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22 करोड़ घोटाले मामले में अधिग्रहण के बाद भी करा दिया जमीन का बैनामा
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22 करोड़ घोटाले मामले में अधिग्रहण के बाद भी करा दिया जमीन का बैनामा
गाजियाबाद। 22 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले मामले में एक ओर एफआईआर मसूरी थाने में दर्ज हुई। जमीन एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण होने के बाद भी जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने का मामला सामने आया है। हरियाणा निवासी सेवानिवृत्त कर्नल रमेश गौतम आरोप है कि मसूरी निवासी इसरार ने उन्हें फर्जी तरीके से जमीन बेचकर बैनामा करा दिया। बाद में पता चला कि यह जमीन एक्सप्रेसवे में अधिग्रहण हो चुकी है। जमीन पर इसरार ने मुआवाज भी ले लिया। उन्होंने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो वहां से मामला खारिज हो गया।
कर्नल रमेश गौतम का कहना है कि 2013 में मसूरी निवासी इसरार ने अपनी जमीन बेचने की बात कही। इसरार ने सिकरोड़ा क्षेत्र में 390 गज जमीन दिखाई जिसे उन्होंने 24.38 लाख रुपये में खरीद ली। इसरार ने उस पर बैनामा भी करा दिया। बैनामा होने के बाद उन्होंने उस पर चारदीवारी और एक कमरा भी बनाया। कर्नल का कहना है कि कुछ समय बाद उन्होंने पता चला कि यह जमीन एक्सप्रसवे में पहले ही अधिग्रहण की जा चुकी है। इसरार ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। 2015 में उन्होंने कोर्ट में अर्जी डाली जहां से आवेदन खारिज हो गया। आरोप है कि इसरार ने फर्जीवाड़ा करके जमीन बेची, बैनामा कराया और उस पर मुआवजा भी ले लिया। उनका कहना है कि इसरार ने कई अन्य फौजियों को इस जाल में फंसाया है। मसूरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कीजाएगी।
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गाजियाबाद। 22 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले मामले में एक ओर एफआईआर मसूरी थाने में दर्ज हुई। जमीन एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण होने के बाद भी जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने का मामला सामने आया है। हरियाणा निवासी सेवानिवृत्त कर्नल रमेश गौतम आरोप है कि मसूरी निवासी इसरार ने उन्हें फर्जी तरीके से जमीन बेचकर बैनामा करा दिया। बाद में पता चला कि यह जमीन एक्सप्रेसवे में अधिग्रहण हो चुकी है। जमीन पर इसरार ने मुआवाज भी ले लिया। उन्होंने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो वहां से मामला खारिज हो गया।
कर्नल रमेश गौतम का कहना है कि 2013 में मसूरी निवासी इसरार ने अपनी जमीन बेचने की बात कही। इसरार ने सिकरोड़ा क्षेत्र में 390 गज जमीन दिखाई जिसे उन्होंने 24.38 लाख रुपये में खरीद ली। इसरार ने उस पर बैनामा भी करा दिया। बैनामा होने के बाद उन्होंने उस पर चारदीवारी और एक कमरा भी बनाया। कर्नल का कहना है कि कुछ समय बाद उन्होंने पता चला कि यह जमीन एक्सप्रसवे में पहले ही अधिग्रहण की जा चुकी है। इसरार ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। 2015 में उन्होंने कोर्ट में अर्जी डाली जहां से आवेदन खारिज हो गया। आरोप है कि इसरार ने फर्जीवाड़ा करके जमीन बेची, बैनामा कराया और उस पर मुआवजा भी ले लिया। उनका कहना है कि इसरार ने कई अन्य फौजियों को इस जाल में फंसाया है। मसूरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कीजाएगी।
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