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Ghaziabad News: अवैध हिरासत मामले में तत्कालीन एसएचओ समेत चार लोगों को समन
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गाजियाबाद। साहिबाबाद क्षेत्र के शहीदनगर के 20 वर्षीय युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मियों को समन तलब करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने थाने से तीन दिन की सीसीटीवी फुटेज भी लेकर आने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता मोहम्मद बिलाल ने बताया कि पीड़ित मननून अली का 20 वर्षीय पुत्र अमन छह जनवरी 2026 को घर से काम देखने की बात कहकर निकला था। जब वह रातभर घर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। सात जनवरी को परिजन साहिबाबाद थाने में अमन की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए गए तो पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि वह खुद ही उसे तलाश करें, अगर नहीं आता है तो दोबारा थाने आएं। इसके बाद अगले दिन आठ जनवरी को पुलिस ने इस मामले में गुमशुदगी दर्ज कर ली। याचिकाकर्ता का कहना है कि नौ जनवरी को उन्हें एक फोन कॉल प्राप्त हुई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को थाना शालीमार गार्डन से बताते हुए कहा कि उनका बेटा अमन जेल जा रहा है। इसके बाद परिवार थाने पहुंचा और युवक के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आरोप है कि अमन की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी समय पर नहीं दी गई और उसे अवैध रूप से 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जबकि उसकी गुमशुदगी साहिबाबाद थाने में दर्ज थी। इससे उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में पुलिस की कार्यप्रणाली और युवक के संबंध में की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।
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अधिवक्ता मोहम्मद बिलाल ने बताया कि पीड़ित मननून अली का 20 वर्षीय पुत्र अमन छह जनवरी 2026 को घर से काम देखने की बात कहकर निकला था। जब वह रातभर घर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। सात जनवरी को परिजन साहिबाबाद थाने में अमन की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए गए तो पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि वह खुद ही उसे तलाश करें, अगर नहीं आता है तो दोबारा थाने आएं। इसके बाद अगले दिन आठ जनवरी को पुलिस ने इस मामले में गुमशुदगी दर्ज कर ली। याचिकाकर्ता का कहना है कि नौ जनवरी को उन्हें एक फोन कॉल प्राप्त हुई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को थाना शालीमार गार्डन से बताते हुए कहा कि उनका बेटा अमन जेल जा रहा है। इसके बाद परिवार थाने पहुंचा और युवक के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आरोप है कि अमन की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी समय पर नहीं दी गई और उसे अवैध रूप से 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जबकि उसकी गुमशुदगी साहिबाबाद थाने में दर्ज थी। इससे उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में पुलिस की कार्यप्रणाली और युवक के संबंध में की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।
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