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Ghaziabad News: सिंभावली, किनौनी मिल का तौल केंद्र बंद होने के विरोध में उतरे छह गांवों के किसान
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गाजियाबाद। भनेड़ा गांव में सिंभावली और किनौनी शुगर मिल के तौल केंद्र बंद होने की जानकारी मिलने से किसानों में नाराजगी है। किसानों की मानें तो मोदी शुगर मिल की अपेक्षा दोनों मिलों का भुगतान बेहतर है। तौल भी पारदर्शी है, इसके बावजूद तौल केंद्र हटाए गए तो वह आंदोलन करेंगे।
भनेड़ा गांव में आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि बीते 14 साल से सिंभावली और किनौनी मिल के तौल केंद्र चल रहे हैं। इन पर छह गांवाें के किसान गन्ना डालते हैं। किसानों को कोई समस्या, शिकायत भी नहीं हैं, इसके बावजूद योजना के तहत तौल केंद्र को बंद किया जा रहा है। किसानों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसका सहमति पत्र गन्ना आयुक्त को सौंपने की बात कही। तय किया गया कि प्रतिनिधिमंडल गन्ना आयुक्त को पूरी स्थिति से अवगत भी कराएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि उनकी बात नहीं मानी गई तो वह आंदोलन करेंगे और किसी दूसरे मिल को अपना गन्ना न देकर क्रेशर पर डालने का काम करेंगे। इस मौके पर लीलू त्यागी, प्रकाश सिंह, भूषण त्यागी, अजय शर्मा, कालू, श्याम सुंदर, सत्तू, जितेंद्र आदि कई लोग मौजूद रहे। इस बारे में जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार का कहना है कि उनकी तरफ से कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। किसानों में भ्रम की स्थिति है। यह निर्णय गन्ना आयुक्त के स्तर से होता है। इस संंबंध में किसानों से बात कर उनको समझाया जाएगा।
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भनेड़ा गांव में आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि बीते 14 साल से सिंभावली और किनौनी मिल के तौल केंद्र चल रहे हैं। इन पर छह गांवाें के किसान गन्ना डालते हैं। किसानों को कोई समस्या, शिकायत भी नहीं हैं, इसके बावजूद योजना के तहत तौल केंद्र को बंद किया जा रहा है। किसानों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसका सहमति पत्र गन्ना आयुक्त को सौंपने की बात कही। तय किया गया कि प्रतिनिधिमंडल गन्ना आयुक्त को पूरी स्थिति से अवगत भी कराएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि उनकी बात नहीं मानी गई तो वह आंदोलन करेंगे और किसी दूसरे मिल को अपना गन्ना न देकर क्रेशर पर डालने का काम करेंगे। इस मौके पर लीलू त्यागी, प्रकाश सिंह, भूषण त्यागी, अजय शर्मा, कालू, श्याम सुंदर, सत्तू, जितेंद्र आदि कई लोग मौजूद रहे। इस बारे में जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार का कहना है कि उनकी तरफ से कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। किसानों में भ्रम की स्थिति है। यह निर्णय गन्ना आयुक्त के स्तर से होता है। इस संंबंध में किसानों से बात कर उनको समझाया जाएगा।
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