनओसी जारी कर दी गई थी। एनओसी के बाद हर दूसरे-तीसरे दिन झूलों की जांच भी करनी होती है लेकिन इंजीनियर एक बार भी नहीं आए। सिर्फ घंटाघर रामलीला मैदान नहीं, शहर में इन दिनों कई जगह झूले चल रहे हैं। यहां भी जांच नहीं की जा रही है। हालांकि, हादसे के बाद पहुंचे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का दावा है कि झूला संचालक को एनओसी देते वक्त प्रतिदिन झूले के नट-बोल्ट चेक करने और कसने की शर्त लगाई जाती है। मनोरंजन कर अधिकारी यादवेंद्र अजय का कहना है कि पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा निगम, दमकल समेत कई अन्य विभागों की एनओसी के आधार पर झूला संचालक को 24 सितंबर को स्वीकृति दी गई थी। समय-समय पर पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को झूलों की जांच भी करनी होती है।
एडीएम सिटी ने भेजा नोटिस
पीडब्ल्यूडी की मेकेनिकल शाखा के अधिशासी अभियंता को एडीएम सिटी बिपिन कुमार ने नोटिस भेजा है। उन्होंने बताया कि अधिशासी अभियंता को हादसे में लापरवाही करने वाले अधिकारी को अपने स्तर से नोटिस जारी कर जवाब तलब करें और कार्रवाई करके अवगत कराएं। एडीएम सिटी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।
झूले का निरीक्षण किया गया है। इसकी जांच के लिए अवर अभियंता को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर ही तय हो पाएगा कि हादसे का कारण क्या रहा। - संचित चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी, मेकेनिकल शाखा
तहसीलदार और एसएचओ की ओर से जांच रिपोर्ट रविवार तक मिल जाएगी। प्रथम दृष्टया खामियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। - गंभीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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गाजियाबाद। घंटाघर स्थित रामलीला मैदान में शुक्रवार रात करीब 11 बजे झूला टूट जाने से दो महिलाएं दो बच्चे और घायल हो गए। ब्रेक डांस नाम के इस झूले में कपनुमा सीट टूटकर अलग जा गिरी। घायल हुए बच्चे और महिलाएं इसी सीट पर बैठे थे। उन्हें संयुक्त अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद की गई लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की प्रारंभिक जांच में पता चला कि नट-बोल्ट ढीले होने के बावजूद झूला अपनी पूरी रफ्तार के साथ चलाया जा रहा था।
यही लापरवाही हादसे का सबब बनी। इसका पता चलने पर रामलीला मैदान के सभी झूले बंद करा दिए गए। झूले के मालिक और संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की है। हादसे में शहर के विजयनगर मिर्जापुर के निवासी अवनीश की पत्नी निशा, साली हेमा और दो बच्चे घायल हुए। अवनीश ने ही केस दर्ज कराया है। घायलों के सिर में चोट लगी। उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हेमा के सिर में चार टांके आए हैं। उधर, शनिवार देर शाम मेरठ से पहुंची लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल विंग के इंजीनियरों की टीम ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि झूले के नट-बोल्ट ढीले होने की वजह से हादसा हुआ।
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एडीएम सिटी बिपिन कुमार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट गंभीर सिंह ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि तहसीलदार और एसएचओ जांच करके रिपोर्ट देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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मैंने कहा था, झूला टेढ़ा हो रहा है...
हादसे में घायल निशा ने कहा कि झूले में बैठते ही लग रहा था कि कुछ गड़बड़ है। इसकी सीट टेढ़ी हो रही थी। बैठने के दौरान ही लग रहा था कि यह हिल रही है। इस पर वहां मौजूद कर्मचारी को बुलाकर कहा था कि एक बार चेक कर ले लेकिन उसने नजरअंदाज कर दिया। झूलता चलते ही सीट से तेज आवाज आने लगी। एक मिनट बाद ही यह टूटकर जा गिरी।
झूला टूटते ही मची भगदड़
झूला टूटकर जैसे ही दूर जाकर गिरा, वहां भगदड़ मच गई। मेला कमेटी के लोग पहुंच गए और सभी झूले बंद करा दिए गए। झूले पर बैठे लोग इसके रुकते ही वहां से तेजी से निकल गए। सूचना पर थोड़ी ही दूर में पुलिस पहुंच गई। सीओ प्रथम अंशु जैन ने बताया कि मेला कमेटी से बात करके सुरक्षा की दृष्टि से सभी झूलों को फिलहाल बंद करा दिया गया है।
बड़ी लापरवाही : बगैर जांच के ही चलने दिए झूले
जिस झूले पर शुक्रवार को हादसा हुआ, उसकी स्वीकृति मनोरंजन कर विभाग ने पीडब्ल्यूडी की मेरठ स्थित मेकेनिकल शाखा के इंजीनियरों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर दी थी। एनओसी देने में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की लापरवाही भी सामने आई है। बताया गया है कि झूले का निरीक्षण किए बिना ही एनओसी जारी कर दी गई थी। एनओसी के बाद हर दूसरे-तीसरे दिन झूलों की जांच भी करनी होती है लेकिन इंजीनियर एक बार भी नहीं आए। सिर्फ घंटाघर रामलीला मैदान नहीं, शहर में इन दिनों कई जगह झूले चल रहे हैं। यहां भी जांच नहीं की जा रही है। हालांकि, हादसे के बाद पहुंचे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का दावा है कि झूला संचालक को एनओसी देते वक्त प्रतिदिन झूले के नट-बोल्ट चेक करने और कसने की शर्त लगाई जाती है। मनोरंजन कर अधिकारी यादवेंद्र अजय का कहना है कि पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा निगम, दमकल समेत कई अन्य विभागों की एनओसी के आधार पर झूला संचालक को 24 सितंबर को स्वीकृति दी गई थी। समय-समय पर पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को झूलों की जांच भी करनी होती है।
एडीएम सिटी ने भेजा नोटिस
पीडब्ल्यूडी की मेकेनिकल शाखा के अधिशासी अभियंता को एडीएम सिटी बिपिन कुमार ने नोटिस भेजा है। उन्होंने बताया कि अधिशासी अभियंता को हादसे में लापरवाही करने वाले अधिकारी को अपने स्तर से नोटिस जारी कर जवाब तलब करें और कार्रवाई करके अवगत कराएं। एडीएम सिटी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।
झूले का निरीक्षण किया गया है। इसकी जांच के लिए अवर अभियंता को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर ही तय हो पाएगा कि हादसे का कारण क्या रहा। - संचित चौधरी, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी, मेकेनिकल शाखा
तहसीलदार और एसएचओ की ओर से जांच रिपोर्ट रविवार तक मिल जाएगी। प्रथम दृष्टया खामियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। - गंभीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट