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क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर की फर्जी फेसबुक आईडी बना मांगे रुपये

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 12:50 AM IST
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क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर की फर्जी फेसबुक आईडी बना मांगे रुपये
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गाजियाबाद। साइबर अपराधियों ने क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर संजय पांडेय की ही फर्जी फेसबुक आईडी बना डाली। अपराधियों ने उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोगों को फेसबुक मेसेंजर के जरिये मेसेज भेजकर रुपयों की मांग शुरू कर दी। जानकारों के फोन आने पर इंस्पेक्टर ने अपनी फर्जी आईडी को ब्लॉक कराते हुए अपने मामले की जांच खुद शुरू कर दी है।
इंस्पेक्टर संजय पांडेय वर्तमान में गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की कमान संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों के उनके पास फोन आए कि पैसों की क्या जरूरत आ पड़ी। उन्होंने मना किया तो पता चला कि उनके नाम की फेसबुक आईडी से उनसे पैसों की मांग की गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सबसे पहले क्लोन आईडी को ब्लॉक कराया और फिर साइबर सेल की मदद से साइबर जालसाजों की तलाश में जुट गए। संजय पांडेय के मुताबिक उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोगों से साइबर अपराधियों ने 5 हजार से 20 हजार रुपये तक मांगे। लोगों को झांसे में लेने के लिए अपराधियों ने इमरजेंसी होने का हवाला दिया। उनका कहना है कि उनके 100 से अधिक जानकारों से रुपयों की मांग की गई, लेकिन गनीमत रही कि किसी ने पैसे नहीं भेजे। अधिकांश लोगों ने रुपये देने से पहले उन्हें फोन कर लिया।
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आईपी एड्रेस ट्रेस करने में जुटे इंस्पेक्टर
जिले में होने वाली संगीन घटनाओं पर काम करने वाले इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने अपने मामले की जांच भी खुद ही शुरू कर दी है। साइबर सेल की मदद से वह उस आईपी एड्रेस के ट्रेस करने में जुट गए हैं, जिसके माध्यम से उनके नाम का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया। इंस्पेक्टर का कहना है कि आईपी एड्रेस ट्रेस होने पर साइबर अपराधियों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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सिपाही से कप्तान तक साइबर अपराधियों के निशाने पर.............
आमतौर पर साइबर जालसाज सीधे-साधे लोगों को अपना टारगेट बनाते थे। लेकिन अब उन्होंने पुलिस को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सिपाही से लेकर कप्तान तक उनके निशाने पर हैं। पिछले साल एसएसपी गाजियाबाद के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों से रुपये मांगे गए थे। तो इस वर्ष एसपी क्राइम, इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाही के भी फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से रुपयों की मांग की गई। गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस को खुली चुनौती देने वाले एक भी साइबर जालसाज को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
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